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जून 2021 के बाद सोलर प्लांट निर्माण की फाइल नहीं बढ़ सकी आगे, पिछड़ रही योजना

निजी जमीन का अधिग्रहण भी नहीं हुआ अब तक, २ हजार लोगों को मिलना है रोजगारमार्च 2023 में 950 मेगावाट का सोलर प्लांट बिजावर के झरकुआं में शुरु करने का लक्ष्य पिछडा

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2017 में लिया गया था सोलर प्लांट का निर्णय

2017 में लिया गया था सोलर प्लांट का निर्णय

छतरपुर। जिले में 2013 से थर्मल पावर प्लांट लगाने की कवायद पर्यावरण मंजूरी न मिलने पर 2017 में सोलर पावर प्लांट लगाने की ओर मुड़ गई। लेकिन सोलर प्लांट लगाने के मार्च 2023 के लक्ष्य के मुताबिक अब भी काम नहीं चल रहा है। सोलर प्लांट के पहले पार्ट बरेठी में बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य किया जा रहा है। वहीं दूसरे पार्ट झरकुआं में नवंबर 2021 में होने वाले टेंडर की प्रक्रिया शुरु नहीं हो सकी है। न प्लान के मुताबिक भूमि पूजन हुआ है न ही जनवरी 2022 में काम शुरु करने की योजना पर काम शुरु हो पाया हैै।

2017 में लिया गया था सोलर प्लांट का निर्णय
वर्ष 2013 में 28 हजार करोड़ की लागत से थर्मल पावर प्लांट लगाने की कवायद ठंडे बस्ते में जाने के बाद वर्ष 2017 में सोलर प्लांट लगाए जाने का निर्णय लिया गया। जून 2021 में नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा विकास के उपसचिव दीपक सक्सेना ने बिजावर में प्रस्तावित 950 मेगावाट के प्लांट के लिए झरकुआं गांव का दौरा किया और नवंबर के पहले भूमिपूजन और नंवबर में टेंडर की बात कही गई, लेकिन जून 2021 के बाद से इस दिशा में अबतक कोई प्रगति नहीं हुई है।

झरकुुआं गांव में लगना है सोलर प्लांट
बिजावर तहसील के ग्राम पंचायत झरकुंआ के ग्राम पुरवा में 950 मेगावॉट का सौर-ऊर्जा संयंत्र का निर्माण किया जाना है। जिसके लिए चाही गई जरूरी भूमि कलेक्टर छतरपुर द्वारा उपलब्ध कराई जा चुकी है। जमीन का आवंटन, सीमांकन एवं आधिपत्य का कार्य पूर्ण हो चुका है। नवंबर 2021 में टेंडर और जनवरी 2022 तक विकास कार्य करने वाली एजेंसी के चयन की कार्यवाही पूरी करने की प्लानिंग के साथ मार्च 2023 तक सौर-ऊर्जा संयंत्र की स्थापना का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

एनटीपीसी दो पार्ट में लगाएगा प्लांट
एनटीपीसी का सोलर प्लांट दो हिस्सों में लगेगा। पहला पार्ट बरेठी में 550 मेगावाट और दूसरा पार्ट बिजावर इलाके में 650 मेगावाट का बनाया जाएगा। वर्ष 2017 से बंद पड़े प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया जुलाई 2019 में मध्यप्रदेश विधानसभा में लाए गए अशासकीय प्रस्ताव के बाद सोलर प्लांट के लिए सहमति बनी और राज्य सरकार ने अशासकीय संकल्प पत्र केन्द्र को भेजा था। जिस पर पिछले साल सोलर पावर प्लांट लगाने की कवायद शुरु की गई। इसी क्रम में बिजावर इलाके के 6 गांव की 1400 हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव बनाया गया। लेकिन उसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

70 फीसदी स्थानीय अनस्किल्ड लोगों को रोजगार मिलता
इस संयंत्र के निर्माण के वक्त लगभग 8 हजार लोगों को 2 वर्ष तक निर्माणाधीन अवधि में रोजगार मुहैया होगा। सौर-ऊर्जा संयंत्र के अस्तित्व में आने के बाद रेगूलर रूप में 15 सौ से लेकर 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। राज्य शासन की नीति के तहत 70 फीसदी स्थानीय लोगों को अनस्किल्ड लोगों को ट्रेनिंग देकर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तो वहीं टेक्निकल दक्षता में निपुण 30 फीसदी लोगों को रोजगार दिया जाएगा।