
अलाव के सहारे हो रहा ठंड से मुकाबला
छतरपुर. ठंड के मौसम में प्रदेश में नौगांव का न्यूनतम तापमान पचमढ़ी से भी कम हो जाता है। मौसम का असर इन दोनों स्थानों पर न केवल सर्दी बल्कि गर्मी में भी सबसे अधिक पड़ता है। गर्मियों में अधिकतम तापमान आसपास के जिलो से एक से डेढ़ डिग्री अधिक दर्ज होता है। खजुराहो में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री और नौगांव में 1.5 डिग्री तक चला जाता है। वहीं गर्मियों में अधिकतम तापमान 48 से 49 डिग्री तक पहुंचता है।
अंग्रेजों के बसाए नौगांव नगर की भौगोलिक स्थिति ही सबसे ज्यादा ठंड व गर्मी की वजह है। इसके साथ ही ग्रेनाइट के पहाड़ों के चलते भी मौसम का असर बढ़ जाता है। इसी तरह खजुराहो में भी भौगौलिक स्थिति व ग्रेनाइट के पहाड़ों के कारण सर्दी में सर्दी और गर्मी में गर्मी का असर आसपास के इलाके से एक से दो डिग्री अधिक बढ़ जाता है। कर्क रेखा के उत्तर में नौगांव विशेष स्थान पर बसा है। जिससे सूर्य की किरणें कम प्रभाव से पहुंचती है। जिससे ज्यादा ठंडा होता है। इसके साथ ही हिमाचल से आने वाली उत्तरपूर्वी हवाएं पहले पहुंचती है, इसलिए ठंड अधिक होती है। वहीं, नौगांव के नीचे चट्टानी मिट्टी की पथरीली परत है, जो जमीन की ऊर्जा विचरण की क्षमता को प्रभावित करती है। ठंड में ज्यादा ठँडी व गर्मी में ज्यादा गर्मी पड़ती है ठीक ऐसे ही हालात खजुराहो में भी है।
नौगांव व खजुराहो की लोकेशन व पहाड़ो के चलते सर्दी व गर्मी में तापमान सबसे कम और ज्यादा रहता है। लोकेशन के चलते सूर्य की किरणों का ठंड में असर कम होने से उत्तर से आने वाली हवाएं का असर ज्यादा पड़ता है।
आरएस परिहार, प्रभारी, मौसम केन्द्र खजुराहो
ग्वालियर से लेकर झांसी, नौगांव, खजुराहो की टोपोग्राफी ऐसी है कि मौसम का असर अन्य स्थलों से ज्यादा पड़ता है। इसके साथ ही ग्रेनाइट पत्थर तापमान को ऑब्जर्व नहीं करता है। इसलिए इसका असर वातावरण में बढ़ जाता है। यही वजह है कि खजुराहो व नौगांव का तापमान प्रदेश में सबसे कम और सबसे ज्यादा होता है।
डॉ. पीके जैन, प्रोफेसर, भूगर्भ शास्त्र, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
Published on:
02 Jan 2025 10:46 am
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