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पोषण पुनर्वास केन्द्र छतरपुर बना वरदान, चार महीने में 240 बच्चे कुपोषण से हुए मुक्त

छतरपुर समेत तीन जिलों के बच्चों को जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केन्द्र में मिल रहा सहारा

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जिला अस्पताल में संचालित एनआरसी

जिला अस्पताल में संचालित एनआरसी

छतरपुर. गर्भावस्था के दौरान माताओं को बेहतर खानपान की कमी और खून की रिक्तता के चलते बुन्देलखण्ड में बच्चों के कुपोषण के सर्वाधिक मामले सामने आते हैं। नीति आयोग के आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बाद जिले में चलाए जा रहे अभियान का लाभ मिलने लगा है। वहीं, छतरपुर समेत बुदंलेखंड के कई जिलों के लिए छतरपुर जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) वरदान साबित हो रहा है। पिछले चार माह में २४० बच्चे कुपोषण के खिलाफ जंग जीतकर स्वस्थ हुए हैं।

लंबाई, चौड़ाई और वजन के आधार पर सामने आती हैं स्थिति
आकांक्षी जिलों में शामिल छतरपुर में सी-सेम कार्यक्रम चल रहा हैं। जिसके तहत शून्य से पांच वर्ष के बच्चों का लंबाई, चौड़ाई और वजन के आधार पर स्तर पर तय किया जाता हैं। सी-सेम के तहत पहले बच्चों के भूख की जांच की होती हैं। इसके बाद अन्य मेडिकल जांचें होती हैं। तीन में से एक जांच में भी फेल होने पर उसे अति कुपोषित की श्रेणी में रखा जाता हैं और सीधे एनआरसी रेफर किया जाता हैं।

स्टाफ की मेहनत ला रही रंग
जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में न केवल छतरपुर जिले के बल्कि टीकमगढ़, महोबा, हमीरपुर जिले तक से कुपोषित बच्चे आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश कुपोषण की जंग जीतकर जाते हैं। यह इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि यहां पदस्थ स्टाफ अथक मेहनत कर रहा है। डॉ. मधुरम त्रिपाठी बताते हैं कि 14 दिन तक कुपोषित बच्चों को केंद्र में रखा जाता है। इनके साथ उनकी मां भी रहती हैं। इन 14 दिनों तक शासन द्वारा तय डाइट दी जाती है और 24 घंटे में एकबार वजन लिया जाता है। प्रत्येक बच्चे की प्रतिदिन डाइट के लिए 120 रुपए शासन देता है।

जिले में चलाया जा रहा विशेष अभियान
कलक्टर संदीप जीआर के निर्देशन में छतरपुर जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए पोषण अभियान चलाया जा रहा। इसके तहत जिले में अति गंभीर कुपोषित और कुपोषित बच्चों का 12 हफ्ते तक विशेष प्रोटोकॉल के तहत देखभाल की जाती है। जिसके तहत हर हफ्ते मैदानी टीम द्वारा उनके घरों पर विजिट करते हुए शुरुआत के दिनों में 5 दिनों की दवा देकर अतिरिक्त पोषण आहार दिया जाता है और माता पिता को समझाइश दी जाती है। जिले में पिछले 3 माह के भीतर 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे कुपोषण से बाहर आ चुके हैं।


इनका कहना है
अप्रेल से अगस्त के बीच एनआरसी से 240 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। कुपोषण से बचने के लिए पोषण आहार पर ध्यान देने की बहुत जरूरत होती है।
डॉ. मधुरम त्रिपाठी, प्रभारी, एनआरसी