
गेंदा फूल की खेती
छतरपुर. परंपरागत खेती की बजाय जिले में किसानों का रुझान फूलों की खेती की ओर तेजी से बढ़ा है। इसके साथ वे औषधीय व सुगंधयुक्त पौधों की खेती को भी अपना रहे हैं। देखरेख और लागत कम लगने के बावजूद अधिक मुनाफा देने वाली इस आधुनिक खेती की लोकप्रियता जिले में बड़ी तेजी से बढ़ी है।
औषधीय पौधों की भी हो रही खेती
बुंदेलखंड के किसान कई पुश्तों से पारंपरिक खरीफ और रबी की फसल में गेहूं, चना, सोयाबीन, मटर, तिल, उड़द मूंग की खेती करते रहे हैं। जिसमें लागत, समय व अधिक देखरेख के बावजूद प्राकृतिक प्रकोपों से किसान अक्सर नुकसान उठाते रहते हैं। इसी कारण कम लागत व कम देखरेख में अधिक मुनाफा देने वाली फूलों व औषधीय व सुगंधीयुक्त पौधों की खेती की ओर किसान धीरे-धीरे जागरूक होने लगे। छतरपुर में फूलों में गेंदा, गुलाब, ग्लाइकोडिस, सूरजमुखी, लेमनग्रास की खेती अधिक की जा रही है। इसी तरह औषधीय पौधों में मशरूम, सफेद मूसली, अश्वगंधा की खेती का चलन तेजी से बढ़ गया है।
40 हो गई किसानों की संख्या
जिले में गेंदे की फूल की मांग लगातार बढ़ रही और अच्छे उत्पादन को देखते हुए 40 किसान इसकी खेती कर रहे हैं। किसानों ने बताया फूलों की खेती में लागत से तीन गुना ज्यादा मुनाफ कमाया जा रहा है। जिससे प्रेरित होकर और भी किसानों में गेंदा की खेती करने के प्रति रुचि बढ़ रही है। गेंदे की खेती करने की शुरुआत खजुराहो पर्यटन क्षेत्र के किसानों ने की। अब जिला मुख्यालय से लगे गांवों के किसान अपने खेत में नियमित रूप से गेंदा की खेती कर रहे हैं। अब जिले के फूल विक्रेताओं और जरूरतमंद लोगों को बाहर से गेंदे के फूल नहीं खरीदना पड़ रहे। उन्हें जिले में ही पर्याप्त मात्रा में फूल मिल जाते हैं।
खजुराहो-पन्ना तक सप्लाई
पर्यटन नगरी खजुराहो से लगे राजनगर निवासी विपिन कुशवाहा अपनी 2 बीघा जमीन में खुशबूदार तीन प्रकार के गेंदा फूल की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया फूलों की खेती की शुरुआत दो वर्ष पहले की किसानों की वर्कशॉप में उन्हें फूलों की खेती करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि खजुराहो और छतरपुर के आसपास होटल्स शादी घरों और त्योहारों में सजावट के लिए, खुशबूदार फूल बाहर से लाना पड़ते थे। अब स्थानीय किसान गेंदा फूल की खेती कर रहे है। उसे एक साल की खेती में फूल बेचने पर अच्छा खासा मुनाफा हुआ। साथ ही स्थानीय विक्रेताओं के द्वारा फूलों की मांग और बढ़ा दी गई। उसने इस वर्ष जून में फूलों की पौध को लगाया, जिनमें सितंबर माह से फूल आने शुरू हो गए थे, यह दिसम्बर तक चलेंगे। उन्होंने बताया कि, डेकोरेटर ने उनसे सम्पर्क किया और फूलों की खजुराहो के साथ पन्ना के लिए सप्लाई की गई है।
जिला मुख्यालय के पास भी उत्पादन शुरु
जिला मुख्यालय से लगे गांवों में होने लगी गेंदे की खेती छतरपुर से लगे गांव चंद्रपुरा निवासी हरदयाल कुशवाहा अपनी जमीन में फसल उत्पादन के साथ-साथ 1 बीघा जमीन में गेंदे के फूल की खेती करता है। विक्रेता खेत से ही फूल ले जाते है। साथ ही फूलों की डिमांड इतनी ज्यादा रहती हैं कि वह विक्रेताओं को फूल उपलब्ध नहीं करा पाते। वह अपनी खेती पर पिछले 2 साल से गेंदा के फूल की खेती कर रहे है। इससे उसे अन्य फसलों की अपेक्षा अच्छा खासा मुनाफा भी हो रहा है। विपिन ने बताया छतरपुर बाजार से ही गेंदे के फूल के बीज उपलब्ध हो जाते हैं। जिससे उन्हें 20-25 दिन में नर्सरी तैयार करने में लगते हैं। फिर मल्चिंग पद्धति से पौधरोपण करते है और लगातार उनकी देखरेख की जाती है। तब जाकर दो से ढाई महीने में पौधों में फूल आने लगते हैं।
रोग बीमारी का खतरा कम
गेंदे के फूलों पर कीटों का प्रभाव बेअसर रहता है फूल की खेती कर रहे किसानों ने बताया कि गेंदे के फूलों पर आमतौर पर सब्जियों की अपेक्षा रोग कीट कम आते हैं। जिससे फूलों को नुकसान नहीं पहुंचता। उन्होंने बताया कि इल्ली और मकड़ी से बचाव आवश्यक होता है। जो आसान है। उन्होंने कहा जब फूल आते तो तुरंत तुड़ाई की जाती है जिससे नए फूल आते रहें। बाजार में एवरेज रेट 25-30 रुपए किलो रहता है। जो लागत खर्च के तीन गुना होता है। जिससे आसानी है। अच्छी खासी इनकम हो जाती है। इस खेती के लिए सर्दियों का सीजन लाभकारी नहीं है।
Published on:
27 Nov 2023 10:55 am
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