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अधिकतर दुकानों में बिना सत्यापन के तराजू व बांट से हो रही नापतौल

कई दुकानों में घटतौली का शिकार हो रहे ग्राहक, शिकायत के इंतजार में बैठा विभाग, नहीं किया जा रहा माप उपकरणों का सत्यापन

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आटा चक्की में कई वर्ष से बिना सत्यापन के की जा रही तौल 

आटा चक्की में कई वर्ष से बिना सत्यापन के की जा रही तौल 

छतरपुर. नापतौल विभाग के अधिकारी शहर के दुकानदारों के यहां उपयोग किए जा रहे तराजू, बांट, कांटे, मीटर, लीटर आदि का सत्यापन कार्य करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इस हाल में नगर की दुकानों पर रोजमर्रा का सामान खरीदने वाले ग्राहक अमानक तौल व माप होने से घटतौली का शिकार हो रहे हैं। यहां तक कि अधिकारियों की उदासीनता के चलते कुछ जगह पत्थर के बांटों का उपयोग हो रहा है, तो कहीं बिना सील लगे तराजू, बांट, कांटे, लीटर का इस्तेमाल हो उपयोग देखा जा सकता है।

जिले में सर्राफा, कपड़ा, गल्ला, आटा, हाथ ठेला, किराना, सब्जी, डेयरी, फल हो या मिठाई खरीदने वाला ग्राहक किसी भी सामान की खरीदी पर विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता है कि उसे सामान सही तौलकर दिया है। शहर सहित जिलेभर की दुकानों में बगैर सत्यापित बाट और तराजू का उपयोग दुकानदार कर रहे हैं। तौल कांटा और किलो बाट का सत्यापन करने विभाग की ओर से टीम का गठन भी नहीं हुआ है। वहीं बाजारों में इलेक्ट्रानिक कांटे की जगह तराजू का इस्तेमाल हो रहा है। इससे ग्राहक वजन में छले जा रहे हैं। जिले भर में करीब ४५ हजार से अधिक व्यापारी हैं। इनमें सब्जी फल विक्रेता से लेकर बड़े व्यापारी और धरमकांटा वाले शामिल हैं। जिसमें करीब ३० हजार मैनुअल और करीब 1५ हजार इलेक्ट्रॉनिक तौल का उपयोग कर रहे हैं। व्यापारियों ने अपने सामान की बिक्री के लिए किलो बांट या इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन रखी है। लोहे के तराजू रोज-रोज उपयोग होने से घिस जाते हैं। लेकिन विभाग द्वारा ध्यान नहीं देने पर आम लोग घटतौली का शिकार हो रहे हैं। इस वर्ष विभाग द्वारा मात्र १४ सौ नापतौल यंत्रों का सत्यापन किया है। वहीं इस वर्ष में उन्होंने कुल दर्जन भर कैम्प लगाए गए, जहां पर ११ सौ लोगों ने अपने तराजू सत्यापन कराया। वहीं अभी तक करीब ३५० प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा सका है।

बाजार में पत्थर से होती है तौल

नियम के अनुसार व्यापारियों को हर साल किलो बांट में स्टैंपिंग कराना चाहिए, लेकिन व्यापारी स्टैंपिंग नहीं कराते। बाजार में अभी भी पत्थर, ईंट और लोहे के अन्य वस्तुओं से सब्जी व फल की तौल की जाती है। इसके कारण उपभोक्ताओं को घटतौली का शिकार होना पड़ता है और उन्हें निर्धारित मात्रा में सामान नहीं मिल पाता। साग सब्जी वाले फुटकर व्यापारी खुलेआम पत्थर, ईंट के बांट से तौलकर सब्जी देते हैं।

यहां हो रही अधिक घटतौली

जिले में सबसे अधिक घटतौली डेयरी, सब्जी की दुकान, फलों की दुकान और हाथ ठेले, आटा चक्की, कबाड़ की दुकान में बड़ी मात्रा में घटतौली की जा रही है। डेयरी और घर-घर दूध बेचने वाले अधिकांस लोग लीटर ऊपर से काट कर नापते हैं। वहीं कबाड़ की दुकान और घर-घर कबाड़ खरीदने वाले लोगों द्वारा अधिक मात्रा में घटतौली की जा रही है। इसके अलावा अन्य दुकानदारों द्वारा भी घटतौली कर ग्राहकों को लूटा जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी नापतौल विभाग शिकायत के इंतजार में है।

इनका कहना है

हमारे यहां पर अभी तक इस तरह की शिकायत नहीं आई है, शिकायतें आने के बाद हमारी ओर से कार्रवाई की जाएगी।

एससी झारिया, नापतौल अधिकारी, छतरपुर

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