
It is easy to get hair dye so death takes the throat
छतरपुर। बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी और अवसाद से ग्रस्त लोग आत्महत्या जैसे कदम तेजी से उठा रहे हैं। इन हालातों में वे आसानी से उपलब्ध होने वाले जहरीले पदार्थों का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। इनमें हेयर डाई, चूहामार दवा और फसलों के लिए उपयोग होने वाले कीटनाशक लोग आसानी से उपलब्ध होने के कारण मौत के लिए उनका सेवन कर रहे हैं। पिछले एक साल में जिले में हेयर डाई पीकर आत्महत्या करने के मामले ज्यादा बढ़े हैं। इसका कारण भी साफ है कि लोगों को यह जहरीला पदार्थ हर जगह और बेहद आसानी से मिल जाता है। हर दुकान पर मिलने वाली हेयर डाई लोगों के घरों में भी ज्यादातर समय उपलब्ध रहती है। इसलिए कई बार ऐसा भी होता है कि अवसाद की स्थिति में व्यक्ति जो भी सामने मिलता है उसे निगल लेता है।
केस - 1 : पापा के कमरे से उठाकर पी ली डाई
गौरिहार क्षेत्र के ग्राम मवई घाट निवासी रामसेवक पटेल ने 7 महीने पहले अपने ही घर में हेयर डाई पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी। समय रहते उसे अस्पताल पहुंचा दिए जाने से डॉक्टरों ने उसे बचा लिया था। रामसेवक का विवाद अपने बड़े भाई से हो गया था। इस पर उसने गुस्से में आकर पिता के कमरे में रखा हेयर डाई पी लिया। उल्टी हो जाने से बहुत सा हिस्सा बाहर आ गया इसलिए वह बच गया। रामसेवक का कहना था कि अगर उस समय उसे डाई नहीं मिलती तो वह ऐसा कदम नहीं उठाता।
केस - 2 : भाई के लिए लाई थी डाई और निगल ली
बड़ामलहरा के ग्राम बमनी में अजुद्दी लोधी की बेटी द्रोपती ने पिछले साल कक्षा 8वीं में फेल हो जाने पर घर में रखी हेयर डाई पी ली थी। स्कूल से आते समय वह अपने पिता के लिए हेयर डाई लगाने लाई थी। इसी दौरान उसके मन में फेल होने का डर हावी हुआ तो उसने उसी हेयर डाई को पानी में धोलकर पी लिया। उल्टी होने पर अस्पताल ले जाया गाय। बाद में उसे ग्वालियर के लिए रैफर किया गया। लेकिन कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई।
ज्यादातर घरों में उपलब्ध रहती है हेयर डाई :
बुंदेलखंड में हेयर डाई के इस्तेमाल का चलन ज्यादा है। गांव और शहर के लोगों के बाल समय से पहले पककर सफेद हो जाने के कारण अधिकांश लोग नियमित रूप से हेयर डाई का उपयोग करते हैं। शहरी क्षेत्र में जो लोग समृद्ध हैं वे ब्रांडेड कंपनियों के हेयर कलर लगाते हैं। लेकिन मध्यम वर्गीय परिवारों और ग्रामीण परिवार में लोग बाजार में उपलब्ध सस्ती हेयर डाई का इस्तेमाल करते हैं। बाल बढऩे के साथ ही हेयर डाई जल्दी अपना रंग छोड़ देती है, इसलिए लोग हर समय अपने घर पर ही उसे रखते हैं और नियमित रूप से लगाते रहते हैं। यही वजह है कि किसी परिवार में विवाद या अन्य कोई कारण से विपरीत स्थिति बनने पर आत्महत्या जैसे कदम उठाने वाले लोगों के लिए हेयर डाई आसानी से पहुंच में आ जाती है।
किडनी और लीवर को डैमेज करती है डाई :
हेयर डाई में आधा दर्जन से ज्यादा केमिकल पाए जाते हैं। हर केमिकल का अपना अलग-अलग असर होता है। डॉ. एसके चौरसिया बताते हैं कि हेयर डाई का सेवन करने वाले व्यक्ति की किडनी फेल हो जाती है। उसका लीवर भी प्रभावित होता है। मरीज को उल्टी करा दी जाती है और समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता है तो समय रहते इलाज हो जाने से बहुत बार उसे बचा लिया जाता है। लेकिन यदि हेयर डाइ की ज्यादा मात्रा मरीज के लीवर में अवशोषित हो जाती है तो उसका बचना मुश्किल होता है। अन्य जहरीले पदार्थ की तुलना में हेयर डाई का असर धीरे-धीरे व्यक्ति के शरीर पर होता है। सबसे पहले वह किडनी और लीवर को ही डैमेज करता है। मरीज समय रहते अस्पताल आ जाए तो उसकीे स्टोमस वॉस (अमाशय की धुलाई) कराकर जरूरी दवाईयंा दे दी जाती हैं। इससे बहुत हद तक मरीज को बचा लिया जाता है। हालांकि बचने के बाद भी सेवन करने वालों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डाई सेवन करने वाले को ऐसे बचा सकते हैं :
डॉक्टरों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति हेयर डाई पीता है और समय रहते परिजनों को पता चल जाता है तो वे सबसे पहले उसे उल्टी कराएं। ज्यादा उल्टियां हो रहीं हों तो करवट लेकर लिटाएं और पैद फैला दें। बेहोश होने की स्थिति में उल्टियां नहीं कराएं। जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के पास ले जाएं। जो भी पदार्थ सेवन किया गया हो उसका नमूना अपने साथ अस्पताल ले जाएं ताकि डॉक्टर तय कर सके कि क्या इलाज देना है। इसके अलावा उल्टी आदि का सेंपल भी ले जाएं ताकि उसकी जांच से जहर के स्तर का पता चल सके।
हर दिन औषतन १ मरीज पहुंच रहा जिला अस्पताल :
हेयर डाई का सेवन करने के मामले लगातार बढ़ रहे है। पिछले एक साल (साल २०१७) में हेयर डाई पीने से जिले में १६८ मौतें हो चुकी हैं। जबकि सवा सौ से ज्यादा मरीजों को समय रहते इलाज मिल जाने के कारण बचा भी लिया गया है। पिछले एक साल में २७८ मरीज अस्पताल में हेयर डाई पीकर पहुंचे हैं। एक महीने में १८ लोग जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें से 9 लोगों की मौत हुई है। जबकि बाकी लोगों को बचा लिया गया है। इनमें से तीन मरीजों को गंभीर हालत होने पर ग्वालियर रैफर किया गया है।
हेयर डाई में पाए जाते हैं यह सात केमिकल :
पैथालॉजिस्ट डॉ. प्रेमचंद्र स्वर्णकार बताते हैं कि हैं कि हेयर डाई में सात प्रकार के केमिकल पाए जाते हैं। इनमें सस्ते हेयर डाई में सबसे ज्यादा खतरनाक केमिकल होते हैं। इस कारण हेयर डाई का नियमित उपयोग करना ही खतरनाक होता है। अगर कोई इसका सेवन करता है तो उसका बचना ही मुश्किल होता है।
1. लीड एसिटेट : आमतौर पर कई सस्ते हेयर डाइ में लीड एसिटेट मिल जाता है जो बालों को तुरंत गाढ़ा रंग देने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इससे शरीर के नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क से संबंधित समस्या हो सकती है।
2. पीपीडी : पीपीडी यानी पी. फिनायलेनेडाइमाइन का इस्तेमाल डाइ के रंग को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए किया जाता है। बाजार में उपलब्ध 75 प्रतिशत हेयरडाइ में यह केमिकल पाया जाता है। यह केमिकल न सिर्फ ब्लाडर कैंसर की वजह बनता है बल्कि इससे फेफड़े, किडनी, लिवर, प्रतिरोधी क्षमता और नर्वस सिस्टम पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. परसल्फेट : परसल्फेट्स में पोटैशियम, सोडियम और अमोनियम सल्फेट्स जैसे केमिकल्स होते हैं जो हेयर डाइ और ब्लीच जैसे उत्पादों में डाले जाते हैं। इनसे त्वचा रोग तो हो ही सकते हैं साथ ही दमा, सांस लेने की दिक्कत या फेफड़े खराब होने का भी डर बना रहता है।
4. रेसोर्सिन : हेयर डाइ में पाया जाने वाला रेसोर्सिन या रेसोर्सिनोल शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगाड़ता है। इसका इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं के लिए तो और भी हानिकारक है। इसके इस्तेमाल से आंखों और त्वचा में भी समस्याएं हो सकती हैं।
5.हाइड्रोजन पेरोक्साइड : कई शोधों में हाइड्रोजन पेरोक्साइड को कार्सेनिक रसायन माना जा चुका है यानी इसके संपर्क से कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन फिर भी इसका इस्तेमाल हेयर डाइ में धड़ल्ले होता है।
6. अमोनिया : अमोनिया का इस्तेमाल अक्सर हेयर डाइ में होता है जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में संक्रमण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कई बार इसका इस्तेमाल हेयर डाई में पीपीडी के विकल्प के रूप में भी किया जाता है।
7. एबीपी : एबीपी का इस्तेमाल बालों का रंग गहरा करने के लिए हेयर डाइ में किया जाता है। भूरे रंग को छोड़कर हर रंग के हेयर कलर में इसका इस्तेमाल होता है। इसके अधिक इस्तेमाल से कैंसर होने की आशंका अधिक रहती है।
Published on:
11 Feb 2018 09:45 am
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