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खाए के गाल, नहाए के बाल अलग दिखत हैं: मुनिश्री

प्रवचन

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खाए के गाल, नहाए के बाल अलग दिखत हैं: मुनिश्री

खाए के गाल, नहाए के बाल अलग दिखत हैं: मुनिश्री

बड़ामलहरा. आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि आदित्य सागर, मुनि सहज सागर, मुनि अप्रियम सागर और मुनी विश्वास सागर का ससंघ प्रवेश नगर में हुआ। नगर वासियों ने नगर की सीमा पर पहुंच कर उनकी आगवानी की।
नगर के पंचायती मंदिर में सुबह की बेला पर धर्म सभा को संबोधित करते हुई मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि संसार में जितने भी जीव हैं वो दुख से संतृप्त हैं, इसलिए कर्म भूमि को प्राप्त करके उत्तम धर्म का पालन करो। उन्होंने बुंदेली में एक कहवात कहते हुए कह ा कि खाए के गाल और नहाए के बाल अलग दिखत हंै। ऐसी ही सम्यक दृष्टि की चर्या और चर्चा अलग दिखाई देती है।
चालीस दीपों को जला कर मनाया अवतरण दिवस
दोपहर की बेला में मुनि सहज सागर महाराज का 40वां अवतरण दिवस मनाया गया। सभी श्रावकों ने मुनि श्री की पूजा की और चालीस दीप जला कर उनकी आरती उतारी। इस मौके पर राजेश जैन जबलपुर लाल दुकान, गुलाब चंद्र टीकमगढ, उत्तमचंद्र मोगना, संजीव कुमकुम साड़ी, प्रमोद जैन, शैलेन्द्र जैन टीकमगढ़, पनिराज हेगड़े कर्नाटक मुलबद्री, शिखरचंद जैन, संजीव जैन, आलोक शास्त्री, महेश शास्त्री, शील देवडिय़ा, शीलचंद्र जैन पनवारी, सतीश मोदी, संतोष सिंघई, प्रमोद जैन पाटनी, आनंद जैन पाटनी, धनकुमार जैन आचार्य मौजूद थे। , राजकुमार जैन बमनी, नितिन चौधरी, पवन देवडिय़ा, वैभव जैन, संदीप फौजदार, रजनीश जैन, छैनू जैन, प्रसन्न जैन, अभय जैन सहित सकल दिगम्बर जैन समाज के लोग मौजूद रहे।