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पत्रिका टॉक शो: पंच तत्वों से बने शरीर का इलाज भी पंच तत्वों में समाहित

गांधी आश्रम की सुहानी सुबह में मिला प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए निरोगी रहने का मंत्र

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गांधी आश्रम के प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के साथ टॉक शो में शामिल हुए लोग   

गांधी आश्रम के प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के साथ टॉक शो में शामिल हुए लोग 


छतरपुर. बुधवार की सुबह गुनगुनी धूप के बीच गांधी आश्रम के मनोहारी वातावरण में मध्य प्रदेश गांधी स्मारक निधि द्वारा संचालित बा बापू निसर्गोउपचार केंद्र में प्राकृतिक चिकित्सा पर टॉक शो आयोजित किया गया। टॉक शो में प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए शरीर को स्वास्थ रखने का मूलमंत्र मिला। इसके साथ प्रकृति का स्वस्थ जीवन में महत्व भी जाना। शरीर के पंच तत्व व खानपान का स्वस्थ जीवन में रहस्य भी जाना।

टॉक शो की शुरुआत में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के डॉ. आरपी प्रजापति ने हमारा शरीर पांच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश से मिलकर बना है। हमारे शरीर में कोई भी एक तत्व का संतुलन बिगडऩे से शरीर रोगी हो जाता है। शरीर में असंतुलित हुए तत्व से ही थैरपी के जरिए इलाज किया जाता है। वर्तमान अनियमित दिनचर्या व खानपान से शरीर रोगी हो रहा है। प्राकृतिक तत्वों के जरिए ट्रीटमेंट करना ही प्राकृतिक चिकित्सा है। डॉक्टर प्रजापति ने प्रकृति की रसोई, खानपान, जल आहार, फल आहार, उपवास के महत्व के बारे में बताया।

गांधी स्मारक निधि की सचिव दमयंती पानी ने कहा कि आमतौर पर हमारा शरीर 20 साल की उम्र तक स्वस्थ रहता है। उसके बाद शरीर रुपी गाड़ी की मरम्मत की जरूरत होती है। हमारा शरीर वायु, कफ, पित्त प्रकृति का होता है। ये तीनों में असंतुलन होने पर शरीर में कष्ट शुरु हो जाता है। हम दवाइयों के जरिए कष्ट को दबाते हैं। जबकि हमें प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए शरीर ग्रीसिंग व ऑयलिंग करानी चाहिए ताकि हम स्वस्थ व निरोगी रह सकें। प्राकृतिक चिकित्सा का संदेश ही हर व्यक्ति व परिवार को स्वस्थ रहने का तरीका सिखाना और जागरुक करना है।


रामकृपाल पटेल ने खानपान की दिनचर्या को लेकर सवाल पूछा। खानपान की दिनचर्या के बारे में डॉक्टर ने कहा कि शाम का खाना हल्का व रसयुक्त होना चाहिए। जिससे कब्ज आदि की समस्या न हो। शाम का भोजन 6 से 7 बजे के बीच, दिन का भोजन 12 से 1 बजे और सुबह का नाश्ता 7 से 8 बजे के बीच लेना चाहिए। नाश्ता हल्का या हैवी होना, शरीर व उम्र के अनुसार उचित होगा। वीरेन्द्र साहू ने प्राकृतिक चिकित्सा के संबंध में अपने अनुभव को साझा किया। जिसमें उन्होंने बताया कि श्वांस लेने में परेशानी हो रही थी। केवल तीन दिन मिट्टी लेप की थैरपी करने से अब आराम है। डॉ. प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की पट्टी का लेप करने से कब्ज, लीवर संबंधी बीमारियों में राहत मिलती है।


वीरेन्द्र साहू ने चिकित्सक से पूछा कि चाय का सेवन के बारे में प्राकृतिक चिकित्सा क्या कहती है। जिस पर डॉ. प्रजापति ने कहा कि चाय हमारे देश का पेय नहीं है। लेकिन अब हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। जबकि चाय नुकसानदायक है। यदि किसी को भूख लगी हो तो चाय पीने से भूख मर जाती है। विनीत अग्रवाल ने चाय बनाने की विधि के बारे में सवाल किया। जिस पर डॉक्टर प्रजापति ने बताया कि चाय पीना प्राकृतिक चिकित्सा में मना है। लेकिन चाय पी रहे हैं, तो उसे बनाने की विधि संशोधित करनी चाहिए। अर्जुन की चाय बेहतर विकल्प हो सकता है। निशा सिंह ने कहा कि चाय बनाने का अंग्रेजो का जो तरीका था, उसे हमने अपनाया नहीं है। चाय हमने अपना ली, लेकिन उसके तरीके को बदल दिया। शंकर खरे ने सुबह उठकर शौच क्रिया से पहले गुनगुना पानी पीने के महत्व के बारे में कविता सुनाकर सार्थक संदेश दिया।

इस अवसर पर गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद आर्य, सचिव दमयंती पाणी, पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी हीरालाल कुशवाहा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संघ के शंकर सोनी, प्रोफेसर सुमीत जैन, गोलू मिशा, कवि अवनींद्र खरे, निशा सिंह, जगदीश अग्रवाल, शंकर खरे, रामकृपाल पटेल, संतोष गुप्ता, वीरेन्द्र साहू आदि लोग मौजूद रहे।