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जिला चिकित्सालय के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र धमनिया निलंबित

सागर संभाग के कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार जिला चिकित्सालय छतरपुर के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र धमनिया को उनके कर्तव्य में अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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छतरपुर. सागर संभाग के कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार जिला चिकित्सालय छतरपुर के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र धमनिया को उनके कर्तव्य में अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पत्रिका ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पतालों में मरीज ले जाकर ऑपरेशन करने और लाखों वसूलने के मुद्दे पर प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की गई। जिला प्रशासन ने मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्रवाई प्रस्तावित ही, जिस पर कमिश्नर से कार्रवाई की है।

ड्यूटी समय में निजी अस्पताल में ऑपरेशन करते पकड़े गए


यह कार्रवाई छतरपुर कलेक्टर द्वारा 6 फरवरी 2025 को प्रस्तुत प्रतिवेदन पर की गई है, जिसमें यह पाया गया कि डॉ. धमनिया ने सरकारी ड्यूटी के समय प्राइवेट नर्सिंग होम में ऑपरेशन किया था। मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत सरकारी सेवक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं है और इस उल्लंघन के कारण उन्हें निलंबित किया गया है। डॉ. धमनिया का मुख्यालय अब छतरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में रहेगा। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

निजी अस्पतालों में ले जाकर लाखों वसूलने का नेटवर्क

जिला अस्पताल के सरकारी डॉक्टर मरीजों को अपने निजी अस्पतालों में ले जाकर लाखों वसूलने का नेटवर्क जिला अस्पताल में चल रहा है। ऐसे दो मामले सामने आने पर कलेक्टर ने सीएमएचओ और एसडीएम की टीम से छापेमारी कराई। छापेमारी में डॉ. राजेंद्र धमनिया निजी अस्पताल में सरकारी अस्पताल से लाए गए मरीज का ऑपरेशन करते पकड़े गए, जिन पर अब कार्रवाई की गई है।

धडल्ले से चला रहे निजी क्लीनिक-अस्पताल


छतरपुर के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर अपनी सरकारी ड्यूटी के दौरान ही अपने निजी अस्पतालों में मरीजों को देख रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज देने के बजाय वे अपने निजी क्लीनिकों या अस्पतालों में ज्यादा समय बिता रहे थे, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को होने वाली लंबी प्रतीक्षा सूची और सुविधाओं की कमी की समस्या भी बढ़ गई थी।