
Climbing the stairs to the ward
छतरपुर। जिला मुख्यालय पर करीब 30 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हुए पांच मंजिला जिला अस्पताल की सुविधाएं गड़बड़ा गई हैं। अस्पताल की कई मशीनें पहले ही बंद पड़ी हैं अब जिला अस्पताल की पांचों मंजिलों तक आवागमन मुहैया कराने वाली लिफ्ट सेवा भी बंद हो गई है। पिछले लगभग दो महीने से जिला अस्पताल में लगाई गईं पांच लिफ्टों में से कुछ लिफ्टें बंद थीं, लेकिन विगत रोज आखिरी बची हुई लिफ्ट भी बंद हो गई। ऐसे में अब सभी मंजिलों तक पहुंचने के लिए सीढिय़ों का ही सहारा बचा है।
डॉक्टर से लेकर मरीज तक सबका दम फूल रहा
जिला अस्पताल की पांचों लिफ्टों के खराब हो जाने के कारण अस्पताल आने वाले मरीज, उनके परिजन और डॉक्टर सहित पैरा मेडिकल स्टाफ को भी सीढिय़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मुसीबत गर्भवती महिलाओं को है जिन्हें ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए सीढिय़ां चढऩी पड़ रही हैं, बुजुर्ग मरीज, हड्डी के रोगी, हृदय और बीपी के शिकार मरीजों की हालत सीढिय़ां चढ़कर खराब हो जाती है। कुछ गंभीर मरीजों को उनके ही परिजन स्ट्रेचर पर डालकर ऊपर ले जाते हैं तो वहीं कुछ मरीजों को सहारा देकर वार्ड तक ले जाना पड़ रहा है।
इसलिए खराब हो गईं लिफ्ट
जिला अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक मरीजों के परिजनों के द्वारा ही कोई शरारत की गई है। पांचवीं मंजिल पर फिलहाल कोई वार्ड नहीं है, लेकिन लिफ्ट वहां तक जाती है। एक मैकेनिक ने लिफ्ट देखकर बताया कि शायद किसी ने पांचवीं मंजिल से लिफ्ट के भीतर कोई लिक्विड डाला है जिससे इसके सेंसर ने काम करना बंद कर दिया है। एक लिफ्ट पर या तो अधिक वजन पड़ा है या फिर कुछ लोगों ने कूदकर उसे दबाया है जिससे वह अपने आधार से चार इंच नीचे घुसकर फंस गई है।
लोकल में मैकेनिक नहीं, भोपाल से आएगा इंजीनियर
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरएस त्रिपाठी बताते हैं कि लिफ्ट के खराब होने से कई समस्याएं आ रही हैं। हमने स्थानीय स्तर पर लिफ्ट को ठीक कराने के लिए प्रयास किए। कुछ मैकेनिक देखने भी आए लेकिन वे ठीक नहीं कर सके। जिस कंपनी ने लिफ्ट लगाई थी वह एनुअल मेंटीनेंस के एग्रीमेंट पर ही लिफ्ट सुधारती है अब भोपाल के ही एक दूसरे लिफ्ट इंजीनियर से बात हुई है लेकिन वाहनों के न चलने से वह आ नहीं पा रहा है। हमने उससे निजी वाहन के जरिये आकर लिफ्ट ठीक करने का आग्रह किया है।
भोपाल से आएगा इंजीनियर
लिफ्ट के खराब होने से समस्या निर्मित हुई है। आज ही हमारी इंजीनियर से बात हुई है इसके पूर्व भी हम भोपाल पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है भोपाल से जल्द ही इंजीनियर आकर लिफ्ट ठीक कर देगा।
डॉ. आरएस त्रिपाठी, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल छतरपुर
अच्छी खबर: जिला अस्पताल को मिला अल्ट्रा सोनोलॉजिस्ट
अब जिला अस्पताल में एक दक्ष अल्ट्रा सोनोलॉजिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति की गई है। डॉ. सुरेन्द्र शर्मा के रूप में शासन ने जिला अस्पताल में अल्ट्रा सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति की है। वे प्रतिदिन जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की सोनोग्राफी भी करने लगे हैं। हालंाकि फिलहाल जिला अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 अल्ट्रा साउण्ड ही हो रहे हैं।
निजी सेंटरों पर लग रहीं कतारें
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 अल्ट्रा साउण्ड ही हो रहे हैं जबकि शहर में निजी तौर पर संचालित सोनोग्राफी सेंटर में मरीजों की कतारें लग रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक किशोर सागर तालाब के समीप स्थित केयर डायग्रोस्टिक सेंटर एवं छत्रसाल चौक पर डॉ. रामवरण बौद्ध द्वारा संचालित सृष्टि सोनोग्राफी सेंटर पर प्रतिदिन 70-70 मरीजों की औसतन जांचें हो रही हैं। ज्यादातर मरीजों को जिला अस्पताल की मशीन चालू होने की जानकारी नहीं है जिसके कारण उन्हें इन सेंटरों पर 600 से 800 रूपए देने पड़ते हैं।
Updated on:
27 Aug 2020 09:24 pm
Published on:
28 Aug 2020 07:00 am
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