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स्वाभिमानी के हृदय में भगवान निवास करते हैं- पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

तीन दिवसीय श्री हनुमंत कथा में उमड़ा कथा प्रेमियों का सैलाब

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भीमकुंड के दर्शन करते महाराज

भीमकुंड के दर्शन करते महाराज

छतरपुर. बड़ामलहरा में चल रही तीन दिवसीय श्रीहनुमंत कथा के तीसरे व अंतिम दिवस में लाखों लोगों का सैलाब कथा सुनने उमड़ पड़ा। लोगों की भावनाओं को समझते हुए कथा व्यास बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सबका अभिवादन स्वीकार करते हुए कथा मंच में विलंब से पहुंचे। महाराज ने कथा का प्रारंभ करते हुए कहा कि अभिमानी को कभी ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं होती क्योंकि स्वाभिमानी के हृदय में भगवान का निवास होता है।

बड़ामलहरा की कृषि उपज मंडी में चल रही श्री हनुमंत कथा में कथा व्यास पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिन्हें ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है, वह कुरूप होने के बाद भी सुंदर हो जाता है। महाराज ने हनुमान जी और कागभुसुंडि के शारीरिक बनावट की चर्चा करते हुए कहा कि हनुमान जी बंदर के रूप में अवतरित हुए, चूंकि उन्हें श्रीराम जी की कृपा मिली। इसलिए वे बंदर के रूप में भी सुंदर हो गए और कौए का वेश धारण करने वाले कागभुसुंडि जी को ईश्वर कृपा से ही सब जन्मों का ज्ञान हुआ और उन्हें यह भी कृपा मिली, कि जन्म और मृत्यु के असहनीय कष्टों से मुक्ति मिली। लाखों कथा प्रेमियों को भगवत भजन का संदेश देते हुए कहा कि हनुमान जी की कृपा पाने के लिए श्रीराम चर्चा करना आवश्यक है।

सफाईकर्मियों ने की आरती, ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया सम्मान

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने सम्मान किया। महाराज को रक्षा सूत्र बांधकर ईश्वरीय सौगात भेंट की। बहनों के साथ महाराज घुवारा पहुंचे, जहां डॉ धीरेंद्र प्रताप सिंह व अमित सोनी ने शॉल श्रीफल से सम्मानित किया। कथा के अवसर पर नगर परिषद में कार्यरत सफाईकर्मियों को आरती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

भीमकुंड के किए दर्शन, एक दर्जन परिवारों की हुई घर वापसी

महाराज ने दोपहर में बुंदेलखंड के प्रसिद्ध क्षेत्र भीमकुंड के दर्शन किए और वहां चल रहे सौंदर्यीकरण के कार्यों की जानकारी ली। कथा के दौरान महाराज ने धर्मप्रेमियों को भी बताया कि भीमकुंड में इस समय बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। कुंड की सुरक्षा के भी जो कार्य किए जा रहे हैं वे सराहनीय हैं। कथा के दौरान बमीठा क्षेत्र के ग्राम पाटन निवासी परिवारों द्वारा इसाई धर्म की ओर जाने की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए वहां से आए 27 परिवारों को मंच से घर वापसी कराई गई। सभी ने सनातन धर्म के साथ आगे बढऩे का संकल्प लिया।