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पहले से कर्ज में दबे किसान पर मनरेगा के तालाब ने चढ़ाया डेढ़ लाख का कर्ज, परेशान होकर दे दी जान

गर्रोली चौकी के सोनाटी पंचायत के नयाघर गांव के किसान ने कर्ज के कारण की आत्महत्यामनरेगा के तहत सचिव ने मशीन से खुदवाया तालाब, मशीन के डेढ लाख बकाया के भार से किसान हुआ हताश

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Farmer commits suicide due to debt

Farmer commits suicide due to debt

छतरपुर। नौगांव इलाके की गर्रोली चौकी के सोनाटी ग्राम पंचायत के नयाघर गांव के 55 वर्षीय किसान ने शनिवार को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। किसान ने कर्ज के बोझ तले दबकर आत्हत्या जैसा कदम उठाया। किसान के बेटे नीरज राय ने आरोप लगाया है कि पिता पहले से ही कर्जदार थे, सचिव व रोजगार सहायक ने मनरेगा की खेत तालाब योजना के तहत तालाब खुदवाकर कर्ज उतारने का झंासा देकर मशीन से तालाब खुदवा दिया। योजना के तहत किसान को मिलने वाले तीन लाख रुपए मिले नहीं, ऊपर से मशीन संचालक अपने डेढ लाख रुपए मांगने लगा। किसान ने सचिव-रोजगार सहायक से रुपए दिलाने के लिए पांच महीने तक बार-बार गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर हताश किसान ने आखिरकार अपनी जान दे दी।

ये है पूरा मामला
नयाघर गांव के किसान मुन्नीलाल राय पिता नन्हेराय ने शनिवार को खुदकुशी कर ली। मुन्नीलाल के बेटे नीरज राय ने आरोप लगाया है कि पिता ने अपने छोटे बेटे के इलाज के लिए नौगांव के एक साहूकार खूब सिंह से 4 साल पहले 9 हजार रुपए लिए थे। ब्याज समेत डेढ लाख रुपए साहूकार मांग रहा था। इसी बीच सचिव मोतीलाल यादव ने दिसंबर 2019 में मुन्नीलाल से कहा कि खेत तालाब योजना के तहत तालाब खुदवा लो, 3 लाख रुपए मिलेंगे, जिससे तुम्हारा कर्ज उतर जाएगा। मुन्नीलाल ने सचिव मोतीलाल व रोजगार सहायक मुरलीधर अहिरवार की बात मानकर खेत तालाब के लिए हामी भर दी। सचिव-रोजगार सहायक ने खेत तालाब के लिए 3 लाख रुपए स्वीकृत कराए और दिसंबर-जनवरी में मशीन से तालाब खुदवा दिया गया। तालाब खुदाई के मूल्यांकन के बाद 1 लाख 99 हजार रुपए की राशि शासन की योजना के तहत आए जो 40 मजदूरों के खाते में डालकर सचिव-रोजगार सहायक ने फरवरी 2020 में खर्दुबुर्द कर दिए। मुन्नीलाल को रुपए नहीं मिले तो उसने सचिव-रोजगार सहायक से रुपए दिलाने के लिए कई बार गुहार लगाई। हर महीने कम से कम 4 से 5 बार किसान गुहार लगाता रहा और सचिव -रोजगार सहायक बार-बार टालते रहे। इसी बीच तालाब खोदने वाले मशीन संचालक ने अपने डेढ लाख रुपए के लिए किसान पर दवाब बनाना शुरु कर दिया। इधर किसान को पता चला कि फरवरी में ही 40 मजदूरों के नाम से उसके खेत तालाब के लिए मिले 1.99 लाख रुपए निकाल लिए गए हैं। ऐसे में कुल तीन लाख का कर्ज और राशि मिलने की आस खत्म होने से मुन्नीलाल हताश हो गया। शुक्रवार को परिवार वाले तेरहवीं के कार्यक्रम में लवकुशनगर गए थे। मुन्नीलाल घर पर अकेला था और शनिवार की सुबह 4 बजे खेत तालाब की मेड पर चिल्ला के पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी।

२० दिन पहले ही आखरी बार लगाई थी किसान ने गुहार
नीरज ने बताया कि उसके पिता और वो सरपंच सुनिया अहिरवार, सचिव मोतीलाल यादव और रोजगार सहायक मुरलीधर से आखरी बार 20 दिन पहले मिले थे। तीनों से उन्होंने तालाब के रुपए दिलाने की गुहार लगाई। उन्होंने ये भी कहा कि कम से कम मशीन के पैसे दिला दो, ताकि मशीन वाले का कर्ज तो उतार दे। सचिव ने कहा कि अभी घर जाओ, दो-तीन दिन में रुपए मिल जाएंगे। किसान वहां से जाते-जाते कह गया कि रुपए नहीं दिलाए तो मैं फांसी लगाकर खुदकुशी कर लूंगा। लेकिन जब 20 दिन तक रुपए नहीं मिले तो किसान ने जैसा कहा वैसा ही कर डाला।

तालाब मशीन से खुदवाने का जवाब नहीं दे पा रहे सचिव-रोजगार सहायक
पत्रिका ने सोनाटी के सचिव मोतीलाल यादव और रोजगार सहायक मुरलीधर अहिरवार से किसान को तालाब की राशि न मिलने पर खुदकुशी करने के आरोप पर बात की तो सचिव ने कहा कि किसान के बताए लोगों के खाते में रुपए डाले गए। जब उनसे पूछा गया कि तालाब मशीन से खुदवाया गया, जिसकी डेढ लाख की राशि के लिए मशीन संचालक किसान पर दवाब बना रहा था तो मजदूरों को भुगतान क्यों किया गया। इस पर सचिव ने कहा कि मजदूरों से तालाब खुदवाया गया और उन्होंने फोन रोजगार सहायक मुरलीधर अहिरवार को दे दिया। यही सवाल मुरलीधर से किया गया तो उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि तालाब मशीन से क्यों खुदवाया गया। न ही इस बात का जवाब दे पाए कि मशीन से तालाब खुदवाया गया तो मजदूरों के खाते में रुपए डलवाकर किसने निकाल लिए?

ये कहना है जिम्मेदारों का
मामले की शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संजय वेदिया, थाना प्रभारी
किसान मुन्नीलाल ने जिन लोगों के खाते में राशि डालने को कहा, उन सभी के खाते में राशि डाली गई थी। फरवरी में ही राशि का भुगतान कर दिया गया था।
मोतीलाल यादव, सचिव
खेत तालाब का निर्माण मजदूरों के जरिए करवाया गया था। खेत मालिक ने जिनके नाम बताए उनके ही खाते में राशि डाली गई थी।
मुरलीधर अहिरवार, रोजगार सहायक