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नौगांव यात्री प्रतीक्षालय में कंबल में लिपटी मिली नवजात बच्ची

दोपहर 2 बजे कोने में बच्ची की रोने की आवाज सुनकर लोगों ने पहुंचाया अस्पताल

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दोपहर 2 बजे कोने में बच्ची की रोने की आवाज सुनकर लोगों ने पहुंचाया अस्पताल

दोपहर 2 बजे कोने में बच्ची की रोने की आवाज सुनकर लोगों ने पहुंचाया अस्पताल

नौगांव। शनिवार की दोपहर 2 बजे नौगांव बस स्टैंड के यात्री प्रतिक्षालय में नवजात बच्ची मिली है। कंबल में लिपटी बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने प्रतिक्षालय के कोने में पड़ी बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र नौगांव पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने चेकअप के बाद बच्ची को स्वस्थ बताया है। डॉक्टर आयुषी खरे ने बताया कि 8 घंटे पहले ही बच्ची का जन्म हुआ है। फिलहाल उसे इलाज व देखरेख के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।

नौगांव बस स्टैंड पर मौजूद दिनेश सेन ने बताया कि दोपहर 2 बजे कंबल के अंदर से बच्ची की रोने की लगातार आवाज आ रही थी। आसपास के लोगों से पूछा, लेकिन किसी ने भी बच्ची पर अपना अधिकार नहीं जताया। दिनेश सेन व अतुल सेन बस स्टैंड स्थित पुलिस चौकी पर पहुंचे, जंहा पर मौजूद डायल 100 कर्मियों की मदद से नवजात बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पहुंचाया गया। जंहा पर ड्यूटी पर तैनात डाकटर आयुषी खरे द्वारा बच्ची का स्वास्थ परीक्षण किया गया और डाक्टर आयुषी खरे ने बताया की बच्ची का जन्म सुबह 6 बजे के लगभग हुआ है और बच्ची स्वस्थ है। इसके बाद बच्ची को पुलिस अभिरक्षा में जिला अस्पताल के लिए भेजा गया।

अगस्त में भी मिली थी बच्ची
लगभग तीन माह पूर्व भी इसी यात्री प्रतीक्षालय में एक थेले के अंदर कोई नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया था। जिसका अभी तक कोई भी पता नहीं लगा। बस स्टैड नगर के सबसे ज्यादा भीडभाड वाले इलाके में आता है। रोजाना सुबह 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक स्थानीय लोगों के अलावा हजारों की संख्या में यात्री गुजरते हैं । इसके बाद भी यंहा पर नजर बचा कर नवजात बच्चियों को लोग छोड़ जाने में कामयाब हो जाते है।

सीसीटीवी कैमरे बने शोपीस
लगभग तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन थाना प्रभारी शिवप्रताप सिंह बघेल ने अपराधों पर नकेल कसने के उद्देस से नगर के बस स्टैंड सहित और कई स्थानों सीसीटीवी कैमरे लगवाये थे, जिनसे नगर में होने बाले अपराधों की संख्याओं में भी कमी आई थी और अपराधियों में एक दहशत का माहोल था लेकिन लगभग पिछले एक वर्ष से कोठी चौराह सहित बस स्टेंड के कैमरे और उसका सिस्टम धूल और जाले से ढके हुए पड़े है। कैमरे काम नहीं करने से नवजात बच्चियों को छोडऩे वाले पकड़ में नहीं आ रहे हैं।