
शैक्षणिक संस्थानों के बीच संचालित हो रही ग्रेनाइट खदान,
छतरपुर। लवकुशनगर में जिस ग्रेनाइट खनन कंपनी की बाउंड्रीवॉल गिरने से कॉलेज के दो छात्रों की मौत हो गई। उस डीजी मिनरल्स कंपनी को नियमों को दरकिनार कर खनन की लीज दी गई है। स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट असिस्मेंट अथॉरिटी (सिया) के नियमों के खिलाफ आबादी, शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, श्मशान घाट और शासकीय छात्रावास से 500 मीटर के अंदर ही लीज दी गई है। जिस शासकीय खसरा नंबर में 40 साल पुराना डिग्री कॉलेज, गल्र्स व बालक हायरसेंकडरी स्कूल बने हैं, उसी खसरा नबंर में उतखनन की लीज दे दी गई। इसके अलावा लीज नियमों को दरकिनार करने के साथ ही कंपनी स्वीकृत खदान एरिया के बाहर भी उत्खनन कर रही है। पहाड़ में लगे सैकड़ो की संख्या में हरे भरे वृक्षो को नष्ट कर दिया, लेकिन नियमानुसा एक भी पेड़ नया नही लगाया गया। अब पहाड़ी वीरान नजर आने लगी है।
भोपाल एनजीटी को कई बार की गई शिकायत
भोपाल एनजीटी में शिकायत करने वाले प्रवीण रिछारिया ने बताया कि जिस पहाड़ पर लीज स्वीकृत की है उसके आसपास घनी बस्ती है साथ ही शासकीय महाविद्यालय, उत्कृष्ट शाला,शमशान घाट और शासकीय छात्रावास स्थित है, फिर भी डीजी मिनरल्स को लीज दे दी गई। शहर के बीचो-बीच स्थित पहाड़ की लीज स्वीकृत कर दी गई। कंपनी को खसरा क्रमांक 593 कुल रकवा 42 हेक्टेयर में से 11.85 हेक्टेयर पत्थर खनन के लिए लीज आवंटित की गई थी। लेकिन इसी पहाड़ से सटे अन्य खसरा नंबर 2206 व 2207 में अवैध तरीके से पत्थर खनन किया जा रहा है। इसकी शिकायत कई बार की गई लेकि न कार्रवाई नहीं हुई है।
शासकीय कॉलेज के प्राचार्य ने कई बार जताई आपत्ति
डीजी मिनरल्स को जिस पहाड़ पर लीज मिली है और पत्थर का खनन किया जा रहा है उसी खसरा नंबर में शासकीय महाविद्यालय स्थित है, पहाड़ पर रोजाना बड़ी -बड़ी मशीने चलने से शोरगुल व पहाड़ की डस्ट से परेशान होकर प्राचार्य अंगद सिंह दोहरे ने शासन को खदान संचालन से आपत्ति जताते हुए इसे बंद करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन इन पत्रों पर कोई गौर नही किया गया
आखिर कैसे मिली सिया से अनुमति
डीजी मिनिरल्स को लवकुशनगर के खसरा क्रमांक 593 में लगभग 11.85 हैक्टेयर की ग्रेनाइट खदान तीन हिस्सों में एक ही तारीख में स्वीकृत हुई। लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है कि कंपनी को सिया की अनुमति कैसे हासिल हो गई। दरअसल सिया की अनुमति के लिए नियम है कि खदान से आधा किमी की दूरी तक रिहायशी क्षेत्र, स्कूल, कॉलेज, श्मशान घाट, मंदिर वगैरह नहीं होना चाहिए। लेकिन इस खदान से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर चारों ओर चार स्कूल कॉलेज, मंदिर, श्मशान घाट व तालाब आदि स्थित हैं। लवकुशनगर जिला बनाओ मंच के बिंची लाल आक्रोश में कहते हैं कि जिस तहसीलदार ने यह लिखा है कि 500 मीटर तक कोई रिहायशी क्षेत्र, स्कूल, कॉलेज, मकान नहीं है, खुद उन तहसीलदार, एसडीएम का बंगला भी खदान से 500 मीटर के दायरे में आ जाते हैं। उक्त पर्यावरणीय अनुमति की सिया से पुन: जांच कराने की मांग करते हुए नगर के लोगों ने पत्र लिखा है।
तहसीलदार के आदेश का होता पालन तो नहीं जाती छात्रों की जान
लवकुशनगर में ग्रेनाइट कंपनी डीजी मिनिरल्स की बाउंड्री वॉल गिरने से पास स्थित डिग्री कॉलेज के दो छात्रों की मौत हो गई थी। 28 मार्च 2018 को तहसीलदार लवकुशनगर ने डीजी मिनिरल्स को इस बाउंड्री वॉल बनाने का दोषी पाते हुए 15 दिन के भीतर दीवार गिराने के साथ 50 हजार रुपए का जुर्माना भी किया था। अगर सरकारी जमीन पर बनी बगैर पिलर की दीवार तभी गिरा दी गई होती तो दो छात्रों की जान जाने से बच सकती थी। लेकिन तहसीलदार के आदेश की फाइल छतरपुर के रिकॉर्ड रूम में दबी रही।
इनका कहना है
डीजी मिनरल्स ग्रेनाइट कंपनी की शिकायते मिल रही है, जांच टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन का प्रकरण तैयार किया जाएगा।
राकेश परमार एसडीएम लवकुशनगर
हर साल हमारे पास 1000 से 1200 फाइल्स अनुमोदन के लिए आती हैं। हमारे पास फील्ड स्टाफ नहीं है। ऑनलाइन आवेदन व स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट पर निर्भर है। मैं इस मामले में रिपोर्ट तलब करता हूं।
अरुण कुमार भटट, चेयरमैन सिया
Published on:
26 Apr 2022 07:00 am
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