20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छतरपुर

लेटलतीफी में अटक गई जिला अस्पताल में मिलने वाली पांच बड़ी सुविधाएं

मेटरनिटी, क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण नहीं हो सका शुरु, पीडियाट्रिक वार्ड का इस्तेमाल नहीं हो रहाब्लड सेपरेशन मशीन, इंट्रीग्रेटेड लैब की भी नहीं हो पाई शुरुआत

Google source verification

छतरपुर. रोजाना 1000 से ज्यादा ओपीडी और 250 आइपीडी वाले जिला अस्पताल परिसर में स्वास्थ सुविधाओं को बढ़ाने की योजना में लेटलतीफी भारी पड़ रही है। अस्पताल भवन के पांचवे फ्लोर पर पीडियाट्रिक यूनिट का निर्माण लगभग पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक शुरु नहीं हो सका है। वहीं, ब्लड सेपरेशन मशीन भी अब तक शुरु नहीं हो सकी है। इसके अलावा महिला अस्पताल व क्रिटिकल केयर यूनिट, इंट्रीग्रेटेड लैब के निर्माण की शुरुआत भी पिछड़ गई है।

नवंबर में गिराए थे पुराने भवन
प्रदेश शासन ने जिला अस्पताल परिसर में साढ़े 7 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले 100 बिस्तर के मैटरनिटी अस्पताल को स्वीकृति प्रदान कर बजट आवंटित किया। भवन निर्माण का कार्य पीआईयू को मिलने के बाद उन्होंने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अस्पताल प्रबंधन की अनुमति से परिसर में मौजूद पुराने भवन को नवंबर में गिराकर समतलीकरण कर दिया। तीन मंजिला मैटरनिटी भवन का निर्माण शुरू होने ही वाला था कि प्रदेश शासन ने 30 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले क्रिटिकल यूनिट की स्वीकृति प्रदान कर बजट आवंटित कर दिया। जिससे अस्पताल प्रबंधन के सामने जमीन की समस्या खड़ी हो गई, जो अब तक सुलझ नहीं पाई है।

क्रिटिकल केयर यूनिट का टेंडर नहीं
जिसमें नए मैटरनिटी भवन के लिए सिविल सर्जन कार्यालय के पास जमीन होना पाया गया। मौके पर जमीन कम पाए जाने पर बीते 10 मार्च को छतरपुर तहसीलदार के आदेश पर जैन धर्मशाला और 9 दुकानें तोड़ दी गई। इसके बाद भी प्रशासन जमीन का निर्धारण नहीं कर पा रहा है। बता दें कि 100 बिस्तर के मैटरनिटी अस्पताल का निर्माण पीआईयू को कराना है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया चार माह पहले पूरी हो चुकी है। जिला अस्पताल प्रबंधन जैसे ही जमीन उपलब्ध कराता है, विभाग ठेकेदार से अनुबंध कर वर्क ऑर्डर जारी कर निर्माण शुरू कर देगा। वहीं 100 बिस्तर के क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण मप्र बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को करना है। लेकिन स्वीकृति मिलने के बाद से जमीन का निर्धारण नहीं हो पाया है, इसलिए टेंडर प्रक्रिया अब तक अटकी है।

पीडियाट्रिक यूनिट
छह महीने में 1.45 करोड़ की लागत से यूनिट तैयार की गई है। जिसमें फाइनल फिनिशिंग का काम चल रहा है। लेकिन देरी के चलते अभी तक तैयार यूनिट हैंडओवर नहीं हो सकी है। इस यूनिट को बच्चों के इलाज की सभी सुविधा एक जगह उपलब्ध कराने के मकसद से किया गया है। इसके तहत नया एसएनसीयू वार्ड, 10 बिस्तर का एनएचडीयू (निकोटिनमाइड एडेनिन डायन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट), 30 बिस्तरी पीडियाट्रिक वार्ड, 10 बिस्तर का मदर वार्ड और नया डीईआईसी यूनिट का निर्माण किया गया है।

इनका कहना है
यूनिट का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। छोटे-छोटे कुछ काम रह गए है, जो एक सप्ताह में पूरे हो जाएंगे। इसके बाद यूनिट को हैंडओवर किया जाएगा।
अंशुल खरे, उपयंत्री, स्वास्थ विभाग
फोटो- सीएचपी२२०५२३-71- जिला अस्पताल छतरपुर