
मजदूर मां-बाप ने पढ़ाने में नहीं छोड़ी कोई कसर - नौकरी नहीं मिली तो बेटी ने गटक लिया जहर
छतरपुर. बेरोजगारी एक अभिशाप की तरह है। माता-पिता ने मजदूरी करके अपनी बेटी को पढ़ाया। हाईस्कूल- हायरसेकंडरी के बाद कॉलेज तक पढ़ाकर बेटी को स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई । लेकिन पढ़ाई के बाद नौकरी न मिलने से युवती हताश हो गई और डिप्रेशन में उसने आत्महत्या करने की कोशिश तक कर डाली। जिला अस्पताल में भर्ती युवती की जान बच गई है, माता पिता उसके ठीक होने की दुआ कर रहे हैं, वहीं अब युवती अपने कदम को लेकर पछता भी रही है ।
जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर पड़रिया गांव के मजदूर भवानीदीन अहिरवार ने अपनी 26 वर्षीय बेटी सुनीत अहिरवार को गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक पढ़ाई कराई। मजदूरी करने वाले माता-पिता बेटी की पढ़ाई न रुके इसलिए लाखों जतन करते रहे। कभी कभी भूखे रहकर भी काम करते थे। माता-पिता की मेहनत और त्याग से बेटी ने छतरपुर के शासकीय गर्ल्स कॉलेज से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई भी कर ली। परिवार को लगा कि बेटी को नौकरी मिल जाएगी तो परिवार के दिन सुधर जाएंगे। लेकिन कोरोना काल में बढ़े रोजगार संकट के चलते बेटी की नौकरी नहीं लग पा रही थी ।
ऊपर से उम्र बढ़ते जाने से परिवार को उसकी शादी की चिंता भी होने लगी। इन्ही सब हालात में युवती खुद को अपने माता-पिता पर बोझ मानने लगी है। तनाव में आकर उसने उसने जहर खाकर अपनी जान देने का प्रयास किया। युवती का कहना है कि चाहकर भी अपने परिवार का आर्थिक सहयोग नहीं कर पा रही। इसलिए ये कदम उठाया। युवती अब अपने उठाए कदम को लेकर पछता रही है।
Published on:
14 Feb 2022 02:20 pm
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