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खेतों में धड़ल्ले से प्लॉटिंग, अफसरों की शिथिलता से अवैध कॉलोनाइजर बेखौफ

भू-माफिया खुलेआम खेतों में प्लॉट काटकर जमीन खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने और एसडीएम कार्यालयों में फाइलों के धूल फांकने से आम लोग इनके जाल में फंसने को मजबूर हैं।
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illegal plotting

फोरलेन के पास अवैध कॉलोनी

जिले में अवैध कॉलोनाइजरों का खेल अब भी जारी है। कुल 223 अवैध कॉलोनियों में से केवल 50 पर ही जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग पाई है। यही कारण है कि भू-माफिया खुलेआम खेतों में प्लॉट काटकर जमीन खुर्द-बुर्द कर रहे हैं। अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने और एसडीएम कार्यालयों में फाइलों के धूल फांकने से आम लोग इनके जाल में फंसने को मजबूर हैं।

जिले में सबसे अधिक अवैध कॉलोनियां खजुराहो-छतरपुर में

जिले में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां खजुराहो (69) और छतरपुर (84) में हैं। बावजूद इसके यहां जमीन खरीद-बिक्री पर रोक नहीं लग पाई है। बताया जा रहा है कि एसडीएम कार्यालयों में कॉलोनाइजरों की मजबूत पकड़ के कारण प्रस्तावित कार्रवाई कागजों तक सीमित रह गई है।

तहसीलदार के आदेशों की अनदेखी

बगौता मौजा में शासकीय भूमि खसरा नं. 28, 33, 35 (रकबा 0.344 हेक्टेयर) पर सचिन पुष्पेन्द्र राजपूत, मीना राजपूत, कवीन्द्र राजपूत, महेन्द्र राजपूत और हरदयाल राजपूत ने अवैध कब्जा कर प्लॉट काट दिए। तहसीलदार ने 3 जनवरी 2024 को सरकारी जमीन से बेदखली और एक लाख रुपए जुर्माने का आदेश जारी किया था, लेकिन आज तक इसका पालन नहीं हुआ। वहीं, अतिक्रमणकारियों ने बगैर मूलभूत सुविधाएं दिए अवैध प्लॉटिंग कर दी है।

रोक केवल छतरपुर में , एफआईआर फिर भी नहीं

शहरी विकास अभिकरण ने प्रस्ताव भेजकर एसडीएम को जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जिले में केवल छतरपुर एसडीएम अखिल राठौर ने 50 कॉलोनियों पर रोक लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के कॉलम-12 में कैफियत दर्ज होते ही खरीद-बिक्री बंद हो जाती है और एफआईआर दर्ज करने तक का अधिकार एसडीएम के पास है। इसके बावजूद कई अफसर कार्रवाई से बच रहे हैं।

रजिस्ट्रार कार्यालय की मिलीभगत

अवैध कॉलोनियों में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक होने के बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री हो रही है। कॉलोनाइजर और रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज बनाकर रजिस्ट्री पास कराई जाती है। यही वजह है कि आम लोग मान बैठते हैं कि प्लॉट वैध है, जबकि कॉलोनी पूरी तरह अवैध होती है।

अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कानून

1. नगर पालिका अधिनियम 1956 और 1961 के तहत अवैध कॉलोनी काटने पर 3 से 7 साल जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।2. अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर और परिसर सील करने का नियम भी लागू है।

3. कॉलोनी में ओपन एरिया न छोडऩे वालों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।4. सरकारी जमीन, तालाब, उद्यान और सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण कर बनी कॉलोनियां वैध नहीं मानी जा सकती हैं।

5. पंचायत क्षेत्र में कार्रवाई का अधिकार कलेक्टर को, जबकि नगरीय निकाय क्षेत्र में सीएमओ के प्रतिवेदन पर एसडीएम को रोक लगाने का अधिकार है।

जिलेभर में अवैध कॉलोनियों की स्थिति

छतरपुर- 84खजुराहो- 69

बिजावर- 26नौगांव- 16

राजनगर- 16हरपालपुर- 8

लवकुशनगर- 4कुल 223

कलेक्टर बोले- कार्रवाई करेंगे

कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा जिले में बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस मामले में किसी भी स्तर पर चूक बर्दाश्त नहीं होगी। अफसरों की शिथिलता और रजिस्ट्रार कार्यालयों की मिलीभगत के चलते भू-माफिया बेखौफ खेतों में प्लॉट काटकर अवैध कॉलोनियों का निर्माण कर रहे हैं। कलेक्टर की सख्त चेतावनी के बाद अब जिले में भू-माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद जगी है।