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हाईटेक हुआ चुनाव प्रचार, एलइडी स्क्रीन से एक साथ कई जगह मतदाताओं को संबोधित कर रहे प्रत्याशी

मोदी-शिवराज मास्क को भी हो रहा इस्तेमाल, कार्यकताओं तक सोशल मीडिया से पहुंचा रहे मैसेज

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मास्क का प्रयोग करते कार्यकर्ता

मास्क का प्रयोग करते कार्यकर्ता

छतरपुर. संचार क्रांति का असर चुनाव प्रचार पर भी पड़ा है। चुनाव हाईटेक हुआ तो प्रचार के तौर-तरीके भी बदल गए। ज्यादातर राजनीतिक दल और उम्मीदवार संचार क्रांति के जरिए चुनाव प्रचार को तवज्जो दे रहे हैं। बडे राजनीतिक दलों ने तो नए तौर-तरीके से प्रचार के लिए अलग से प्रकोष्ठ तक बनाए हैं। चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान बैनर, होर्डिंग्स आदि को लेकर सख्त रुख अपनाया तो राजनीतिक दलों का रुझान प्रचार के दूसरे तरीकों की ओर चला गया है। इसमें उनको कम समय में ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप,एलइडी रथ का इस्तेमाल किया जा रहा है। जो नेता या निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में खड़े हैं, उनके पास प्राइवेट कंपनियां भी लाइजनिंग करने में लगी हैं। ये कंपनियां हाइटेक प्रचार का ठेका लेती हैं। बीजेपी और अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं के मुखौटे और उनके पहनावे का भी प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल बीजेपी में मोदी और शिवराज के चेहरे के मुखौटे और उनके पहनावे का प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की होड़
जनता के बीच डोर टू डोर जनसंपर्क से लेकर रिक्शा, ठेला, ऑटो, फोर व्हीलर और मोबाइल वैन पर एलइडी स्क्रीन लगाकर ऑडियो-वीडियो के साथ प्रत्याशी प्रचार करते दिख रहे हैं। लोगों के दिलों-दिमाग में प्रत्याशियों का नाम और उनका चुनाव चिन्ह बैठ जाए, इसलिए सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक लगातार प्रचार का जोर चल रहा है। सुबह से उम्मीदवार समर्थक के साथ डोर टू डोर जनसंपर्क में लगे हैं। इस बीच हर गली और मोहल्ले में विभिन्न वाहनों से प्रचार हो रहा है। जनता को लुभाने के लिए हर प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से दिन-रात प्रचार में लगे हैं। घर-घर जाकर न सिर्फ वोट मांग रहे हैं, बल्कि अपने चुनावी वायदो के माध्यम से वार्ड में हर तरह की सुविधाएं बहाल करने के दावे और वायदे भी कर रहे हैं।

चुनावी नारे पर जोर
राज्य और केंद्र की सत्ता में काबिज बीजेपी फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स पर अभियान चला रही है, तो वहीं राज्य में सत्ता के वनवास को खत्म करने की कोशिश में कांग्रेस ने भी वक्त है बदलाव का मुहीम छेड़ रखी है। चुनाव में प्रचार सिर्फ सोशल मीडिया साइट्स के दंगल तक ही सीमित नहीं है,बीजेपी के साइबर योद्धा बनाम कांग्रेस के सोशल सिपाहियों के बीच जंग चल रही है। फिल्मी गानों की धुन पर भाजपा विकास की इबारत लिख रही है, तो कांग्रेस गानों के जरिए बदलाव के संकते दे रही हैं। लोगों की जबान पर चढ़े फिल्मी गानों की धुन का इस्तेमाल करके चुनावी गाने बनाए गए हैं। इन गानों के जरिए हर चौक-चौराहे और गली-गली में उम्मीदवार अपने नाम और चुनाव चिन्ह का प्रचार कर रहे हैं। इसके साथ ही जुगलवंदी वाले नारों का इस्तेमाल भी चुनाव प्रचार में किया जा रहा है।

मास्क के जरिए बड़े नेताओं की जता रहे मौजूदगी
पार्टी के बड़े नेताओं के जरिए मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए न केवल उनकी आमसभा और रोड शो के इंतेजाम किए गए हैं। बल्कि उनके आने से पहले कार्यकर्ता बड़े नेताओं के मुखौटे और पहनावे का उपयोग करके लोगों का ध्यान खींचने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मुखौटे पहनकर प्रचार में उतरे हैं।

कार्यकताओं तक सोशल मीडिया से पहुंचा रहे मैसेज
सिर्फ प्रत्याशी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों ने भी डिजिटल व सोशल मीडिया कैंपेनिंग को हथियार बना लिया है। आइटी सेल का अलग वॉर रूम तैयार किया गया है। बूथ लेवल तक टीम खड़ी की गई है। वाट्सएप ग्रुप से पार्टी और उम्मीदवार के संदेश कार्यकताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। पार्टी के मैसेज ग्रुप से लेकर कार्यकर्ता सोशल मीडिया के विभिन्न साधनों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के मीडिया सेल लगातार हाईटेक चुनाव प्रचार पर नजर रखे हुए हैं। क्षेत्र विशेष में पलड़ा हल्का होता दिखता है, तो पूरी आइटी टीम जरूरत के हिसाब से क्षेत्र विशेष में ज्यादा जोर देने लगता है।