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हर दिन लोग बदक, मछलियों को खिला रहे दाना, कर रहे तालाब के घाटों की सफाई

गंगा-जमुनी तहजीब का गवाह बना प्रताप सागर तालाब

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Every day people are eating ducks, fish feeding grains, cleaning ponds of the ponds

Every day people are eating ducks, fish feeding grains, cleaning ponds of the ponds

छतरपुर ञ्च पत्रिका. शहर का सबसे सुंदर तालाब है प्रताप सागर। गंगा-जमुनी तहजीब का गवाह भी यह तालाब है। शहर के लोगों के घरों में होने वाले हर धार्मिक आयोजनों से लेकर पारंपरिक धार्मिक कर्म-कांड, पूजन, जलविहार, विसर्जन से लेकर हर अनुष्ठान के लिए यही इकलौता तालाब लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है। दो दशक पहले यह तालाब उपेक्षित था। लेकिन शहर के ही दो संगठनों के लोगों ने आगे आकर इस तालाब को जलकुंभी से मुक्त किया। इसके बाद तालाब के संरक्षण का बीड़ा उठाया गया। नियमित सफाई करके इस तालाब को प्रताप नवयुवक संघ और पर्यावरण वाहिनी ने फिर से उसके पुराने वैभव में लौटा दिया। अब इस तालाब के घाट सुंदर है। चारों तरफ लाइटिंग है। पार्क और चौपाटी भी नगरपालिका ने यहीं विकसित कर दी हे। शहर के लोग अब भी इस तालाब की सफाई को लेकर जागरूक नहीं है, लेकिन यहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं की टीम अब भी नियमित रूप से तालाब की सफाई करके उसमें डाली जाने वाली गंदगी को बाहर निकालने का काम कर रही है। वहीं मंदिरों की पूजन सामग्री को तालाब में डालने से रोकने के लिए अलग से पात्र रखवाए गए हैं, इसके बाद भी नालों से होकर आने वाली गंदगी को यहां के लोग साफ करने में लगे हैं।
प्रताप सागर तालाब के राजा घाट के अलावा नर्वदेश्वर मंदिर की ओर के घाट को प्रताप नवयुवक संघ के उत्साही कार्यकर्ताओं ने मानवता का घाट बना दिया है। गर्मियों के दिनों में इस घाट पर फिस प्वाइंट बनाकर मछलियों को दाना चुगाने का स्थाई ठिकाना बना दिया गया। शहर के लोग हर दिन बड़ी सं या में अपने परिवार और बच्चों के साथ तालाब पर पहुंचकर मछलियों को दाना चुगाते हैं। वहीं कई लोग तालाब में तैरने वाले बतखों के समूह को भी ब्रेड-पोपकोर्न आदि चुगने के लिए डालते हैं। इंसान का जीव से रिश्ता जोडऩे वाला यह घाट अब मानवता घाट के नाम से वि यात हो गया है। इस घाट पर आकर नियमित रूप से मछलियों, चीटियों को दाना डालने वाले पवन असाटी बताते हैं कि शहर के तालाबों की स्थिति दयनीय है। लेकिन प्रताप सागर तालाब को कुछ हद तक लोगों ने बचाकर रखा है। यहां हर दिन जाना और मछलियों व अन्य जीवों को दाना डालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा हो गया है। इस संस्कार से वे अपने बच्चों को भी जोड़ रहे हैं।
प्रताप सागर तालाब को गर्मियों के दिनों में सूखने से बचाने के लिए नगरपालिका ने पानी की सप्लाई लाइन से इसे जोड़ा है। गर्मियों में यह तालाब पूरे समय भरा रहता है। इसका प्रभाव यह होता है कि तालाब किनारे के ट्यूबवेल से पूरे समय टैंकरों में पानी भरकर शहर में सप्लाई किए जाते हैं। तालाब के भरे रहने से ट्यूबवेल का जलस्तर भी ठीक रहता है। वहीं प्रताप नवयुवक संघ ने भी नर्मदेश्वर मंदिर के गर्भगृह से निकलने वाले अभिषेक के जल को इस तालाब में सीधे पहुंचाने की व्यवस्था कर दी है।
अतिक्रमण बना चुनौती
प्रताप नवयुवक संघ के प्रदीप सेन का कहना है कि प्रताप सागर तालाब सहित शहर के सभी तालाबों के लिए अतिक्रमण बड़ी चुनौती बना है। इसके बाद भी प्रताप सागर तालाब को बचाने के लिए बड़े स्तर पर काम हुआ है। लोगों के यहां आने-जाने से इस तालाब पर अतिक्रमण के प्रयास पहले से ही विफल होते रहे है। इसके बाद भी नए निर्माण के नाम पर तालाब चारों तरफ से अपने सौंदर्य को खोता जा रहा है। इसलिए जरूरी है कि तालाब के घाटों सहित तालाब के क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को स ती से हटाया जाना चाहिए, ताकि तालाब अपने पुराने स्वरूप में जीवित रह सके।