छतरपुर. जिले के सभी रुटों में संचालित हो रहीं प्राइवेट बसों में यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। प्राइवेट वाहनों में न तो फर्स्ट एंड बॉक्स रहता है और न ही अग्निशमन यंत्र। जिले के मुख्यालय स्थित बस स्टैंड आने वाली सैकड़ों बसों में अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट ऐड बॉक्स का नहीं होना बस संचालकों की मनमानी है।
छतरपुर सहित नौगांव, खजुराहो, बड़ामलहरा से चलने वालीं अधिकतर बसों में अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स नहीं रहता है। जबकि बस में अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट ऐड बॉक्स अनिवार्य रूप से रखना है। जिस बॉक्स में दवा होनी चाहिए, उसमें चाबी और औजार भरे रहते हैं। यहां तक कि परिवहन विभाग का कोई भी अधिकारी इन बसों में क्या सुविधा है या नहीं इसकी जांच नहीं करते। आरटीओ विभाग के अनुसार इस अभियान की सभी बस संचालकों को जानकारी दे दी गई है। अग्निशमन यंत्र नहीं लगे होने पर उसे जब्त कर संचालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बस में यात्री जान जोखिम में डाल कर रहे हैं सफर
बस स्टैंड से यात्रा करने वाले यात्री जान जोखिम डाल कर यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्रियों का कहना है कि परिवहन विभाग व पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करता है। परिवहन व पुलिस विभाग के अधिकारी समय-समय पर चेकिंग करते हैं, लेकिन सिर्फ बाइक व छोटे चार पहिया वाहनों का ही। अधिकारी बसों पर ध्यान नहीं देते जिस कारण बसों में यात्री जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। वहीं अधिकतर बसों में इमरजेंसी के दौरान काम आने वाले नम्बरों की जानकारी भी नहीं दर्शाई गई।
चालकों को नहीं रहती फर्स्ट एड की जानकारी
चालक, परिचालकों को यात्री सुरक्षा का ज्ञान नहीं है। अधिकतर चालक और परिचालक अग्निशमन यंत्रों का प्रयोग करना भी नहीं जानते। बस स्टैंड में मौजूद करीब आधा दर्जन बस स्टाफ से अग्निशमन यंत्रों का प्रयोग करने के बारे में जानकारी ली गई लेकिन किसी को भी चलाने का ज्ञान नहीं हैं और न ही फर्स्ट एड के उपयोग के बारे में जानकारी थी। चालक और परिचालकों बताया चैकिंग के दौरान यह जरूरी होती है जिससे नई बसों में ये लगवाए जाते हैं।
ये हुई घटनाएं
जून २०१७ को खजुराहो थाना क्षेत्र के ग्राम पहरापुरवा निवासी अनीता साहू अपने पति के साथ जिला अस्पताल में चैकअप करवाने के लिए आ रही थी। दोपहर 12 बजे वह छतरपुर आने वाली कोहनूर कंपनी की प्राइवेट यात्री बस में सवार होकर जिला अस्पताल आ रही थी। रास्ते में ही उसे तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। इस पर ड्राइवर से लेकर बस में बैठे यात्रियों ने जननी वाहन और इस पर बस के ड्राइवर ने जिला अस्पताल की ओर दौड़ा दिया था।
इसी तरह करीब ४ वर्ष पहले जिले के बिजावर के पास के ग्राम गुलाट निवासी आकाश अहिरवार की 21 वर्षीय गर्भवती पत्नी सुनयना अपने देवर और ननद के साथ दिल्ली से अपने घर गुलाट आ रही थी। रात 12 बजे उसके पेट में दर्द हुआ और सुबह अलीपुरा निकलते ही डिलेवरी हुई डिलेवरी के दौरान यात्री महिलाओं ने भी मदद की। करीब 8 बजे बस चालक यात्री बस को लेकर सीधे नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया था।
घटना के दौरान नहीं मिलता प्राथमिक उपचार
बसों में मौजूद फर्स्ट एड बॉक्स घटना के दौरान घायलों को मरहम पट्टी आदि के लिए होता है। लेकिन जिले में हुई सभी घटनाओं में से किसी में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं होने से लोगों को इलाज नहीं मिल सका। घटना के बाद एंबुलेंस पहुंचने पर ही लोगों की मरहम पट्टी हो सकी। वहीं कई बार बस में बैठे लोगों को परेशानी होने की दशा में भी फर्स्ट एड बॉक्स का उपयोग नहीं हो पाता है।