प्लाट आवंटन में नियमों को दरकिनार करने का मामला, इधर कलक्टर ने बनाई है चार सदस्यीय जांच टीम
छतरपुर. जबलपुर हाईकोर्ट ने विश्वनाथ कॉलोनी छतरपुर निवासी राजेंद्र कुमार साहू पुत्र डीपी साहू की रिट याचिका पर आदेश पारित करते हुए उद्योग विभाग के अधिकारियों को याचिकाकर्ता के चंद्रपुरा औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट आवंटन के लिए लंबित आवेदन पर विचार कर 30 दिन के भीतर अंतिम निर्णय लेने को कहा है। एडवोकेट जेएल सोनी द्वारा पेश रिट याचिका 26018/2023 में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव, एमएसएमई के आयुक्त संचालक कलक्टर छतरपुर और जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, छतरपुर के महाप्रबंधक को प्रतिवादी बनाया गया था।
आवेदन पर नहीं लिया निर्णय
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता ने एमएसएमई के आयुक्त और जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, छतरपुर के महाप्रबंधक के समक्ष एक अभ्यावेदन दिया है, जिसमें बताया गया है कि याचिकाकर्ता किस प्रकार भूखंड पाने का हकदार है, लेकिन आवेदन अभी भी लंबित हैं और अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी ने पारित आदेश में इस मामले में उद्योग विभाग को 30 दिन के अंदर अंतिम निर्णय लेने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। यदि याचिकाकर्ता भूखंड आवंटन के लिए हकदार पाया जाता है, तो उसे सूचित किया जाए और हकदार नहीं पाया जाता है, तो उसे कारण बताए जाएं।
कई शिकायतों के बाद कलक्टर ने जब्त कराया था रिकॉर्ड
इधर, चंद्रपुरा औद्योगिक क्षेत्र के प्लाटों की हेराफेरी के मामले में कलक्टर संदीप जीआर के निर्देश पर ट्रेजरी ऑफिसर समेत चार सदस्यीय टीम ने जिला उद्योग एवं व्यापार के नौगांव रोड स्थित कार्यालय में रिकॉर्ड जब्त किया है। अपर कलक्टर के कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण उन्होंने राजस्व के नुकसान और प्लाटों के आवंटन और हस्तांतरण की जांच के लिए ट्रेजरी ऑफिसर को आदेश दिए थे। ट्रेजरी ऑफिसर विनोद श्रीवास्तव समेत चार सदस्यीय टीम ने जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र में पहुंचकर औद्योगिक क्षेत्र में प्लाटों की हेराफेरी पर महाप्रबंधक आशुतोष गुप्ता से सवाल-जवाब किए और रिकॉर्ड जब्त किया है। अब शिकायतो के आधार पर बिंदुवार जांच की जाएगी।
प्लाट लिए लेकिन उद्योग नहीं किए स्थापित
उद्योग विभाग की अनियमिताओं की लगातार शिकायतें कलक्टर के पास जा रही थी। कलक्टर द्वारा जांच के लिए टीम बनाई गई और कलक्टर के निर्देश पर ही जांच की जा रही है। चंद्रपुरा स्थित औद्योगिक क्षेत्र में जमीन आवंटन एवं हस्तांतरण के संबंध में मिली शिकायतों तथा आवंटन के दौरान गड़बड़ी किए जाने सहित विभिन्न बिंदुओं की शिकायतें मिल रही थी। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए रिकॉर्ड तलब किया गया है। उन्होंने बताया कि अब यह जांच में देखा जाएगा कि कितने प्लाट आवंटित हुए हैं और कितने हस्तांतरित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि जांच में यह बिंदु भी शामिल किया जा रहा है कि आवंटित किए गए प्लाटों में कितनी इकाइयां स्थापित हुई है और कितने ऐसे प्लॉट है जिनमेँ इकाइयां नहीं लगाई गई, लंबे समय से सिर्फ प्लांट ही आवंटित कराए गए हैं।
रिपोर्ट में हेराफेरी की हुई है शिकायत
झूठी रिपोर्ट तैयार करने के भी गंभीर आरोप सामने आए है। आरोप हैं कि सहायक महाप्रबंधक की फर्जी रिपोर्ट पर महाप्रबंधक प्लाटों का हस्तांतरण कर देते हैं। जबकि मौके पर उद्योग का संचालन नहीं होता है। शिकायतकर्ता दिनेश पाठक, पंकज पहारिया और सुशील दुबे ने आरोप लगाया कि प्लाटों के हस्तांतरण के लिए कमिश्नर उद्योग से अनुमति नहीं ली गई है और न ही विभागीय ऑफर प्रक्रिया का पालन किया गया है। सहायक महाप्रबंधक ने बड़े पैमाने पर प्लाटों में उद्योग संचालित होने फर्जी रिपोर्ट तैयार कर महाप्रबंधक से हस्तांतरण कराए जाने शासन को करोड़ों के राजस्व की क्षति पहुंचाई है। इस हेराफेरी के खेल से लंबे समय बाद भी उद्योग स्थापित नहीं हो पाए हैं।