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छतरपुर

जिले के बड़े सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग नहीं, जिला अस्पताल भवन में सिस्टम बंद पड़ा

- शहर में 50 हजार घर, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कोई हिसाब नहीं

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छतरपुर. जिला मुख्यालय पर पीडब्लूडी विभाग की पीआइयू शाखा द्वारा बनाए गए नए सरकारी भवनों में से एक में भी वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है। इस कारण बारिश के दौरान निकलने वाला लाखों गैलन पानी नालियों से होकर बह कर बर्बाद हो जाता है। घोर लापरवाही के चलते जल संरक्षण का संकल्प केवल मजाक बनकर रह गया है। प्रत्येक बारिश में यह पानी यूंही बरबाद होता रहा तो आने वाले दिनों में शहर के अंदर और भी अधिक पेयजल संकट गहरा जाएगा। शहर के समाजसेवी हर बार बारिश के पानी को संजोने और सहेजने के लिए मुहिम चलाते हैं, पर यहां के आला अधिकारियों को इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता। इस कारण शहर के सरकारी भवनों से बारिश के दौरान निकलने वाला पानी नालों से होकर शहर के बाहर निकल जाता है और हर बार गर्मियों के मौसम में शहर के अंदर जल संकट गहराता जाता है। जिसका असर इस साल अभी से दिखाई देने लगा है।

जिला मुख्यालय पर भी नहीं दे रहे ध्यान
जून में मानसून दस्तक देने की उम्मीद है। इस बार भी बारिश के पानी को सहने के ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। नगर पालिका के रिकॉर्ड में शहर में करीब 50 हजार घर है, लेकिन उसके पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि कितने घरों में वॉटर हार्वेस्टिंग है। इससे अंबजा लगाया जा सकता है कि नगर पालिका इस सिस्टम को लेकर कितनी गंभीर है। केंद्रीय भूजल आयोग के आंकड़ों के अनुसार हर साल की औसतान बारिश का आधा हिस्सा ही लोग उपयोग कर पाते हैं। जिले के छोटे-बड़े तालाबों को लबालब भरने वाला बारिश का पानी फिजूल ही बह जाता है। इसको जमीन में आसानी से पहुंचाया जा सकता है, लेकिन ग्राउंड वॉटर सोर्स सिस्टम कमजोर होने के कारण मार्च से मई तक भूजल की स्थिति खराब हो जाती है। इसकी पीछे की असल बजह पक्के निर्माण और सीमेंट की सड़कों का निर्माण है। शहर में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने को लेकर आधे लोग में जागरुक नहीं हैं।

जिला अस्पताल की छत का बेकार बहता है पानी
जिला अस्पताल 14 हजार वर्गफीट में फैला है। यह पांच मंजिल भवन सेंट्रलाइज एसी सिस्टम बनाया गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैस है, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खराब पड़ा है। इस कारण बारिश के दौरान छत से आने वाला पानी परिसर से होते हुए बाहर निकल जाता है। कलेक्ट्रेट के सामने पार्क में भी सिस्टम लगाया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में बंद पड़ा है। वहीं यातायात थाना भवन, रजिस्ट्रार कार्यालय, नए तहसील भवन सहित कई सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है।


558 पंचायतों सहित नगर पालिका भवनों में भी नहीं वॉटर हार्वेस्टिंग
गिरते जल स्तर के कई कारण है, लेकिन प्रमुख कारण शहर में कई स्थानों पर हुई बोरिंग है। जिले में पिछले 15 सालों में शहर के अंदर बड़ी मात्रा में बोर कराए गए। यह भूमिगत जल स्तर के लिए घातक साबित हो रहे हैं। वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर भी शासन-प्रशासन द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जिले की 558 ग्राम पंचायतों, 12 नगर परिषद और 3 नगर पालिका परिषद में से किसी भी निकाय द्वारा पानी संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगवाए गए हैं।

नगर पालिका कॉम्पलेक्स बहा रहे हजारों गैलन पानी
जिला मुख्यालय पर बने नगर पालिका भवन सहित नपा द्वारा बनवाए गए कॉम्पलेक्सों में भी कहीं पानी संरक्षण के कोई इंतजाम नहीं हैं। शहर के अंदर नगर पालिका द्वारा जवाहर रोड पर सांतरी तलैया के पास, किशोर सागर तालाब के पास 2 और ऑडिटोरियम भवन के पास एक कॉम्पलेक्स बनाया गया है। इसके साथ ही महोबा रोड, बस स्टैंड एक और दो, पुराना पन्ना नाका, छत्रसल चौराहा, सटई रोड, पुरानी गल्ला मंडी सहित करीब 25 कॉम्पलेक्स बनाए गए हैं। इन सभी कॉम्पलेक्स की सैकड़ों दुकानों से नगर पालिका छतरपुर को लाखों रुपए की प्रतिमाह आमदनी होती है। पर विभाग द्वारा इनमें हार्वेस्टिंग सिस्टम फिट नहीं कराए गए हैं।

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