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न पर्याप्त मजदूर. न साफ-सफाई, गौशाला की संपत्ति जानकर रह जाएंगे हैरान

156 गायों की देखभाल का जिम्मा केवल एक मजदूर परिवार के भरोसे

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No laborer cleaning gaushaala properties worth crores rupees

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छतरपुर। जिले की गौशालाएं सरकारी अनुदान तो ले रही हैं, लेकिन उनमें गौवंश के संरक्षण-संवर्धन के लिए जमीनी स्तर पर कोई प्रयास नहीं होते नहीं दिख रहे हैं। जिले में कुछ गौशाला भले ही अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन उनकी आड़ में कुछ गौशालाएं केवल फायदे का सौदा बनकर रह गई हैं। शहर से सटे ग्राम राधेपुर की गौशाला जिले की सबसे धनाढ्य गौशाला है, लेकिन यहां पर गौवंश की सेवा के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। रिकॉर्ड में भले ही गायों को चारा-पानी, सानी के लिए राशि खर्च करना दर्शायी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
राधेपुर गौ शाला में 156 गाय को सेवा के लिए रखा गया है। जिनकी देखभाल का जिम्मा एक मजदूर परिवार पर है। पिता-पुत्र और उस परिवार की महिला के भरोस इन गौवंश की सुरक्षा, सेवा और भोजन-पानी के इंतजाम का जिम्मा है। लेकिन इन्हें संसाधनों के नाम पर कुछ भी नहीं दिया गया है। गौशाला की हालत ऐसी है कि परिसर की सफाई के लिए एक झाडूू भी नहीं है। टूटी झाडू को मिलाकर एक जुगाड़ की झाडू मजदूर परिवार ने बना रखी है, जिससे वह सफाई कर लेता है। गोबर उठाने के लिए टूटी हुई जुगाड़ की ट्राली भी उन्होंने बना रखी है। पंखे यहां महीनों से खराब है। गौवंश के लिए हर दिन बनने वाली सानी के लिए प्रतिदिन २५ किग्रा आटा की जरूरत होती है, लेकिन यहां महीनेभर के लिए ही प्रबंधन २५ किग्रा आटा उपलब्ध करा रहा है। गौशाला में रात के समय ड्यूटी करने के लिए एक व्यक्ति की ड्यूटी लगाई गई है, जो रात में पहुंचकर दूध पीने मांगते हैं और सुबह अपने काम पर निकल जाते हैं। उन्हें गौशाला के प्रबंधन और समस्याओं से कोई मतलब नहीं रह गया है।
अरबों की संपत्ति वाली है राधेपुर गौशाला :
जिस गौशाला के पास अरबों रुपए की बेशकीमती संपत्ति है, उसे भी सरकारी अनुदान लगातार मिलता चला आ रहा है। लेकिन इसके बाद भी वहां पर गौ संवर्धन और संरक्षण के लिए कोई काम नहीं हो रहा है। केवल एक मजदूर परिवार के भरोस गौवंश को रखा गया है। श्री गोपाल कृषि गौरक्षणी लोकन्याय राधेपुर गौशाला की छतरपुर शहर के मुख्य बाजार में करीब 55 दुकानें हैं। कई वर्गफुट में संचालित स्कूल और धर्मशाला है। वहीं शहर से सटे ग्राम राधेपुर में 74 एकड़ जमीन भी इस गौशाला के पास है। लेकिन गौशाला में एक अदद झाड़ू तक उपलब्ध नहीं है। गौवंश के उसके हिस्से की खराक भी नहीं मिल रही है। जबकि गाय के रखरखाव के लिए इस गौशाला को शासन से अनुदान मिलता चला आ रहा है। अकूत संपत्ति वाली इस गौशाला में निर्माण कार्य के लिए सरकार के विभिन्न मद से करीब 50 लाख रुपए भी यहां खर्च हुए हैं, लेकिन यहां पंखे खराब पड़े हैं। कर्मचारी ने बताया कि गौशाला के पदाधिकारी महीनों यहां नहीं पहुंचते।
छतरपुर जिले में 12 गौशालाओं को सवा करोड़ अनुदान
छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र विधायक विक्रमसिंह के प्रश्न पर सरकार ने सरकारी अनुदान के आंकड़े प्रस्तुत किए। जो दर्शाते हैं कि गौशालाओ की जांच हो तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। विधानसभा पटल पर रखी जानकारी अनुसार वर्ष 2010-11 से 2015-16 के बीच छह साल में छतरपुर जिले की 12 गौशालाओं को 1 करोड़ 3 लाख 55 हजार 717 रुपए आंबटित किए गए हैं। यह राशि गाय के रखरखाव यानि उसके भूसे इत्यादि पर खर्च होनी चाहिए। इसके अलावा वर्ष 2011-12 में तीन गौशलाओ में निर्माण कार्य के लिए 9 लाख रुपए का अनुदान दिया गया। राधेपुर गौशाला में अंधोसरचना निर्माण पर अलग से सरकार ने मेहरबानी दिखाते हुये वर्ष 2015-16 में 10 लाख रुपए का अनुदान दिया। कामधेनु भारती गौशाला बिजावर को 434477, बुंदेलखंड गौशाला नौगांव को 1408372, श्रीकृष्ण गौशाला कुकरेल हरपालपुर को 273264, रामकृष्ण गौशाला बम्हौरी बकस्वाहा को 410440, अंहिसा गौशाला ग्राम हमा छतरपुर को 180446, नंदनी गौशाला गुलाट बिजावर को 691891, राधेपुर गौशाला को 505888 और धंधागिरी गौशाला बारीगढ़ को 464209 रुपए अनुदान प्राप्त हुआ। इसी तरह साध्वी ऋतंभरा द्धारा लवकुशनगर के सिजई में संचालित स्वामी परमानंद गौशाला को छह साल में 3856817, कन्हैया ग्वाडा गौशाला कटिया लवकुशनगर को 1377369, धनुषधारी गौसेवा समिति बंधीकला छतरपुर को 629815 व दयोदय गौसंवर्धन संस्थान सरानी को 122801 रुपए आंबटित किया।
2017-18 के लिए इन गौशालाओं को मिला अनुदान :
पशु चिकित्सा विभाग ने जिले की क्रियाशील गौशालाओं को वर्ष 2017-18 के लिए चारा, भूसा एवं पानी के लिए अनुदान राशि के चेक दिए गए है। बंधीकला की धनुषधारी गौसेवा समिति को 54 हजार 988 रूपए, सरानी की दयोदय गौसंवर्धन एवं पर्यावरण संस्थान को 1 लाख 36 हजार 160 रूपए, सिजई की स्वामी परमानंद गौधाम गौशाला को 2 लाख 73 हजार 193 रूपए, पड़रिया की गोरेलालजी कुंज गौसेवा संस्थान समिति को 84 हजार 664 रूपए, गुलाट की नंदनी गौशाला को 75 हजार 935 रुपए एवं नौरा पहाड़ी की बुंदेलखंड गौशाला समिति को 4 लाख 73 हजार 68 रूपए की अनुदान राशि जारी की गई है।
गौशालाओं के नाम पर कई जगह चल रहा खेल :
सरकारी अनुदान से छतरपुर जिले में 12 गौशालाएं संचालित हो रही है। ग्राम सिजई, बंधीकला, सरानी में संचालित गौशालाएं कुछ हद अपनी जिम्मेदारियों को निभा रही हंै। जबकि कई गौशालाएं बिना गायों के ही चल रही हैं। अक्रियाशील गौशालाओं का रिकॉर्ड में संचालन हो रहा है। आरोप है बिजावर में संचालित एक गौशाला एक कमरे में ही चल रही है। वही इसी क्षेत्र के गुलाट में संचालित एक गौशाला पर तो गाय के नाम पर बडा घोटाला करने के आरोप है। सरकारी जमीन पर कब्जा कर संचालित इस गौशाला में अधिकतम 30 -40 गाय रखने की क्षमता है पर इसमें 192 गाय होने का दावा करते हुए सरकारी अनुदान प्राप्त किया जाता है। कुकरेल में संचालित गौशाला लोगों को खोजने से भी नहीं मिलेगी। यही हाल धंधागिरी गौशाला बारीगढ़ का है।
बड़ी से लेकर छोटी मछलियां तक शामिल :
मप्र गौसंवर्धन बोर्ड द्धारा अनुदान प्राप्त गौशालाओं में राशि आंबटित करने के लिए बकायदा हर जिले में गौपालन समिति बनी हुई है। समिति का अध्यक्ष जिला कलेक्टर और सचिव पशुपालन विभाग का डिप्टी डायरेक्टर होता है। हर तहसील स्तर पर तैनात पशु चिकित्सक द्धारा गौशलाओं में गाय की गिनती की जाती है। जिस आधार पर सरकारी अनुदान राशि का आंबटन होता है। छोटे स्तर से ही भ्रष्टाचार का पनपना शुरू हो जाता है। पशु चिकित्सकों पर आरोप लगते है कि वे गौशालाओं को अधिक अनुदान दिलाने के लिए गायों की संख्या के फर्जीआंकड़े लेख कर देते है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मिलने वाली राशि का बंदरबाट हो जाता है। गौशलाओं में गाय की अमानत में ख्यानत के आरोप इसलिए भी सही साबित होते है क्योंकि तीन साल पहले नंवबर माह में बोर्ड के तत्कालीन उपाध्यक्ष संतोष जोशी ने सागर संभाग में सरकारी अनुदान वाली गौशालाओ का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्हें कई गौशालाओं में अनिमियत्ता मिली थ्री। उन्होंने 11 गौशालाओं के पंजीयन निरस्त कर वसूली के निर्देश दिए थे। लेकिन बाद में यह पूरा मामला दबा दिया गया।

इनका कहना है :
राधेपुर गौशाला में १५६ गौवंश की देखरेख के लिए 3 कर्मचारी तैनात करके रखे गए हैं। गौशाला के प्रबंधक भी वहीं पर रहते हैं। गौशाला में सभी तरह के संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं। 10 क्विंटल जबा भी रखे हैं, जिसका आटा पिसवाकर गौवंश को खिलाने की जिम्मेदारी कर्मचारियों की ही है। 8 दिन पहले ही मैं वहां गया था, सभी व्यवस्थाएं ठीक चल रही है।
- अरुण कुमार चौरसिया, सचिव श्रीगोपाल कृषि गौरक्षिणी लोक न्यास