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छतरपुर

10 साल से शहर में नहीं नगर पालिका का विश्राम गृह

कॉम्पलेक्स बनाने तोड दी सराय, दोबारा नहीं हो सका निर्माणसुरक्षित व किफायती विश्राम गृह की नहीं मिल पा रही सुविधा

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छतरपुर. बाहर से आने वाले लोगों को ठहरने के लिए सुरक्षित व किफायती व्यवस्था बनाने के लिए नगरपालिका सराय सभी जिला मुख्यालयों पर संचालित है। लेकिन छतरपुर आने वाले यात्रियों को ये सुविधा 10 साल से नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि बस स्टैंड के पास नगरपालिका की सराय कॉम्पलेक्स बनाने के लिए तोड़ दी गई। लेकिन कॉम्पलेक्स का निर्माण नहीं हो सका। कानूनी अड़चनों एवं तकनीकी समस्याओं के करीब 10 साल से चलते अधूरे पड़े इस निर्माण कार्य को नए सिरे से किए जाने के निर्देश अप्रेल 2021 में जारी हुए। लेकिन नगरीय निकाय की चुनाव की आचार संहिता के चलते कॉम्पलेक्स निर्माण की फाइल एक बार फिर अटक गई है। जो दोबारा आगे नहीं बढ़ी है।

विधानसभा में भी उठा प्रश्न
मार्च 2022 में छतरपुर विधायक आलोक चतुर्वेदी के द्वारा विधानसभा में इस अधूरे निर्माण कार्य के संबंध में प्रश्न उठाया गया था, जिसके बाद नगरीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने नगर पालिका छतरपुर को निर्देशित किया है कि इस कॉम्पलेक्स का निर्माण नए सिरे से किया जाए। इस निर्माण कार्य अधूरे पड़े होने के कारण एक ओर जहां पुरानी सरायं के तोड़े जाने से बेघर हुए 23 दुकानदार ठोकरें खा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ शहर में सराय का अभाव भी है।

नए सिरे से बनना है प्रस्ताव
नगर पालिका अब बस स्टैंड के इस सराय क्षेत्र पर कॉम्पलेक्स निर्माण के लिए एक नया नक्शा एवं नया प्रस्ताव लाएगी। इस नक्शे को नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद एनएच की अनुमति दिलाई जाएगी। उसके बाद नए सिरे से निर्माण का टेंडर जारी होगा और फिर इस कॉम्पलेक्स का निर्माण हो सकेगा। लेकिन अब ये सभी प्रक्रियाएं नहीं हो पा रही हैं।

बार-बार अटक जा रही कवायद
नगर पालिका के द्वारा वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह निर्माण कार्य बार बार अटक जा रहा है। नगर पालिका ने इस निर्माण कार्य को बगैर सक्षम अनुमतियों के टेंडर जारी कर शुरू कराया था जिसके चलते शिकायतकर्ताओं ने इस निर्माण कार्य को बंद करा दिया। जब यह निर्माण कार्य 2013 में बंद हुआ तब तक प्लॉट क्षेत्र में लेंटर डाला जा चुका था जिस पर लाखों रूपए खर्च हुए थे। इतना ही नहीं यहां मौजूद 23 पुरानी दुकानों को तोड़ दिया गया था। ये दुकानदार तब से अब तक अपने लिए नई दुकान नहीं हासिल कर पाए हैं। इन दुकानदारों के द्वारा इसी जमीन पर टीन के डिब्बे रखकर व्यवसाय किया जा रहा है जिससे उनके परिवार भी बुरी तरह प्रभावित हुए। दुकानदारों ने जब इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठाया तो कोर्ट ने भी वर्ष 2017 में नगर पालिका को निर्देशित किया था कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर दुकानदारों को दुकानें उपलब्ध कराई जाएं लेकिन यह निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हो सका।