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जनपद पंचायत के बाबू  पर 7 लाख 81 हजार का लगाया जुर्माना

जनपद पंचायत के बाबू को सात साल की सजा, चार सहआरोपियो को तीन साल की कठोर कैद व 5-5 हजार का जुर्माना

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District Panchayat's Babu imposed penalty of 7 lakh 81 thousand

District Panchayat's Babu imposed penalty of 7 lakh 81 thousand

छतरपुर। मध्यान्ह भोजन योजना की शासकीय राशि हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा किए जाने और हेराफेरी करके करीब 28 लाख रुपए का गवन किए जाने के मामले में जनपद पंचायत कार्यालय के एक बाबू को कोर्ट द्वारा सजा सुनाई गई। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़कर कोर्ट में पेश किया था और मामले के 17 आरोपियों को फरार बताया था। कोर्ट ने पांचों आरोपियों को कठोर सजा सुनाई गई। एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत छतरपुर को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत शिकायतें मिलने पर उनके द्वारा अंतरिम रिपोर्ट तलब की गई थी। 19 अक्टूबर 2011 के आदेश के जरिए जांच के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित की गई थी। जांच में सामने आया था कि 68 हजार रुपए का चैक 7 सहायता समूहों को राशि अंतरिम करने के लिए जपं के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पत्र जारी कर लेख किया था। लेकिन जपं के सहायक लेखापाल नंदकिशोर नामदेव ने पत्र बदलकर उक्त चैक की राशि का भुगतान अपने खाते कराया। इसी तरह 1 लाख 72 हजार 490 रुपए की चैक की राशि फर्जीवाड़ा कर अपने खाते में जमा कराई। नंदकिशोर द्वारा 27 लाख 68 हजार 431 रुपए का गवन किया गया और 98 चैकों की राशि का उल्लेख चैक पंजी में नहीं मिला। 60 चैक 57 व्यक्तियों के नाम से जारी किए गए और इस आधार पर नंदकिशोर ने हेराफेरी की गई। 19 अक्टूबर 2011 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय सिंह ने एक लिखित आवेदन थाना कोतवाली को दिया। जिसमें पंजाब नेशनल बैंक के मध्यान्ह भोजन खाते में जारी चैंकों के पत्र बदलकर नंदकिशोर ने अपने नाम अंतरित करने और अन्य 46 व्यक्तियों के नाम 19 लाख 90 हजार 859 रुपए कुल 27 लाख 68 हजार 431 रुपए फर्जीवाड़ा करके विभिन्न व्यक्तियों को भुगतान किए जाने के संबंध में लेख किया गया था। पुलिस ने नंदकिशोर और अन्य अज्ञात 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना के दौरान फर्जीवाड़ा का कागजात जब्त किए। पुलिस ने नंदकिशोर नामदेव, वीरेंद्र यादव रमपुरा, बाबूराम अहिरवार महेबा, प्रभू अहिरवार महेबा और गोविंद श्रीवास परापट्टी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने 17 आरोपियों को फरार बताकर चालान पेश किया था

कोतवाली पुलिस ने रुप सिंह पिता फूल सिंह, कैलाश सिंह पिता त्रिलोक सिंह, खुमान सिंह पिता चतुर सिंह, राजेंद्र सिंह पिता केशव सिंह, अमर सिंह पिता राम सिंह, किशेरी लाल पिता छिगवा अहिरवार, लच्छुआ पिता ललजुआ अहिरवार, रामलाल पिता खुमना अहिरवार, बलराम सिंह सभी निवासी ललौंनी, हरदयाल पटेल निवासी कतरवारा, बद्रीप्रसाद अरजरिया गुरैया, सरजू कुशवाहा गुरैया, कमलापत यादव चैका, भगवान सिंह चौका, नंदलाल पाल चौका, संतोष सिंह पिता फेरन सिंह छिरावल और बृजगोपाल पिता बारेलाल शिवहरे निवासी सरानी को फरार बताकर नंदकिशोर, वीरेंद्र, बाबूराम, प्रभू और गोविंद्र के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश किया था।

अभियोजन की ओर से एजीपी अरुणदेव खरे ने पैरवी करते हुए सभी सबूतों को कोर्ट में पेश किए। विशेष न्यायाधीश देवनारायण मिश्र की अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी नंदकिशोर को 7 साल 4 माह की कठोर कैद के साथ 7 लाख 81 हजार 582 रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई गई। साथ ही आरोपी वीरेंद्र, बाबूराम, प्रभू और गोविंद को तीन-तीन साल की कठोर कैद के साथ पांच-पांच हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।