
सरवई और गोयरा थाना क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक स्थानों में किया जा रहा रेत का अवैध उत्खनन और डंप
छतरपुर। जिले में रेत के काले कारोबारियों द्वारा शासन के नियमों और निर्देशों को धता बताते हुए बेखोफ तरीके से रेत का उत्खनन, परिवहन और डंप किया जा रहा है। जिसकी जानकारी थाना पुलिस से लेकर आईजी तक होती है और राजस्व में पटवारी आरआई से लेकर कलेक्ट्रेट तक जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई करने की जहमत नहीं ीि जा रही है। जिससे आसपास और रास्ते में रहते वालें लोगों को खासी परेसानी होती है और राजस्व को भी भारी भरकम चूना लगता है। हालाकि इस कारोबार को बिना कार्रवाई के चलावाने के एकज में कारोबारियों द्वारा अधिकारियों को मुंह मांगी रकम दी जा रही है। जिसको लेकर अधिकारी भी जानकारी होने के बाद मौके पर नहीं पहुंचते और वापस लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों को कहना है कि कई बार कलेक्टर, कमिश्नर, आईजी, एसपी सहित अधिकारी आते हैं और ग्रामीणों द्वारा अवेध रूप से रेत उत्खनन, डंप और परिवहन की जानकारी देते हैं लेकिन इसके बाद भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते हैं और कारोबारियों द्वारा मनमाने तरीके से कारोबार किया जा रहा है।
एनजीटी का नियम है कि बारिश में नदी-नालों से रेत उत्खनन नहीं किया जाए, लेकिन यह आदेश अधिकारियों के निर्देश तक ही सीमित है। जिले गोयरा, गौरिहार, बंशिया और सरवई थाना क्षेत्र की नदियों में रेत उत्खनन मशीनों बदस्तूर जारी से। इसको रोकने को लेकर ग्रामीणों की ओर से आ रही शिकायतों को अधिकारियों किनारा किया जा रहा है। क्षेत्र से गुजरी केन, केल नदी के कई घाटों से रेत निकाली जा रही है। जिसमें सबसे अधिक रामपुर, कंदैला, गोयरा, मिश्रणपुरवा, कंदैला, रामपुर घाट, फत्तेपुर, कुरधना, बरूआ, परेई, मवई सहित दो दर्जन से अधिक स्थानों पर कारोबारियों द्वारा नदी से मशीनों द्वारा रेत का उत्खनन किया जा रहा है और रात में डंप कर दिन में डंपरों द्वारा परिवहन कराया जा रहा है।
डंप रेत की आड़ में हो रही चोरी
डंप रेत की आड़ में नदी से रेत की चोरी हो रही है। खदानें बंद होने से रेत माफिया अब जहां रेत मिल जाए, वहीं मशीन से उत्खनन कर रहे हैं। गांवों के रास्ते से गुजर रहे रेत भरे डंपरों से टपकता पानी बता रहा है कि नदी से रेत निकाली जा रही है। अधिकारी दबी जुबान से इस बात को स्वीकार करते है कि प्रतिबंध के बावजूद नदी से रेत निकाली जा रही है। लेकिन कार्रवाई करने की हिमाकत नहीं जुटा पा रहे है।
सड़क पर उतर रहे ग्रामीण
अवैध उत्खनन व इसके ओवरवेट परिवहन से ग्रामीण सड़कें उखड़ रही हैं। उखड़ी सड़कों की निरंतर शिकायतों के बाद भी प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण अब सड़क पर उतरकर आक्रोश जता रहे हैं। लेकिन अधिकारियों द्वारा कारोपियों ओर वाहनों पर कार्रवाई नहीं कर ग्रामीणों को शांत कराकर मामले को रफदफा कर देते हैं। रेत कारोबारियों ओर वाहनों पर कोइ्र कार्रवाई नहीं होने से कारोबारियों द्वारा गांव के लोगों को अधिकारियों के संरक्षण होने की बात कह कर लोगों को डराते हैं। रामपुर क्षेत्र के भवानीदीन, शकरं, बरुआ गांव के दयाराम, नन्नीबाई आदि लोगों को कहना है कि कुछ दिनों पहले यहां पर जिले के बडे अधिकारी आए थे उनसे कहा था लेकिन वह रोड को देखकर वापस लौट गए थे। जिसके बाद उन्होंने जिले के सभी विधायकों और अधिकारियों को उसकी शिकासत की। मवई गांव के लोगों ने बताया कि वह कई बाद गांव से गुजरे रास्ते में जाम लगा चुके हैं। इसकी जानकारी पर पहरा चौकी सहित थाना पुलिस आती और गांव के लोगों पर कार्रवाई की बात कहती है।
जब्त वाहन नहीं हो रहे राजसात
जिले में बीते वर्ष से अवैध रूप से रेत का परिवहन करते हुए कार्रवाईयां की गई हैं। लेकिन बीते वर्ष से प्रशासन द्वारा एक भी वाहन को राजसात करने की कार्रवाई नहीं की। खनिज अधिकारी अमित मिश्रा ने बताया काफी समय से रेत कारोबार में पकड़े गए वाहनों पर राजसात करने की कार्रवाई नहीं हुई।
शासन को राजस्व की क्षति
अवैध रूप से रेत खनन कर उसे डंप किया गया है। इसके लिए ठेकेदारों ने रायल्टी भी अदा नहीं की है। इसकी वजह से जिला प्रशासन को लाखों रुपए के राजस्व की क्षति पहुंच रही है। इस ओर अधिकारियों द्वारा कोइ्र ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ये है नियम
रेत खनन और भंडारण के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एनजीटी) से अनुमति लेनी आवश्यक है। इसके अलावा स्टेट एनवायरमेंट इलेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी, डिस्ट्रिक एनवायर इलेक्ट अथॉरिटी के साथ डिस्ट्रिक एनवायमेंटल अप्रेजल कमेटी की सिफारिश जरूरी होती है। इसके बाद 15 जून से 1 अक्टूबर तक रेत खनन पर प्रतिबंध की शर्त के साथ खनन की स्वीकृति दी जाती है। लेकिन कारोबारियों द्वारा इन मापदंडों को दरकिनार कर दिया गया है।
15 जून से 1 अक्टूबर तक रहती है रोक
एनजीटी के नियमों के अनुसार बरसात के मौसम में जलीय जीवों की सुरक्षा एवं भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए रेत खदानों को बंद कर दिया जाता है। इससे पूर्व खनिज विकास निगम के द्वारा संचालित कुछ खदानों को रेत भंडारण की विशेष अनुमति खनिज विभाग से लेनी पड़ती है। लेकिन यह अनुमति केवल खनिज विकास निगम से संचालित खदानों को ही मिलती है। लीज में भंडारण करने की अनुमति नहीं मिलती। 15 जून से 1 अक्टूबर तक खदानों पर उत्खनन को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया जाता है।
इनका कहना है
अवैध रूप से रेत का कारोबार होने की जानकारी मिलती है जिसपर हमारी टीमें जाते हैं और कार्रवाई करती हैं। वहीं कई बाद कारोबारियों को पहले ही जानकारी मिल जाती है जिससे वह मौके से वाहनों को हटा देते हैं और कार्रवाई से बच जाते हैं।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी, छतरपुर
Published on:
22 Sept 2019 05:00 am
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