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15 साल में 3000 हाथों ने 15 घण्टे रोज मेहनत कर बनाया दुनिया का सबसे बड़ा जैन मंदिर

16 फरवरी से पंचकल्याणक, 24 को बड़े बाबा का होगा महामस्तकाभिषेक

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12 लाख घनमीटर में निर्मित हुआ 16 दरवाजे का विशाल मंदिर

12 लाख घनमीटर में निर्मित हुआ 16 दरवाजे का विशाल मंदिर



दमोह। कुण्डलपुर सिद्धक्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा और भव्य जैन मंदिर बनकर तैयार हो गया है। जिसकी प्राण प्रतिष्ठा के लिए आयोजित पंचकल्याणक गजरथ महामहोत्सव का आगाज शनिवार 12 फरवरी को आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में बड़े बाबा के महाजाप से होगा। पंचकल्याणक 16 फरवरी से आयोजित होगा और भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक 24 को किया जाएगा। इस महामहोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए देश और दुनिया से 60 मुनिराज 155 आर्यिकाएं और 8 ऐलक व क्षुल्लक पहुंच चुके हैं। वहीं, श्रावकों के आने का सिलसिला जारी है।

देश के सबसे बड़े आयोजनों में से एक महामहोत्सव में जैन संतों के समागम से कुण्डलपुर का नजारा महाकुंभ जैसा है। पंचकल्याणकनगर सज रहा है और तमाम व्यवस्थाएं आकार ले रही हैं। दुनियाभर के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे भव्य मंदिर का 15 साल तक 1500 कारीगरों के हाथों ने रोजाना 12 से 15 घंटे मेहनत कर 189 फीट उंचाई वाले मंदिर का निर्माण किया। इसमें 12 लाख घन मीटर पत्थरों का उपयोग हुआ है। राजस्थान के तीन तरह के पत्थरों से नागर शैली में बने भगवान आदिनाथ (बड़े बाबा) मंदिर की भव्यता को जमीन पर खड़े होकर निहार सकते हैं।

इसलिए है खास
नृत्य मंडप में बनाया गया 64 पिलर वाला 54.9 फीट का डोम
मंदिर में मुख्य शिखर, गुण मंडप, नृत्य मंडप, रंग मंडप, चौकी, पूर्व व पश्चिमी दिशा के दो विशाल गर्भ गृह बनाए गए हैं। नृत्य मंडप जेसलमेल के 1200 पत्थरों के जरिए 64 पिलर के सहारे 54.9 फीट वाई 54.9 फीट आकार का बनाया गया है। वहीं 54.9 फीट वाई 54.9 फीट आकार के गुण मंडप में भगवान पाŸवनाथ की दो मूर्तियां स्थापित की गई है।


पत्थरों में उकेरी प्रतिमाएं
जैसलमेर के मूलसागर पत्थरों से बनाए गए गुण मंडप में नृत्यांगनों व देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई गई। इसके अलावा कोली मंडप में आचार्यो की मूर्तियां विराजमान है, जिसमें आचार्य आहार, स्वाध्याय करते हुए नजर आ रहे हैं। पूर्व में भी एक गुण मंडप बनाया गया है। जिसमें 41.4 वाई 41.4 फीट का गर्भ गृह बनाया गया है। जहां त्रिकाल चौबीसी की 8 वेदियां बनाई गई है। इन वेदियों में 24 तीर्थंकर की मूतियां विराजमान है।

शीशम की लकड़ी से बनाए 18 फीट ऊंचे नक्काशीदार दरवाजे
मंदिर में 18 फीट 9 इंच ऊंचाई और 8 फीट चौड़ाई के 16 दरवाजे बनाए गए हैं। शीशम की लकड़ी से दरवाजों का निर्माण राजस्थान के बाडमेर में किया गया है। विशाल दरवाजों पर बेहद सुंदर नक्काशी भी की गई है। दरवाजे पर नक्काशी करने के साथ ही मंदिर के पत्थरों पर डेढ इंच तक गहरी कढ़ाई की गई है, जो अपने आप में खास और अलग है।

1500 कारीगर और आधुनिक मशीनों से हुआ निर्माण
कुण्डलपुर में बड़े बाबा के मंदिर निर्माण में वर्ष 2006 से रोजाना 1500 कारीगरों ने मेहनत की है। मकराना, बयाना, स्वरुपगंज, गुदावल, पिंडवारा के 1000 कारीगरों ने 6 साल तक गढ़ाई का काम किया और 300 कारीगर पत्थरों की फिटिंग का काम करते रहे। वहीं पत्थर की जुड़ाई के लिए 300 लोग अलग से लगाए गए। कारीगरों व मजदूरों की भारी भरकम फौज के अलावा आधुनिक मशीनों का भी सहारा लिया गया। निर्माण कार्य में 15 हाइड्रा, 50 टन की 5 क्रेन, 20 ट्रैक्टर और पत्थर काटने वाली भारी भरकम 7 बड़ी मशीनें भी लगाई गईं।

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