
नियम विरुद्ध बना दिए सड़क पर ब्रेकर, राहगीर हो रहे परेशान
उन्नत पचौरी
छतरपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों में सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने का प्रावधान ही नहीं है साथ ही स्टेट हाइवे और मुख्य जिला मार्ग भी इस नियम से बंधे हुए हैं। लेकिन सड़कें बनती है और नियमों को तोड़ा जाता है। सड़क बनाने वाले ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों के सामने ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों को तोड़ते हुए भारी भरकम ब्रेकर बना दिए जाते हैं। जिससे वहां पर आस पास रहने वाले लोगों को तो शांति मिल जाती है लेकिन वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए यह ब्रेकर किसी खतरे से कम नहीं होते हैं। कई बार लोग इन ब्रेकरों को देख नहीं पाते हैं और दुघर्टना का शिकार हो जाते हैै। अधिकारियों की माने तो गांवों के आस-पास ग्रामीणों की मांग रहती है कि यहां स्पीड ब्रेकर बनाएं जाएं। इसके पीछे ग्रामीणों की राय यह रहती है कि यदि ब्रेकर बन जाते हैं तो वाहनों की गति कम हो जाएगी और गांव में हादसे नहीं होंगे। लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते यहां पर न तो मानकों का ध्यान किया जाता है और न ही सफेद और पीली रंग की पुताई कराई जाती है जिससे राहगीरों को देर से ही स्पीड ब्रेकर होने की जानकारी मिल सके। ऐसे में कई बाद बडी घटना भी घट जाती है।
हाल ही में बनी नई सड़कों पर विभाग ने बड़े बड़े और नियम विरुद्ध ब्रेकर बना दिए गए। अब उन ब्रेकरों के चलते लोग हादसे के शिकार हो रहे हैं। किसी के वाहन टूट रहे हैं तो कुछ गिर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है ग्रामीणों की मांग पर बनाए गए हैं। जबकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने ही मना कर रखा है। हालाकि विभाग ने बाहर रोड पर ही नहीं शहर के अंदर भी बड़े ब्रेकर बना दिए हैं।
जिले में नेशनल हाइवे हो या फिर नगरीय निकाय या राजमाग रह जगह स्पीड ब्रेकर की भरमार है। यही नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग में स्पीड ब्रेकर बनाने का नियम नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कुछ चिंहित स्थानों पर ब्रेकर बनाए गए हैं। लेकिन उसमें भी मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। अधिकांश स्पीड ब्रेकर में सफेद या पीला पेंट नहीं किया गया है। जिससे बाइक सवार या वाहन चालकों को दिन में भी दूर से ब्रेकर दिखाई नहीं देते हैं। इससे अक्सर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
नहीं है स्पीड ब्रेकर बनाने का नियम :
कायदे से कहीं भी स्पीड ब्रेकर बनाने का नियम नहीं है। बेहद जरूरी होने पर पहले यह मामला जिला यातायात सुरक्षा समिति के पास जाता है और अनुमोदन के बाद ही निश्चित मापदंड के अनुरूप ब्रेकर बनवाए जाते हैं। वर्तमान में जहां भी सड़कें बनती हैं, वहां दबावपूर्वक कुछ लोग स्पीड ब्रेकर बनवा लेते हैं जो कि जानलेवा साबित होता हैं। शहर से गुजरने वाले कानपुर सागर नेशनल हाइवे और रीवा-ग्वालियर नेशनल हाइवे में कई ब्रेकर बनाए गए हैं, पर किसी ब्रेकर में भी सफेद-पीली पट्टी पेंट नहीं की गई है। कई ब्रेकर तो मानकों से अधिक ऊंचे हैं। इससे चालक जब तक ब्रेकर को देख पाता उससे पहले बाइक उछलकर अनियंत्रित हो जाती है, जिससे कई बार दुर्घटनाएं होती हैं।
किस सड़क पर कितने ब्रेकर :
कानपुर सागर एनएच में गढ़ीमलहरा के पास तीन स्थानों पर, निवारी और शहर के अंदर करीब ५ स्थानों में अमानक स्पीड बे्रकर बनाए गए हैं जिसमें से कई पर न तो पेंट किया गया और न ही वोर्ड लगाए गए हैं। वहीं रीवा-ग्वालियर नेशनल हाइवे नौगांव से छतरपुर तक एक दर्जन से अधिक और आधा दर्जन से अधिक शहर के अंदर स्पीड ब्रेकर हैं जिनमें से किसी भी ब्रेकर में पेंट नहीं किया गया है। जिससे कि वह दूर से दिखाई दे सके। इसके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों में बने सीसी रोड में भी कहीं ऊंचे, कहीं गड्ढे टाइप के ब्रेकर हैं। जो छोटी-मोटी दुर्घटनाओं के कारण बनते हैं। साथ ही शहर के अंदर वार्डों में ब्रेकरों की बाढ़ सी है। जिससे आए दिन घटनाएंं हो रही हैं।
ये है मानक स्पीड ब्रेकर
स्पीड ब्रेकर के लिए इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार स्पीड ब्रेकर की अधिकतम ऊंचाई 4 इंच होनी चाहिए। ब्रेकर के दोनों ओर 2-2 मीटर का स्लोप दिया जाए ताकि वाहन स्लो होकर बगैर झटका खाए निकल जाए। 6 से 8 इंच तक ऊंचाई वाले और बगैर स्लोप के ब्रेकर नहीं बनाए जाने चाहिए। स्पीड ब्रेकर के पहले चेतावनी चिन्ह लगे होने चाहिए। साथ ही ब्रेकर में सफेद या पीला पेंट व रेडियम होना चाहिए। जिससे दिन या रात में ब्रेकर दूर से ही वाहन चालकों को नजर आ जाए और वह किसी भी घटना से बचे रहें।
शहर में जहां दुर्घटना की आशंका, वहां नहीं हैं ब्रेकर :
शहर के जिला अस्पताल, कलेक्ट्रेट व कोर्ट सहित विभिन्न बैंक व सरकारी कार्यालयों के अलावा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, गल्र्स कॉलेज आदि ऐसे स्थान हैं जहां से काफी तेज रफ्तार में वाहन गुजरते हैं। इन स्थानों पर अधिकतम स्पीड सीमा के चेतावनी बोर्ड सहित स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता यहां के लोग महसूस कर रहे हैं। अगर इन स्थानों में मानकों के अनुरुप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं, तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं को कम किया जा सकता है।
ग्रामीण अपनी मर्जी से बनवा लेते हैं ब्रेकर :
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों में सड़क पर स्पीड ब्रेकर का प्रावधान ही नहीं है। स्टेट हाइवे और मुख्य जिला मार्ग भी इस नियम से बंधे हुए हैं। सड़क बनती है, तो वहां पंचायत व अन्य लोगों की राजनीति शुरू हो जाती है। लोग मनमानी से बेतरतीब स्पीड ब्रेकर बनवा लेते हैं, जो दूर से नजर ही नहीं आते। रात के अंधेरे में तो बिल्कुल भी नहीं दिखते। ब्रेकर की हाइट भी इतनी होती है कि गाड़ी गुजरते वक्त उछल जाती हैं। इससे विशेषकर बाइक सवार संतुलन खोकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। तीन पहिया और चार पहिया वाहनों का भी संतुलन बिगड़ता है।
हाइवे पर बने ब्रेकरों में होती है दुर्घटनाएं :
हाइवे सड़कों में बनाए गए स्पीड ब्रेकर ही अधिकांश घटनाएं हो रही है। यहां पर स्पीड ब्रेकर को देख स्पीड में आने वाले वाहनों को चालकों द्वारा स्पीड ब्रेकर के किनारे से निकालते हैं जिससे अधिकांस वाहन दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। हाईवे में बने स्पीड ब्रेकरों के दोनों किनारों में बडे बडे गड्ढे हो गए हैं जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
इनका कहना है :
सुप्रीम कोर्ट से स्पीड ब्रेकर बनाने का नियम नहीं है। इसीलिए हमारी ओर से ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं ग्रामीण क्षेत्रों में गांव के लोगों द्वारा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ब्रेकर बनवा लिए जाते हैं जिससे वह ब्रेकर और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। मैं एसडीओ से बात करता हूं और उनके क्षेत्र में बने ब्रेकरों को हटवाया जाएगा और जहां भी ब्रेकर की आवश्यकता होने पर मानकों के अनुसार ब्रेकर बनाए जाएंगें।
- मनोज सक्सेना, ईई पीडब्लूडी छतरपुर
Published on:
08 Mar 2019 11:00 pm
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