
संसाधनों की कमी
छतरपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की नई गाइड लाइन में कई तरह के बदलाव किए गए हैं। सर्वे से जनता को और अधिक जोडऩे के लिए डायरेक्ट ऑब्जरवेशन को पूरी तरह पब्लिक फीडबैक से जोड़ दिया गया है। शहर में सर्वे करने वाली टीमें अब जनता से बात करके उनके फीडबैक के आधार पर ही तय करेंगी कि शहर कितना साफ है। पिछले सर्वे में 1500 अंक प्रत्यक्ष अवलोकन के थे और इतने ही पब्लिक फीडबैक के मिलते थे, लेकिन इसमें कई जगह गड़बड़ी की आशंका होती थी। इस बार इन दोनों को जोड़कर एक कैटेगरी बनाई गई है। 1800 अंक तय किए गए हैं। इस व्यवस्था के तहत ज्यादा पारदर्शिता होगी और गड़बड़ी की आशंका कम रहेगी। नगरपालिका ने पब्लिक फीडबैक के मामले में अच्छा काम किया है, लेकिन डोर-टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था को पहले से बेहतर नहीं कर पाए हैं।
संसाधनों की कमी
नगर पालिका छतरपुर क्षेत्र के 40 वार्डो को स्वच्छ रखने के लिए नपा द्वारा 30 चार पहिया वाहन, 8 ट्रैक्टर और 4 डंपर का उपयोग किया जाता है। इतने कम वाहनों से एक तो पूरे शहर का कचरा प्रतिदिन एकत्र नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं आधे से अधिक वाहन कई दिनों से नपा परिसर में खराब पड़े हुए हैं। शहर में स्थित कॉलोनियों के घरों से कचरा एकत्र करने के लिए नगर पालिका छतरपुर क्षेत्र स्थित 40 वार्डों में 30 चार पहिया वाहनों का उपयोग किया जाता है। जिसमें से 10 वाहन कई दिनों से परिसर में खराब पड़े हुए हैं। इन वाहनों की कंडीशन ठीक न होने के कारण करीब 6 वाहन खराब होते रहते हैं। अब बाकी के बचे 14 वाहन शहर के 40 वार्डों में पहुंचकर प्रतिदिन कचरा कैसे एकत्र करेंगे। नपा प्रशासन द्वारा शहर के मुख्य चौराहों, तिराहों और गलियों में एकत्र कचरे को उठाने के लिए 8 ट्रैक्टर और 4 डंपरों का उपयोग किया जाता है। इन वाहनों की कंडीशन भी ठीक न होने से आए दिन एक-दो वाहन खराब होते रहते हैं। इस कारण शहर के अधिकांश वार्डों में महीनों वाहन नहीं पहुंचते और रोड पर कचरा फैला रहता है।
6000 अंकों में इस तरह होगा मूल्यांकन
स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की प्रतिस्पर्धा का मूल्यांकन तीन चरणों में होगा। प्रत्येक तिमाही में सर्विस लेवल वर्क का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रथम चरण अप्रेल-जून में की गई प्लानिंग के आधार पर मूल्यांकन होगा। द्वितीय चरण का मूल्यांकन जुलाई से सितंबर के बीच का होगा। तृतीय चरण का सर्वेक्षण अक्टूबर से दिसंबर के बीच होगा। हर तिमाही के लिए 2000 अंक निर्धारित है। कुल 6000 अंक में से 40 फीसदी 2400 अंक शत प्रतिशत घरों से कचरा कलेक्शन, परिवहन, सेग्रीगेशन और सेनिटेशन कार्य के लिए निर्धारित है। 1800 अंक सिटिजन फीडबैक, स्वच्छता एप और इनोवेशन कार्य पर मिलेगा। 1800 अंक सर्टिफिकेशन कार्य के मापंदड को पूरा करने पर मिलेगा। सर्टिफिकेशन के अंतर्गत ओडीएफ डबल प्लस के साथ वाटर प्लस वर्क को शामिल करना है।
इस बार ये होगी चुनौतियां
इस बार शहर की स्वच्छता स्थानीय नागरिकों की संतुष्टि पर ही अधिक निर्भर होगी। सिटीजन फीडबैक के सवाल बदले जाएंगे। इसमें हर क्षेत्र के लोगों से उनकी राय पूछी जाएगी। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी बात रख सकेंगे। जिसमें बगीचा, दुकानदारों, होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला से, एजुकेशन इंस्टीट्यूट, रेस्टोरेंट, सरकारी या प्राइवेट आफिस आदि से जुड़े लोगों से फीडबैक लिया जाएगा। शहर को ओडीएफ सर्टिफिकेट दिलाने के लिए इस बार नगरीय निकायों को पहले की तुलना में अधिक मेहनत करनी होगी। ओडीएफ का मूल्यांकन भी नए प्रारुप में किया जाएगा।
फैक्ट फाइल
ये होगी 1800 अंको में सर्वे की नई व्यवस्था
600 अंक सिटीजन फीडबैक के होंगे।
450 अंक सिटीजन वॉइस पर मिलेंगे।
350 अंक स्वच्छता एप से शिकायतों के निराकरण।
300 अंक प्रत्यक्ष अवलोकन के हैं।
100 अंक स्वच्छता में इनोवेशन के हैं।
पुराने मॉडल के वाहनों के उपकरण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण से कचरा वाहनों के सुधार में समय लग रहा है। बड़े शहरों से उपकरण मंगवाए गए हैं। वाहनों को जल्द सुधार लिया जाएगा।
संजेश नायक, स्वच्छता प्रभारी
Published on:
06 Mar 2021 06:35 pm
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