
विकासखंड प्रबंधक कार्यालय
महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाने के लिए शुरू की गई आजीविका मिशन योजना बड़ामलहरा में भ्रष्टाचार का बड़ा और संगठित खेल सामने आया है। नारी शक्ति संकुल स्तरीय मंडल बड़ामलहरा के 1 जनवरी 2024 से 24 जून 2025 तक के बैंक खाते के स्टेटमेंट की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों विकासखंड प्रबंधक प्रेमचंद्र यादव और जिला प्रबंधक श्याम बिहारी गौतम ने सरकारी योजना को अपनी निजी एटीएम मशीन बना लिया। नियमों, प्रक्रिया और उद्देश्य को ताक पर रखकर सीआरपी मानदेय, गणवेश वितरण, स्वसहायता समूहों और उत्पादन इकाइयों के नाम पर लाखों रुपए का घालमेल किया गया।
सबसे पहले सीआरपी यानी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के मानदेय में गंभीर अनियमितता सामने आई है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीएलपी को अधिकतम चार हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा सकता है, लेकिन इसके उलट एक मानदेयधारी कर्मचारी अनिता यादव के खाते में पूरे साल में आठ बार में कुल 3 लाख 14 हजार 445 रुपए जमा कर निकाले गए। यह भुगतान आजीविका मिशन बड़ामलहरा के प्रबंधक प्रेमचंद्र यादव के कार्यकाल में किया गया। इतनी बड़ी राशि का भुगतान न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह दर्शाता है कि मानदेय की आड़ में सरकारी राशि को सीधे निजी खाते में ट्रांसफर कर ठिकाने लगाया गया।
गणवेश निर्माण और वितरण के नाम पर भी खुला फर्जीवाड़ा किया गया। वर्तमान में गणवेश वितरण का ठेका आरआर इंटरप्राइजेज जतारा के पास है, जिसने वास्तविक रूप से गणवेश का निर्माण और वितरण किया। इससे पहले यह ठेका मोदी इंटरप्राइजेज दमोह के पास था। इसके बावजूद आजीविका मिशन के अधिकारियों ने संस्कार इंटरप्राइजेज के नाम 5 लाख 56 हजार 573 रुपए का भुगतान कर दिया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संस्कार इंटरप्राइजेज आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों की खुद की फर्म है। यानी सरकारी काम किसी और ने किया और भुगतान अधिकारियों की निजी फर्म को कर दिया गया, जिससे साफ तौर पर सुनियोजित घोटाले की पुष्टि होती है।
घोटाले की परतें यहीं नहीं रुकतीं। जसगुंवा में 70 लाख रुपए की लागत से कैटल फीड निर्माण इकाई स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और आय बढ़ाना था। लेकिन इस इकाई में आज तक न तो एक दाना उत्पादन हुआ और न ही सरकारी ऋण की वसूली की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारी ऋण वापसी में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि सरकारी लोन के नाम पर हुए इस घोटाले में उनकी खुद की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
नियमों के अनुसार स्वसहायता समूहों की जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज से संचालन और रखरखाव का खर्च निकाला जाना था, लेकिन अधिकारियों ने स्वसहायता समूहों के नाम पर सरकारी राशि निकालकर उसका दुरुपयोग किया। इसका नतीजा यह है कि न तो ऋण राशि की वापसी हो रही है और न ही ब्याज से कोई आय मिल रही है। पूरी व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया गया, ताकि भ्रष्टाचार को छुपाया जा सके।
भुगतान प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। संदेह तब और गहराता है जब यह देखा गया कि एक ही तारीख में कई-कई चेक काटकर राशि निकाली गई। 10 मार्च 2025 को एक ही दिन चार चेक काटकर 3 लाख 53 हजार रुपए निकाले गए, जबकि 19 जून 2025 को एक साथ 10 चेक काटकर 15 लाख 8 हजार 772 रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह एक ही दिन में कई भुगतान करना सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जाती और यह साफ तौर पर राशि ठिकाने लगाने की मंशा को दर्शाता है।
सीएलपी मानदेय, गणवेश वितरण, कैटल फीड इकाई, स्वसहायता समूहों और अन्य मदों को मिलाकर अब तक कुल 27 लाख 32 हजार 790 रुपए के घालमेल की पुष्टि दस्तावेजों से होती है। यह पूरा मामला महिलाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच, ऑडिट और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आजीविका मिशन जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बनने के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी। इस मामले में जिला प्रबंधक श्याम बिहारी गौतम से संपर्क करने पर उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया।
जिम्मेदारों काएक साथ राशि डालने जैसा कोई मामला नहीं हैं। गणवेश वितरण समय से नहीं होने पर एग्रीमेंट खत्म कर दूसरे को काम दिया गया।
प्रेमचंद्र यादव, विकासखंड प्रबंधक, अजीविका मिशन ग्रामीण
मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच करेंगे। जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर नियमपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।
नमः शिवाय अरजरिया, जिला पंचायत सीईओ
Published on:
09 Jan 2026 11:02 am
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