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जटाशंकर, मौनासैया में नहीं बन सका इको टूरिज्म जोन, अब धुबेला का प्रस्ताव भेजा

छतरपुर. जिले के जटाशंकर धाम स्थित मौनासैया, भीमकुंड़ और धुबेला में इको टूरिज्म स्पॉट बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। इसके लिए एक-एक करोड़ का प्रस्ताव शासन के पास मंजूरी के लिए दो साल से लबित है। योजना के तहत ईको हट, डॉरमेट्री, सुइट, रेस्टोरेंट, व्यू प्वॉइंट, सेल्फी प्वाइंट, नेचर ड्रेल, पगोड़ा […]

छतरपुरJun 15, 2024 / 10:55 am

Dharmendra Singh

eco tourism

धुबेला पहाड़ी

छतरपुर. जिले के जटाशंकर धाम स्थित मौनासैया, भीमकुंड़ और धुबेला में इको टूरिज्म स्पॉट बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है। इसके लिए एक-एक करोड़ का प्रस्ताव शासन के पास मंजूरी के लिए दो साल से लबित है। योजना के तहत ईको हट, डॉरमेट्री, सुइट, रेस्टोरेंट, व्यू प्वॉइंट, सेल्फी प्वाइंट, नेचर ड्रेल, पगोड़ा झोपड़ी, पार्किंग स्थल विकसित किए जाने थे। हालांकि कहीं भी कांक्रीट का निर्माण नहीं किया जाएगा। इन स्थानों के प्राकृतिक स्वरुप को बनाए रखते हुए लोगों को वन और वन्य जीव से जोडऩे, मनोरंजन करने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की योजना है। लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिलने से अब वन विभाग ने धुबेला पहाड़ी पर इको टूरिज्म जोन विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है।
पर्यटकों को वन संपदा से जोडऩे की योजना

मऊसहानियां के पास महेबा वनक्षेत्र में धुबेला पहाड़ी पर इको टूरिज्म जोन विकसित किया जाएगा। यह काम वन विभाग 2 करोड़ 75 लाख की लागत करेगा। जिला वन विभाग ने कार्ययोजना तैयार करके मप्र शासन को भेजी है। मंजूरी के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। पहाड़ी के नीचे धुबेला तालाब है। तालाब किनारे संग्रहालय है। अब यहां पहाड़ी के पास लगे वन क्षेत्र में पर्यटन जोन का विकास किया जाएगा। जंगल वाले इन क्षेत्रों में सडक़ की कनेक्टिविटी बेहतर की जाएगी। इसके साथ ही इको हट डॉरमेट्री, रेस्टोरेंट, व्यू प्वॉइंट, सेल्फी प्वाइंट, नेचर ट्रेल, पगोड़ा झोपड़ी, पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे। हालांकि कहीं भी कांक्रीट का निर्माण नहीं किया जाएगा। इन स्थानों के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए विकसित किया जाएगा। धुबेला आने वाले पर्यटकों को भी वन संपदा से जोड़ा जाएगा।
ये बनाने की है योजना


प्रस्तावित ईको पर्यटन में 2 वॉच टॉवर और 3 सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे। साथ ही धुबेला झील को देखने के लिए लेक व्यू प्वाइंट को विकसित किया जाएगा। 4 किमी लंबाई और 2 मी चौड़ाई में पैदल मार्ग विकसित किया जाएगा। इसके किनारे आकर्षक लैंप लगाकर रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। इको पर्यटन में भीम कुण्ड और दीवान शाह मंदिर का जीर्णोद्धार होगा। इको पर्यटन क्षेत्र में 1 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न नक्षत्र प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। 1 हेक्टेयर क्षेत्र में नवगृह ऑक, पलास, खैर, चिरचिटा, पीपल, गूलर, समी, दूर्वा घांस और कुश: घास प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाएगा। नेचर ट्रेल प्रस्तावित इको पर्यटन में 5 किमी की लंबाई में नेचर ट्रेल का निर्माण किया जाएगा।
उद्यान विकसित करेंगे


प्रस्तावित इको पर्यटन क्षेत्र के 1 हेक्टेयर क्षेत्र में तितली वन तैयार किया जाएगा। इसमें तितलियों का आकर्षित करने वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। तितलियों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न घटकों का विकास किया जाएगा। इसी प्रकार 5 हेक्टेयर में विभिन्न प्रजाति के बांस का रोपण किया जाएगा। फाइकस उद्यान एंव आर्बोरेटम प्रस्तावित इको पर्यटन में 2 हेक्टेयर में फाइकस प्रजाति एवं अन्य वनस्पतियों के उद्यान की स्थापना की जाएगी।
लोगों को प्राकृतिक स्थल से जोडऩे की योजना


इको टूरिज्म स्पॉट विकसित होने से जहां वन संपदा से लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा। वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्राकृतिक स्थलों का संरक्षण होने के साथ नई पीढ़ी इससे जुड़ सकेंगी। इको पर्यटन स्थलों पर्यटकों को रात्रि विश्राम की व्यवस्था भी दी जाएगी। धुबेला आने वाले पर्यटकों को भी प्राकृतिक रहवास से जोड़ा जाएगा।
इनका कहना है
पर्यटकों को प्राकृतिक रहवास से जोडऩे के लिए इको टूरिज्म का प्रस्ताव है। धुबेला का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
सर्वेश सोनवानी, डीएफओ

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