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फजी बिलों के सहारे लाया जा रहा लोहा, असली बिल बेचे भी जा रहे

टैक्स चोरी का सिलसिला वर्षों से चल रहा है। इस गोरखधंधे में न केवल व्यापारी बल्कि कुछ ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं, जो माल की आपूर्ति के बाद असली ई-वे बिलों को बेच देते हैं या उनका दुरुपयोग करते हैं।

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फर्जी बिल से सरिया लाने पर बीते साल पकड़ा गया ट्रक

छत्तीसगढ़ के रायपुर से छतरपुर और आसपास के जिलों में सरिया (लोहा) की अवैध आपूर्ति का बड़ा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है। इसमें रायपुर और छतरपुर के कुछ व्यापारियों की मिलीभगत सामने आई है, जो फर्जी ई-वे बिलों का इस्तेमाल कर बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही।

फर्जी ई-वे बिल से हो रही करोड़ों की कर चोरी

जानकारी के अनुसार, रायपुर से सरिया लाकर छतरपुर में बेचने वाले व्यापारी असली ई-वे बिल के बजाए फर्जी दस्तावेजों का सहारा ले रहे हैं। पिछले दिनों यातायात और पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़े गए एक ट्रक की दस्तावेजी जांच में पाया गया कि ई-वे बिल फर्जी था और उसपर टैक्स की चोरी की जा रही थी। इसके बावजूद मामले में कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया।

वर्षों से चल रहा खेल, जांच में लापरवाही


सूत्रों की मानें तो यह टैक्स चोरी का सिलसिला वर्षों से चल रहा है। इस गोरखधंधे में न केवल व्यापारी बल्कि कुछ ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं, जो माल की आपूर्ति के बाद असली ई-वे बिलों को बेच देते हैं या उनका दुरुपयोग करते हैं। राज्य कर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि यदि ई-वे बिल फर्जी पाए जाते हैं तो नोटिस देकर जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी रोकथाम के उपाय नाकाफी हैं।

बिल बेचकर होती है अतिरिक्त कमाई, दोहरा फायदा


व्यापार में हो रही गड़बडिय़ों का एक और तरीका सामने आया है। व्यापारी असली ई-वे बिल का उपयोग कर सरिया मंगवाते हैं, लेकिन जब माल खरीदार को सप्लाई किया जाता है, तो ट्रांसपोर्टर प्रति क्विंटल एक हजार रुपए कम भुगतान लेता है। इस तरह लोहा खरीदने वाले को सस्ता माल मिल जाता है और ट्रांसपोर्टर उस असली बिल को किसी अन्य व्यापारी को बेच देता है या उसका उपयोग अन्य अवैध माल को वैध दिखाने के लिए करता है।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में


इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और कर विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आईं, लेकिन कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। व्यापारिक स्रोतों का कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच की जाए तो करोड़ों रुपए के टैक्स घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।

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