
Chhatarpur
नीरज सोनी छतरपुर। छतरपुर जिला मुख्यालय से २५ किमी दूर स्थित ईशानगर में मालखाना के भगवान जिले सहित पूरे बुंदेलखंड में अपने चमत्कारिक रहस्यों के कारण ख्याति पा चुके हैं। उनके दर्शन करने के लिए अब दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। कलियुग में भगवान के चमत्कारों की कहानी से भरा पड़ा है ईशानगर के पुराना थाना के मालाखाना में विराजे भगवान श्रीराम-जानकी और लक्ष्मण जी का विग्रह। देश की आजादी के पहले रियासतकाल से ही पुलिस के साथ रहते चले आए इन चमत्कारिक भगवान की अनूठी माया से सब हैरान है। वे पुलिस के साथ रहने के लिए ही अब पहचाने जाने लगे हैं। यही वजह है कि अब थाना के मालखाना में ही उनका मंदिर बनाया जा रहा है। ईशानगर के लोगों ने मंदिर की दिव्य प्रतिमाओं के चमत्कार को बेहद करीब से न सिर्फ देखा है बल्कि महसूस भी किया है। मंदिर के पुजारी बालकिशन नायक बताते हैं कि अच्छे भाव से भगवान की प्रतिमाएं उठाते हैं तो वे फूल जैसी हो जाती हैं, वजन न के बराबर रहता है। लेकिन अगर गलत भावना से कोई मूर्तियां उठाने की कोशिश करे तो उनका वजन इतना हो जाता है कि उठाना भी संभव नहीं होता है। ईशानगर के भगवान की समानता ओरछा के श्रीरामराजा सरकार से मिलती-जुलती है।
३१ साल पहले का चोरी हो गए थे भगवान :
ईशानगर निवासी भगवानदास नायक और बालकिशन असाटी बताते हैं कि कि रियासत काल में पुलिस थाना ईशानगर से दूर पुराने किले पर था। इसी जगह पुलिस थाना था और इन दिव्य प्रतिमाओं का मंदिर भी था। जिसे लोग गढ़ी के मंदिर के नाम से जानते थे। इसमें अष्ठधातु की प्राचीन श्रीराम-जानकी, लक्ष्मण की मूर्तियां थी। यहां पर भगवान को हर दिन पुलिस द्वारा ओरछा की तरह ही गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता था। देश के आजाद के बाद भगवान पुलिस के साथ ही रहे और श्रद्धालुओं से ज्यादा पुलिस कर्मी और थाना प्रभारी उनके आराधक होते थे। ईशानगर कस्बा विकसित होने के बाद पुलिस थाना गढ़ी से हटकर ईशानगर कस्बे में आ गया। इस पर भगवान अकेले पड़ गए। १९८७ में अचानक से मंदिर के सभी भगवान चोरी हो गए। १४ महीने बाद नौगांव के पास एक यात्री बस में चोरों सहित मूर्तियां बरामद हो गई थीं। राजू नायक बताते हैं कि चोर एक बक्से में मूर्तियां लेकर गद्दे में लपेटकर ले जा रहे थे। लेकिन अचानक से उनका वजन इतना अधिक हो गया कि वे उसे उठा नहीं पाए। इस पर लोगों को संदेह हुआ तो वे पकड़ लिए गए।
अनोखा आदेश देकर जज ने भेजा था मूर्तियों को थाने :
ईशानगर के लोग यह भगवान का चमत्कार ही मानते हैं कि भगवान वापस से फिर गढ़ी मंदिर जाने की जगह पुलिस के पास आ गए। कोर्ट में जब चोरों को पेश किया गया तो सुनवाई करने वाले तत्कालीन जज ने प्रतिमाओं को वापस मंदिर में रखवाने की जगह थाना के मालखाना में पुलिस सुरक्षा में रखने का लिखित आदेश जारी किया। साथही पूजा के लिए सरकारी पुजारी रखने और नियमित पाठ-पूजा का निर्देश दिया। तभी से ईशानगर थाना के मालखाना में भगवान की मंदिर की तरह पूजा होती आ रही है। लोग बताते हैं कि थाना में कोई भी थानेदार हो, लेकिन यहां का प्रबंधन भगवान के इशारे पर ही चलता रहा है। जब कभी भी किसी थानेदार ने भगवान के मंदिर के सम्मान के प्रति कुछ भी नकदरी की तो उसका या तो तबादला हो गया फिर वह सस्पेंड हो जाता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि भगवान को थाने में बैठा देखकर कुछ लोगों के मन में यह विचार आया कि भगवान के लिए नया मंदिर बनाकर पूरे सम्मान के साथ उनकी स्थापना की जाए। जनसहयोग से 20 साल पहले बस स्टैंड के पास ही एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर पूरा बन गया, लेकिन इस काम में इतनी दिक्कतें आईं कि भगवान उस मंदिर में नहीं पहुंच पाए। जबकि थाना के मालखाना में भगवान का मंदिर बनाया जाना किसी भी नियम-कानून के हिसाब से संभव नहीं था, लेकिन थाने की पुरानी बिल्डिंग मंदिर का रूप ले चुका है और मालखाना को गर्भ गृह में की शक्ल दी जा चुकी है। हवालात में वाचनायलय बन रहा है। पूरा सरकारी भवन और परिसर मंदिर के रूप में बदल चुका है। यह पूरी संपत्ति भी मंदिर के नाम हो गई।
ओरछा के श्रीरामराजा मंदिर की तरह है समानता :
जिस तरह ओरछा में श्रीरामराजा सरकार को पहली बार राजमहल की रसोई में बैठा दिया गया था फिर वे वहां से नहीं उठे, जबकि उनके लिए विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया था, लेकिन वे वहां नहीं गए। आज भी वहां का मंदिर वीरान है। इसी तरह ईशानगर के भगवान भी जब से थाना के मालखाना में बैठे तो फिर उठे ही नहीं। उनके लिए भी मंदिर बना, लेकिन वे यहां नहीं गए। इसी तरह ओरछा के श्रीरामराजा सरकार को सलामी दी जाती थी। उसी तरह गढ़ी मंदिर में ईशानगर के भगवान को भी सलामी दी जाती रही।
मालखाना के मंदिर के लिए जुट गया जनसहयोग :
ईशानगर थाना का नया भवन पांच माह पहले तैयार हुआ तो पुराने भवन से थाना नए भवन में शिफ्ट हो गया, लेकिन इस थाना के मालखाना में बैठे भगवान इसी भवन में बैठे रहे। थाना के मालखाना में ही भगवान का यह दरबार सजा है। अब यह थाना भवन मंदिर का रूप ले चुका है। यहां गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए पुस्तकालय का निर्माण भी किया गया है। पुराना थाना भवन के मालखाना कक्ष को ही मंदिर का गर्भगृह बनाया जा रहा है। हवालात को वाचनालय का स्वरूप दिया जाने लगा है। मंदिर परिसर के चारों तरफ बाउंड्रीवाल बनवाकर उस पर आकर्षक लैंप के साथ न सिर्फ लाइटिंग की गई है, बल्कि अच्छे विचार भी लिखे गए हैं। मंदिर परिसर के अंदर बाउंड्रीवाल से लगाकर एक गुलाब के फूलों का पार्क बनवाया गया है। मंदिर का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो, इसके लिए पांच दुकानों का निर्माण भी मंदिर से बाहर मुख्य सड़क पर किया गया है, जिन्हें किराए पर देकर उससे होने वाली आय भगवान की सेवा में खर्च होगी। अपने आप में अविश्वसनीय लगने वाला यह सब काम पुलिस विभाग के ही एक एसआई अनूप यादव ने किया है। एसआई यादव का तबादला दो सप्ताह पहले ही ईशानगर से सरवई के लिए हो गया है।
थाना प्रभारी ने जनसहयोग से किया बड़ा काम :
ईशानगर निवास भगवानदास नायक और मुन्नालाल असाटी ने बताया कि एसआई अनूप यादव ने जनभागीदारी से पुराना थाना भवन को मंदिर के रूप में बदल दिया है। उन्होंने बताया कि एसआई यादव ने न सिर्फ अपने वेतन से बल्कि नगर के लोगों से सहयोग एकत्र करके भगवान के मंदिर का निर्माण करा दिया है। थाना भवन को पूरी तरह से मंदिर के रूप में बदल दिया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर की मूर्तियों का चमत्मारिक इतिहास है। यह स्थान लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां का जीर्णोद्धार कराने के कारण ही लोग थाना प्रभारी से इतने अधिक प्रभावित थे कि उनका तबादला होने की खबर सुनकर ही लोगों ने ईशानगर में आंदोलन कर दिया था। बाजार बंद करके प्रदर्शन किया ओर फिर एसपी ऑफिस पहुंचकर भी ज्ञापन दिया। जब तबादला नहीं रुका तो लोगों ने एक बड़ा समारोह करके एसआई यादव को विदाई दी थी।
Published on:
29 Mar 2018 07:33 pm
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