छतरपुर. खजुराहो में आदिवर्त लोककला संग्रहालय में आदिवासी बस्ती की ही तर्ज पर 5 करोड़ की लागत से दो एकड़ में एक नई बस्ती बनाने का काम शुरु हो गया है। आदिवर्त के पार्ट टू में शामिल इस बस्ती में मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड, बघेलखंड, मालवा, निमाड़ और चंबल क्षेत्र की लोक संस्कृति और कला का प्रदर्शन किया जाएगा। अंचल के कुछ लोगों को भी बस्ती में बसाया जाएगा, जो पर्यटकों को अपनी संस्कृति से रू-ब-रू कराएंगे।
लोकदेवताओं व चरित्र नायक की महिला का होगा बखान
नई बस्ती का मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा निर्माण कराया जा रहा है। आदिवर्त लोककला संग्रहालय के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया कि बुंदेलखंड, बघेलखंड, मालवा, निमाण और चंबल के लोकांचल से पर्यटक बस्ती में रू-ब-रू हो सकेंगे। इन पांचों क्षेत्रों के लोकांचल की संस्कृति, सभ्यता, रहन सहन, कला, बैठक, चौपाल, घरों के अंदर का वातावरण आदि का दर्शन इस बस्ती में होगा। बस्ती में इन लोकांचलों के लोग आकर यहां रहेंगे। कच्चे मकान गोबर आदि से लीप कर, साथ ही समय समय पर अपनी मिट्टी कलई आदि से पोत कर आकर्षक सजाव करते हैं। ऐसा ही बस्ती में भी होगा। बस्ती में लोकांचल के कृषि उपकरओं व अन्य पुरातन संसाधनों का भी प्रदर्शन होगा। बस्ती की मुख्य बात ये है कि इसमें प्रदेश के पांचों लोकांचल के आवास, चरित्र नायक और लोकदेवताओं की महिमा का बखान किया जाएगा।
हर महीने लग रही लिखन्दरा प्रदर्शनी
आदिवर्त जनजातीय लोक कला राज्य संग्रहालय खजुराहो में प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों को चित्र प्रदर्शनी और उनके चित्रों की बिक्री के लिए सार्थक मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रतिमाह लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा का आयोजन किया जा रहा है। 30 मई तक भील समुदाय की चित्रकार गंगू बई के चित्रों की प्रदर्शनी सह-विक्रय का संयोजन किया जा रहा है। इसमें भील चित्रकार गंगू बाई की चित्रकला को प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रदर्शनी में चित्रकार द्वारा हल चलाना बैलगाड़ी और बच्चे गल बापूजी, विवाह के अवसर पर बनाए जाने वाला चित्र, खजूर का पेड़ और चिडिय़ा, नीम का पेड़ और हिरण, कछुआ अन्य कई विषयों पर चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।
आदिवर्त में 7 जनजातियों की बसाई गई है बस्ती
खजुराहो में आदिवर्त नाम से बस्ती बसाई गई है। आदिवर्त जनजातीय लोक कला राज्य संग्रहालय का जी-20 बैठक के दौरान फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्घाटन किया था। आदिवर्त में मध्यप्रदेश के प्रमुख 7 जनजाति बैगा, मारिया, कोल, भील, गौंड़, सहरिया एवं कोरकू के 7 पारंपरिक आवासों का निर्माण किया गया है। इन आवासों में संबंधित जनजातियों द्वारा उपयोग की जाने वाली जीवन उपयोगी सामग्रियों का संग्रह एवं उनके जीवन, संस्कृति से जुड़ी विभिन्न सामग्री को प्रदर्शित किया गया है।
इनका कहना है
लोकांचल की संस्कृति की झलक लिए बस्ती का निर्माण शुरु किया गया है। आदिवर्त के दूसरे चरण में पांच लोकांचल के जनपदीय आवास, चरित्र नायक, लोक देवताओं की झलक दिखाई देगी।
आशोक मिश्रा, प्रभारी