17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बोर्ड परीक्षा के बीच देर रात तक डीजे मचा रहे शोर

हाईकोर्ट व एसडीएम के आदेश का नहीं असर

2 min read
Google source verification
noise pollution

sound

छतरपुर. सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1998 और 2005 में फैसला देते हुए रात दस बजे के बाद डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के इसी प्रतिबंध व राज्य सरकार के निर्देश पर एक सप्ताह पहले एसडीएम ने आदेश जारी कर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने के निर्देश भी दिए। जिला न्यालाय भी इस मामले में सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी कर चुका है। लेकिन हालात फिर भी सुधरे नहीं है। माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं। इसी बीच शहर के सभी इलाकों में तेज आवाज वाले डीजे धड़ल्ले से देर रात तक बजाए जा रहे हैं। जिससे परीक्षार्थियों को परीक्षा की तैयारी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा देर रात तक बज रहे कानफोड़ू डीजे ने लोगों का रात का नींद और चैन छिन लिया है। खुले आम हो रही कानून के इस अनदेखी की ओर से पुलिस व सामान्य प्रशासन दोनों ही विभाग के अधिकारियों ने आंख मूंद ली है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।

इन इलाकों में है ज्यादा परेशानी
शादी-विवाह के आयोजनों मैरिज गार्डनों एवं अन्य कार्यक्रम स्थलों में देर रात तक डीजे के साउंड से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। शहर में डीजे के आवाज पर कोई प्रतिबंध दिखता नजर नहीं आ रहा है। शहर के पन्ना रोड, सागर रोड पर सबसे अधिक मैरिज हाउस हैं, इस इलाके में देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजते रहे हैं। इसके अलावा शहर में लगभग हर मोहल्ले में शादीघर हैं, जहां डीजे का जमकर देर रात तक प्रयोग हो रहा है। प्रतिबंध का भी सख्ती से पालन नहीं हो पाना शहर के नागरिकों के लिए मुसीबत बन रहा है। देर रात शादी समारोह में तेज आवाज में बजने वाले डीजे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ हैं। पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता व लोगों में जागरूकता की कमी के चलते शादियों में पूरी रात डीजे बज रहे हैं, इन पर कानफोड़ू आवाज में बजने वाले गानों से लोगों की नींद भी हो रही है, शहर में कई विवाह स्थलों पर ये डीजे पूरी रात बजते रहते हैं,लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

ये है कोर्ट का फैसला
शोर नियम 2000 के सीधे- सीधे उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2005 को ऐतिहासिक फैसला देते हुए भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी और जस्टिस अशोक भान की सुप्रीम कोर्ट खंडपीठ ने लाउडस्पीकरों और हॉर्नों के यहां तक कि निजी आवासों में भी इस्तेमाल पर व्यापक दिशा निर्देश जारी किए। रात 10 बजे और सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकरों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया।

शिकायत आती है, तो निश्चित ही कार्रवाई की जाती है। सभी थाना प्रभारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दोबारा उन्हें ताकीद किया जा रहा है, कि पुलिस टीम खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करे।
जयराज कुबेर, एएसपी

यहां भी खुलेआम बज रहे डीजे
घुवारा. इन दिनो माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाएं संचालित हो रही हैं। विगत दिनों कलेक्टर ने पुलिस कप्तान तिलक सिहं सहित जिले के समस्त थाना प्रभारियो की बैठक लेकर तेज गति से ध्वनि विस्तारक यंत्रो पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। लेकिन फिर भी ध्वनि प्रदूषण पर रोक नहीं लग पाी है। शनिवार की रात नगर में तीन जगह तेज आवाज में डीजे बजते रहे। हाईकोर्ट द्वारा केबल 40डेसीमल तक ही अनुमति लेकर डीजे बजाने के निर्देश हैं।