9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ग्रामीण इलाकों में शासकीय स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त नहीं होने से झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच रहे मरीज

स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने और झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने को लेकर सजग नहीं स्वास्थ्य विभाग

3 min read
Google source verification
 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छटीबम्होरी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छटीबम्होरी

छतरपुर. जिले में ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हैं और इसको लेकर विभाग की ओर से प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में इसका लाभ क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। वहीं जिले में बडी संख्या में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। ऐसे में ग्रामीण इनकी गिरफ्त में आ रहे हैं। जिससे कई बाद मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जिले में ग्रामीण इलाकों में इलाज करने के लिए ३६ पीएचसी मौजूद हैं और सभी में नियतिम डॉक्टर नहीं हैं। या फिर पीएचसी में डॉक्टर नियतिम नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में मरीजों को इलाज कराने के लिए आसपास के झोलाछाप डॉक्टर के पास जाना पड़ रहा है। जिससे ये डॉक्टर फीस तो नहीं लेते हैं लेकिन हैवी डोज व महंगी दवाई देते के साथ ही जांच के नाम पर बिल बना रहे हैं। जिससे मरीजों तत्काल आराम तो लग जाता है लेकिन कई बार हैवी डोज से अन्य परेशानियां होने लगतीं हैं। वहीं कई बाद मरीजों की हालात अधिक बिगड़ जाती है जिसके बाद यह डॉक्टर किसी अन्य क्षेत्र में पहुंचकर अपनी दुकान चलाने लगते हैं।
अपने आप को रजिस्टर्ड चिकित्सक बताकर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले दिनों दिन बुलंद होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग द्वारा इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने के कारण इन दिनों झोलाछाप डॉक्टर जगह-जगह पर क्लीनिक खोल कर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते हैं। ऐसे डॉक्टर शहर के अंदर भी क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। इसके साथ की जिले के बकस्वाहा, किशनगढ़, घुवारा, हरपालपुर, बारीबढ़, चंदला, सरवई, चंद्रनगर क्षेत्र में अधिक झोलाछाप डॉक्टर हैं। यहां पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हैं।

हो चुकी हैं घटनाएं
बीते कुछ वर्ष पहले बकस्वाहा के कुढाजनी गांव निवासी चमकिया बारेला 4 नवम्बर 17 को अपने पुत्र सरवन बारेला (ढेड वर्ष) को लेकर बकस्वाहा के झोलाछाप डॉ कमलापत कुशवाहा के यहां पर ले गया और इलाज कराया था। जिसके बाद पुलिस ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन चार में बाद जेल से आते ही फिर से अपने घर पर ही लोगों का इलाज करना फिर शुरू कर दिया। इसके बाद बकस्वाहा क्षेत्र में अभी तक ३ और मामले गलत इलाज से मौत के आए हैं। बमीठा क्षेत्र के बराखेरा गांव की एक महिला की वर्ष २०१८ में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद मौत हो गई थी।
इसके साथ ही बीते करीब डेढ़ माह पहले लवकुशनगर में गलत इलाज लगने एक बच्चे की मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने काफी हंगामा किया था। इस दौरान डॉक्टर मौके पर बाइक छोड़ कर फरार हो गया था।

विभाग कर पा रहा कार्रवाई
फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ अभियान में सबसे बड़ी समस्या विरोध और राजनीति है। इसको लेकर जब भी कार्रवाई शुरू होती है संबंधित पक्ष दबाव बनाने के लिए राजनीतिक व्यक्तियों का सहारा लेते हैं, जिससे अधिकारियों द्वारा उस पर कार्रवाई नहीं की जाती है। ऐसे में वह बच जाते हैं। साथ ही स्थानीय अधिकारियों के चलते इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्र्रवाई नहीं हो पा रही है।

विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बैठक में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निर्णय लिए जाते हैं और बैठक में विभाग के अलग-अलग शाखा के अधिकारियों की टीम गठित कर कार्रवाई को अंजाम देने के लिए रणनीति बनाई जाती है। बैठक में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले व निवारक दवाओं की पुडिय़ा थमाने वाले फर्जी डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग द्वारा टीम गठित किया गया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह झोलाछाप चिकित्सक शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में अंग्रेजी दवाओं के साथ प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टर की डिग्री, दवाइयां का रजिस्ट्रेशन लेकर धड़ल्ले से काम रहे हैं।

इनका कहना है
हम इसको लेकर टीम गठित करेंगे और एक अभियान के रुप में कार्रवाईयां करेंगे। साथ ही जहां पर भी स्वास्थ्य सेवाओं में कमी पाई जाएगी, वहां पर सेवाएं दुरस्त की जाएंगी। जिससे लोगों को सरकारी अस्पतालों में इलाज मिल सके।
डॉ. लखन तिवारी, सीएमएचओ, छतरपुर