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विश्व धरोहर दिवस- खजुराहो की पुरासंपदा में छिपे जीवन दर्शन से रू-ब-रू हुए बच्चे

- खजुराहो में हेरीेटेज वॉक के माध्यम से गौरवशाली अतीत से हुआ सीधा जुड़ाव

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छतरपुर। विश्व धरोहर दिवस पर खजुराहो में पत्रिका की पहल पर हेरीटेज वॉक का आयोजन किया गया। हेरीटेज वॉक में एक्सपर्ट ने स्कूल के बच्चों को खजुराहो की पुरासंपदा और उसमें छिपे जीवन दर्शन से रु-ब-रु कराया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी और इटेलियन गाइड सुधीर शर्मा ने चंदलेकालीन खजुराहो के मंदिरो, म्यूजियम में मौजूद पुरासंपदा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

संस्कृति की मिली झलक
खजुराहो के प्राचीन मंदिरों के रु-बरू होकर स्कूली बच्चे पुरातन काल की पाषण कला की समृद्धि से परिचित हुए। पंडित सुधीर शर्मा ने बताया कि 9वीं से 10 वीं सदी के दौरान बनाए गए दुनिया के सबसे अनूठे मंदिर मध्य भारत की कला के उदाहरण हैं।

खजुराहो के मंदिर ऐतिहासिक वास्तुकला, प्रेम और जुनून के प्रतीक हैं। इसी कला से रु-ब-रु कराने के लिए खजुराहो में हेरीटेज वॉक का आयोजन पत्रिका की पहल पर विश्व धरोहर दिवस पर किया गया है। हेरीटेज वॉक के जरिए खजुराहो के मंदिर, उसके इतिहास, इसकी जीवंत संस्कृति के बारे में बताया गया। इस दौरान खजुराहो नगर के हायर सेकंडरी स्कूल, कान्वेंट स्कूल समेत अन्य बच्चे मौजूद रहे।

पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों ने बताए पुरातन राज
हेरीटेज वॉक के दौरान भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी महेन्द्र पाल सिंह, कुणाल शर्मा, अखिलेश शुक्ला ने खजुराहो के गौरवशाली इतिहास के बारे में रोचक जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि खजुराहो, प्राचीन खर्जजुरा-वाहक आज अपनी खुद की कला और मंदिर वास्तुकला के एक विशिष्ट पैटर्न का प्रतिनिधित्व करता है।