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बारिश में पन्नी तानकर रहने को मजबूर आदिवासी परिवार

खोखले दावों की बोलती तस्वीर

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Rain tribal family worried

Rain tribal family worried

नौगांव। केंद्र सरकार द्वारा देश में गरीबों को लाभ के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे गरीबों को विभिन्न योजनाओं का नि:शुल्क लाभ मिल सके और वह सही तरीके से अपना जीवन यापन कर सके लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो के निजी स्वार्थ के चलते यह योजनाए केवल अमीरों तक सिमट कर रह गई हैं। जिसका जीता जागता उदहारण जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत धरमपुरा में देखने को मिला। जहां 16 आदिवासी परिवार के लगभग एक सैंकड़ा लोग शासन की योजनाओं से वंचित हैं। यह आदिवासी परिवार यहां कई वर्षों से झोपड़ों में रहकर अपनी जिंदगी बदहाली में जीने को मजबूर है। यह लोग झाड़ू बनाकर व बच्चे कबाड़ बीनकर महिलांए भीख मांगकर अपना व अपने बच्चों का भरण पोषण करते हैं। लेकिन शासन की अन्य मूलभूत सुविधा, आवास, शौचालय एवं पीने का पानी ना होने से यह लोग अपना जीवन इस तरह से जीने को मजबूर हैं। आदिवासी जवाहर, रवि, अर्जुन, जोधा, मूरती, करन, कपूरी, जुगराज, रितु, बलराम, ममता, ज्वाला, दीपचंद, पार्वती, रुक्मणि, रागनी, सुनीता, राजू, चंद्रकली, भूरा, बच्चा, शांति, अशोक, चंदन, कमलेश, गोरा, द्रोपती, प्रताप रामेश्वर, सरोज ने बताया की हमारे पास मकान ना होने से हम लोग झोपड़ों में पन्नी के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं। जहां आए दिन सांप, गोहरा, बिच्छू निकलने से हम लोग दहशत में रहते हैं। शौचालय ना होने से हमारी बहू-बेटियां खुले में शोंच जाने के लिए मजबूर हैं। मजदूरी कार्ड ना बने होने के कारण से महिलाओं की डिलेवरी होने पर शासन की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। पीने के पानी के लिए कुछ ही दूरी पर स्कूल के पास लगे हंैडपंप पर जाते हैं। जहां से हम लोंगो को भगा दिया जाता है।
इनका कहना है
शौचालय का निर्माण 2011 के सर्वे के हिसाब से चल रहे हैं। हितग्राहियों की जमीन ना हने के कारण से आवास की सुविधा नहीं मिल सकती।
हरीश केशरवानी, जनपद सीईओ नौगांव
इनका कहना
मैं कल ही इस मामले को दिखवाता हूं। आदिवासी परिवार के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
बीबी गंगेले, एसडीएम नौगांव