
Jainism's first tirthankar Adinath Bhagwan's celebrated birth birth anniversary
छतरपुर. शहर के दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्मजयंती महोत्सव भव्य रूप में मनाया गया। शुक्रवार को सुबह से ही अधिक संख्या में श्रावक जन बड़ा मंदिर में एकत्र हुए और मूल्यनायक भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक 108 कलशों से एवं शांतिधारा आचार्यश्री विनिश्चय सागर के ससंघ सानिध्य में हुईं।
समाज के अजित जैन ने बताया कि श्रावको ने भगवान आदिनाथ की पूजन अर्चना की उसके पश्चात आचार्यश्री ने धर्म सभा में लोगो को संबोधित किया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि भगवान आदिनाथ जिन्हें ऋ षवदेव के नाम से भी जानते है, इस युग के प्रथम तीर्थंकर है। भगवान महावीर चौबीसवे अंतिम तीर्थंकर है, परन्तु भगवान ऋ षवदेव प्रथम तीर्थंकर है। इस युग मे उन्होंने ही जैन धर्म का प्रथम प्रवर्तन किया। ध्यान रखना उन्होंने जैन धर्म का प्रतिपादन नहीं किया, प्रवर्तन किया। क्योकि जैनधर्म अनादि अनिधन धर्म है जो अनादिकाल से है और अनंन्तकल तक रहेगा। परन्तु समय-समय पर जब युग बदलते है तो इस भरत क्षेत्र में चौबीस तीर्थंकर होते है। तो विस्मरण की ओर जा रहे धर्म को पुन: प्रवर्तन करते है हमें ये स्मरण रखना चाहिए कि आदिनाथ भगवान ने ही इस युग में असि, मसि, कृषि, विद्या, वार्डीय, शिल्प के उपदेश द्वारा क्रम भूमि की व्यवस्थाएं बताई थी।
कार्यक्रम में शहर के युवा वर्ग, बच्चे, महिला, पुरुष, सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे। इनमें से मुख्य रूप में जैन समाज अध्यक्ष जयकुमार जैन, महामंत्री स्वदेश जैन, दादा ज्ञानचंन्द्र जैन, प्रदीप जैन, सुरेन्द्र बड़कुल, संतोष बड़कुल, राहुल जैन, लकी बड़कुल, देवेन्द्र जैन, अरविन्द जैन, अजित जैन, अंशुल जैन, विनोद जैन, प्रमोद जैन सहित सभी समाज के पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी उपस्थित रहीं।
फोटो : सीएचपी ३००३१९-०१ केप्शन
Published on:
31 Mar 2019 11:08 am
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