19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकारी भवनों पर नहीं है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, प्रशासन खुद ही नहीं कर रहा नियमों का पालन

शहर के सरकारी भवनों से ही बारिश का पानी स्टोर करके बचाया जा सकता है लाखों लीटर पानी

4 min read
Google source verification
Government buildings Water Harvesting System,

Government buildings Water Harvesting System,

छतरपुर। पिछले कई सालों से बुंदेलखंड सहित समूचा छतरपुर जिला अवर्षा, सूखा और जल संकट की स्थिति से जूझ रहा है। प्रशासन समस्या से निपटने के नाम पर नलकूप खनन और बोरिश कराकर किसी तरह पानी के स्त्रोत खोजने तक ही सीमित होकर काम कर रहा है। लेकिन भू-जल स्तर बढ़ाने के नाम पर अब तक जिले में कोई भी बड़े काम नहीं हुए है। यह पूरा सीजन भी जलसंकट का रोना रोते हुए निकाल दिया गया है। यहां तक कि शासन-प्रशासन ने स्पष्ट गाइड लाइन तक जारी कर दी है कि हर नए सरकारी भवन में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना अनिवार्य है। यहां तक कि भवन निर्माण स्वीकृति भी इसी शर्त के पालन के आधार पर दिए जाने का प्रावधान है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन के नुमाइंदे खुद ही इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
जिले का कलेक्ट्रेट भवन, एसपी ऑफिस, विश्वविद्यालय भवन, लोक निर्माण विभाग कार्यालय, महाराजा कॉलेज भवन, जिला पंचायत कार्यालय, जिला अस्पताल, आकाशवाणी भवन, वन विभाग कार्यालय भवन, जनपद पंचायत कार्यालय भवन, जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र कार्यालय भवन से लेकर सरकारी अफसरों के बंगलों तक में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है। यहां तक कि पिछले दो सालों में जो नए सरकारी कार्यालय भवन नई तहसील, सिटी कोतवाली, यातायात कार्यालय, डीआईजी कार्यालय, एसडीएम और तहसीलदार बंगला, मॉडल बेसिक स्कूल तक में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगवाए गए हंै। करीब पौने दो एकड़ के क्षेत्र में महाराजा कॉलेज भवन का निर्माण है, लेकिन इसमें भी कोई सिस्टम नहीं बनाया गया है। जबकि जिले की जो औषत बारिश है उस आंकड़े के हिसाब से एक हजार स्क्वायर फीट की छत वाले भवन से एक सीजन में जमीन के अंदर 1 लाख लीटर पानी पहुंचाया जा सकता है। इस तरह से अगर हर सरकारी भवन पर यह सिस्टम बनाया गया होता तो लाखों लीटर पानी जमीन के अंदर पहुंचता और भू-जलस्तर भी मेंटेन बना रहता।
यह है वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए नियम :
नियमानुसार यदि 140 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनने वाले किसी भी भवन का निमार्ण किया जाता है, तो उसमें रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना अनिवार्य होता है, लेकिन प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण यहां न तो निजी भवनों में और न ही सरकारी भवन में यह सिस्टम लगे हैं। अकेले शहर में ही करीब ७८ कॉलोनियां हैं। अगर इन सब मं ही यह सिस्टम बनवा दिए जाते तो शहर में मौजूदा जल संकट के हालात नहीं बनते। हाल ही में जिला अस्पताल, यातायात थाना भवन निर्माण हुआ, लेकिन यह सिस्टम नहीं बनाया गया है। इस स्थिति के चलते बारिश का पानी छतों पर लगे निकासी के पाइपों से होकर बह जाता है। इस बारिश के पानी को सहेजकर जमीन का भूजलस्तर बढ़ाने के लिए इस नियम को लागू किया गया ताकि बारिश कम होने पर शहर के लोगों को पानी की समस्या से न जूझना पड़े। लेकिन शहर का एक भी सरकारी विभाग और आम नागरिक ध्यान नहीं दे रहा है। नगरपालिका जब भी भवन निर्माण की अनुमति देती है, तो नियमानुसार हार्वेस्टिंग सिस्टम भवन में लगवाना अनिवार्य होता है। भूमि विकास अधिनियम 1984 में संशोधन कर अब 140 वर्ग मीटर से अधिक के भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। पहले जमीन में 100 फीट पर पानी था पर अब 300 फीट तक पानी पहुंच गया है। ऐसे में अगर अभी भी लोग नहीं जागे तो आने वाले दिनों में पेयजल का भयावह संकट पैदा होगा।
पानी से भी ज्यादा सस्ता है वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना :
पर्यावरण विद् एवं शंकराचार्य सम्मान से विभूषित डॉ. बालेंदु शुक्ल खुद के प्रयास से ही डेढ़ हजार से ज्यादा घरों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह सिस्टम मौजूदा जल संकट के हालातों में पानी से भी सस्ते हैं। लोग एक टैंकर पानी 300 रुपए तक में खरीदी रहे हैं। एक सीजन में जितने रुपए का लोगों ने पानी खरीदा होगा, उससे भी कम बजट में लोग यह सिस्टम लगवा सकते हैं। पूर्व में जिन घरों में भी यह सिस्टम लगे थे उनके यहां इस बार की गर्मी में जेट और बोरिंग का पानी नहीं सूखा है। डॉ. बालेंदु के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए सबसे पहले जमीन में 3 से 5 फीट चौड़ा और 6 से 10 फीट गहरा गड्ढा करके इसमें सबसे नीचे मोटा पत्थर, कंकड़ बीच में मध्यम आकर के पत्थर, रोड़ी और सबसे ऊपर बारीक रेत या बजरी डाली जाती है। यह सिस्टम फिल्टर का काम करता है। छत से पानी एक पाइप के जरिए इसी गड्ढेे में उतारा जाता है। गड्ढे से पानी धीरे-धीरे छनकर जमीन के भीतर चला जाता है। इसी तरह फिल्टर के जरिए पानी को टैंक में एकत्र किया जाता है।

हम हर घर में बनवा रहे हैं सिस्टम :
हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जा रहा है। यह काम पूरा होने के बाद ही नगरपालिका द्वारा परमिशन दी जाती है। हम इस बार लोगों के घरों का बैरीफिकेशन कराएंगे। अगर किसी ने अनुमति लेकर भी अगर सिस्टम नहीं लगवाए हैं तो उनसे सिस्टम लगवाने के लिए कहा जाएगा।
- हरिहर गंधर्व, सीएमओ नगरपालिका

नगरपालिका के हर भवन में लगवाएंगे सिस्टम :
शहर में जलसंकट इस बार गंभीर स्थिति में पहुंचा है। संकट को देखते हुए नगरपालिका ने पहले ही तय कर लिया है कि वह अपने सभी भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएगी। नगरपालिका के भवनों का निर्माण पूरा होते ही यह सिस्टम लगवाए जाएंगे। शहर के लोगों को भी इसके लिए जागरुक किया जाएगा कि वह पानी के संकट से बचने के लिए और अपने घरों के बोर-हैंडपंप को रीचार्ज रखने के लिए यह सिस्टम जरूर लगवाएं।
- अर्चना गुड्डू सिंह, अध्यक्ष, नगरपालिका छतरपुर