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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में 861 में से सिर्फ 158 पात्र घोषित, बाकी दस्तावेजों की जटिलता में अटके

703 आवेदन जांच में अटके हैं। इनमें अधिकांश वे परिवार हैं जो वर्षों से अपने पैतृक मकानों में रह रहे हैं, जिनके घरों पर नगर पालिका पानी-बिजली का टैक्स वसूल रही है और यहां तक कि भवन प्रमाण-पत्र भी जारी कर चुकी है।

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नौगांव नगरपालिका

नगर पालिका नौगांव क्षेत्र में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना (पीएमएवाई) 2.0 के तहत आवेदन की प्रक्रिया तो तेज़ी से चली, लेकिन पात्रता निर्धारण में अड़चनें इतनी बढ़ गईं कि सैकड़ों परिवार अब भी मकान की आस लगाए बैठे हैं। ऑनलाइन आए 861 आवेदनों में से केवल 158 को ही पात्र माना गया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जिनके पास पक्के दस्तावेज, रजिस्ट्री, स्थायी पट्टा या भू-अधिकार पत्र मौजूद हैं। लेकिन इन पात्र आवेदकों को भी अब तक योजना की राशि नहीं मिल सकी है। बाकी 703 आवेदन जांच में अटके हैं। इनमें अधिकांश वे परिवार हैं जो वर्षों से अपने पैतृक मकानों में रह रहे हैं, जिनके घरों पर नगर पालिका पानी-बिजली का टैक्स वसूल रही है और यहां तक कि भवन प्रमाण-पत्र भी जारी कर चुकी है।

नगर पालिका मान रही, प्रशासन नहीं

योजना की गाइडलाइन कहती है कि लाभ केवल उन्हें मिलेगा जिनके पास राजस्व विभाग से मान्य दस्तावेज हों। लेकिन नौगांव नगर पालिका के रिकॉर्ड में इन मकानों का पंजीकरण पहले से है। यहां तक कि भवन प्रमाण-पत्र के आधार पर उपपंजीयक कार्यालय रजिस्ट्री भी कर रहा है, मगर प्रशासन इन्हीं प्रमाण-पत्रों को योजना में मान्यता देने से इंकार कर रहा है। यही कारण है कि गफूर वस्ती, नीमन मोहल्ला, ढीमर मोहल्ला, कसाई मंडी, मुसाफिर खाना और कोठी चौराहा जैसे इलाकों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

बारिश में जर्जर मकान, लेकिन लाभ से वंचित

इन बस्तियों के निवासियों का कहना है कि उनके घर कच्चे और जर्जर हालत में हैं। बारिश के दिनों में तो कई मकान रहने लायक तक नहीं बचे, लेकिन अधिकारी सिर्फ नियमों का हवाला देकर आवेदन खारिज कर रहे हैं। स्थानीय परिवारों ने सवाल उठाया है कि जब नगर पालिका से भवन प्रमाण-पत्र, टैक्स रसीद और कनेक्शन तक मिल रहे हैं, तो फिर आवास योजना में इन्हें मान्यता क्यों नहीं दी जा रही?

खसरे में सरकारी दर्ज भूमि होने से रुकावट आई

दरअसल, शहर का बड़ा हिस्सा आबादी भूमि और पुराने बंगला क्षेत्र में आता है। राजस्व रिकॉर्ड (खसरा) में यह भूमि सरकारी दर्ज है। इसलिए नामांतरण संभव नहीं है। पहले नजूल तहसीलदार नामांतरण करते थे, लेकिन अब वह व्यवस्था खत्म हो गई। नतीजतन न तो राजस्व रिकॉर्ड अपडेट हो पा रहा है, न ही पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिल रहा है।शासन के सामने उठाया मुद्दानौगांव नपा के आवास योजना सहायक प्रभारी मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि इस समस्या को शासन के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उठाया गया है। शासन से आश्वासन मिला है कि पैतृक रूप से रह रहे लेकिन दस्तावेजहीन हितग्राहियों पर विचार किया जा रहा है। अभी किसी आवेदन को निरस्त नहीं किया गया है। नई गाइडलाइन आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ये कह रहे जिम्मेदार

पीयूष दीक्षित तहसीलदार नौगांव का कहना है यदि आबादी भूमि राजस्व रिकॉर्ड खसरे में सरकारी दर्ज है तो वहां निजी व्यक्ति का नामांतरण नहीं हो सकता। हां, वे रजिस्ट्री करा सकते हैं। नगर पालिका का भवन प्रमाण-पत्र मान्य है या नहीं, इसे लेकर वरिष्ठ कार्यालय से मार्गदर्शन लेंगे। वहीं, आरएस अवस्थी सीएमओ नगर पालिका नौगांव का कहना है यदि राजस्व अधिकारी नपा के प्रमाण-पत्र को मान्य कर दें तो हमें लाभ देने में दिक्कत नहीं होगी। अंतिम स्वीकृति पत्र पर राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं। या फिर हितग्राही पैतृक भूमि का वैध दस्तावेज लाएं। शासन से मार्गदर्शन मांगा है।

बड़ा सवाल: समाधान कब मिलेगा?

-क्या शासन गाइडलाइन में लचीलापन दिखाकर पैतृक मकानों को मान्यता देगा?- क्या आबादी भूमि और बंगला क्षेत्र में रहने वाले लोग फिर से सरकारी उदासीनता के शिकार बनेंगे?

- और क्या योजना की मंशा—हर गरीब को पक्का घर सिर्फ दस्तावेज़ी औपचारिकता बनकर रह जाएगी?