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जलती झोपड़ी से मासूम बेटी को निकाल लाई मां, अब इलाज के लिए दर-दर भटक रहा परिवार

MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सरकारी व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर से खुल गई है।

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फोटो सोर्स- पत्रिका

MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां सरकारी तंत्र की बदहाली की ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई हैं। जो कि रोंगटे खड़े कर दे। चंदला विधानसभा क्षेत्र के गौरिहार थाना अंतर्गत ग्राम कितपुरा में एक मां ने अपनी जान की बाजी लगाकर अपनी 6 माह की बेटी अंजलि को आग की लपटों से बाहर निकाल लिया। घटना होली के दिन की है, जब घर के बाहर बनी घास-फूस की झोपड़ी में अचानक अज्ञात कारणों से आग लग गई।

बच्ची को बचाने के लिए आग में कूदी मां

मासूम बच्ची को आग के बीच फंसा देख 25 वर्षीय मां अशोका राजपूत बिना सोचे-समझे धधकती झोपड़ी में कूद गई और अपनी लाडली को बाहर खींच लाई। इस साहसिक प्रयास में मां झुलस गई और मासूम बच्ची गंभीर रूप से जल गई, लेकिन असली संघर्ष तो अस्पताल पहुंचने के बाद शुरू हुआ।

राज्य मंत्री के क्षेत्र की खुली पोल

इस घटना ने राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार के क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गंभीर रूप से झुलसी बच्ची को इलाज के लिए एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई। गौरिहार अस्पताल से बांदा और फिर वहां से छतरपुर जिला अस्पताल तक के सफर में परिवार को दो बार निजी वाहनों के लिए 2500-2500 रुपए खर्च करने पड़े, जिसके लिए उन्हें रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा। विडंबना देखिए कि आर्थिक तंगी के चलते परिवार बच्ची को कानपुर ले जाने की स्थिति में नहीं था, इसलिए हारकर उसे जिला अस्पताल छतरपुर लाया गया, लेकिन यहां भी राहत के बजाय केवल लापरवाही मिली।

दो दिन से बच्ची को देखने नहीं आए डॉक्टर

वर्तमान में बच्ची जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती है, जहां अव्यवस्थाओं का अंबार है। परिजनों का गंभीर आरोप है कि होली के अवकाश के दौरान दो दिनों तक कोई डॉक्टर बच्ची को देखने तक नहीं आया और पूरा वार्ड केवल नर्सों व वार्डबॉय के भरोसे चलता रहा। बच्ची की हालत नाजुक है, लेकिन अस्पताल में एसीबंद होने के कारण वह गर्मी और जलन से 24 घंटे तड़प रही है। परिवार का कहना है कि यहां केवल इंजेक्शन लगाकर खानापूर्ति की जा रही है और पट्टी तक नहीं बदली गई। अत्यंत गरीब यह परिवार अब शासन-प्रशासन और समाजसेवियों से मदद की गुहार लगा रहा है, क्योंकि उनके पास अब न तो इलाज के पैसे बचे हैं और न ही घर चलाने का कोई जरिया।