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खेती, लघु एवं कुटीर उद्योग से मजबूत बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

हर हाथ को मिलेगा काम छतरपुर जिले में लॉकडाउन के दौरान हुई 63 हजार लोगों की वापसी, साथ में गांव में आया तरह-तरह का हुनरआधुनिक व जैविक खेती, पशुपालन से भी मिलेगा रोजगार, प्रकृति आधारित उद्योग बनेंगे नया भारत बनाने में मददगार

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build up india campaign

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छतरपुर। बाहर से वापस आए लोगों के पलायन को रोकने के लिए आधुनिक खेती, लघु व कुटीर उद्योगों की स्थापना करनी होगी। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनकर नए भारत का निर्माण करेगी। छतरपुर जिले के किस इलाके में कौन से लघु व कुटीर उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए, इसके लिए बाहर से आए लोगों के हुनर की पहचान कर डाटावेस तैयार करना होगा। ग्रुप में लोगों को जोड़कर औद्योगिक पहल करने से लोगों को समूह में रोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। लॉकडाउन के दौरान छतरपुर जिले में 63 हजार लोगों की घर वापसी हुई है, इसमें करीब 40 हजार लोग मजदूर वर्ग से हैं, जो अब शहर वापस नहीं जाना चाहते हैं, सबके सामने खड़ी रोजगार की समस्या का समाधान क्षेत्रवार उपलब्ध संसाधन, मैन पावर के मुताबिक खेती की सुविधा विकसित करने और लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना से ही होगा। पत्रिका द्वारा आयोजित बेवीनार में शामिल युवा उद्योगपति, करियर मार्गदर्शक, प्रगतिशील किसान, जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र के महाप्रबंधक, सरपंच, मजदूर संघ के पदाधिकारी, विटनरी डॉक्टर, युवा व्यवसायियों ने मैन पावर, अर्थव्यवस्था और सरकारी तंत्र की भूमिका पर व्यापक चर्चा कर निष्कर्ष निकाला है।
स्किल के सर्वे से साफ होगी तस्वीर
जिले में लॉकडाउन के दौरान महानगरों से लौटे लोगों के पास अलग-अलग तरह का कौशल है। जिले में मौजूद स्किल्ड पावर की पहचान करने से स्किल आधारित लघु उद्योग लगाने से लोगों को रोजगार मिलेगा और हुनर का फायदा उद्योगों को सफल बनाने में मिलेगा। इसके लिए वापस आ रहे लोगों के पंजीयन के समय ही उनके काम की प्रवृत्ति के बारे में जानकारी जुटाई जाए तो एक डाटा वेस तैयार किया जा सकता है। जिसके आधार पर कौन-कौन से उद्योग लगाने की जरुरत है, ये साफ हो सकेगा।
सामूहिक प्रयास जरूरी
गांव वापस आए लोगों को गांव स्तर पर मिलने वाले रोजगार के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। लोग ग्रुप में प्रयास करेंगे तो सफलता की राह आसान होगी। एक व्यक्ति अलग-अलग प्रयास करने के बजाय सामूहिक प्रयास करेगा तो सभी का एक साथ भला होगा। खासतौर पर जैविक खेती और पशुपालन के क्षेत्र में सामूहिक प्रयास करने से राह आसान होगी। इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के पारंपरिक उद्योगों व प्रकृति से जुड़े उद्योग स्थापित करने से लोगों को काम मिलेगा। जब गांव में ही काम मिलेगा तो पलायन की संभावना कम होती जाएगी।
सरकारी योजनाओं के सहारे आर्थिक मदद
गांव वापस आने वाले लोगों को शासकीय योजनाओं के जरिए आर्थिक मदद देकर गांव आधारित लघु उद्योग स्थापित करने में मदद मिलेगी। जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र के जरिए छोट-छोटे उद्योग व व्यवसाय शुरु करने के लिए लोगों को मदद मिलेगी। इससे पूंजी न होने के कारण जो लोग काम-धंधा से वंचित हैं, उनके लिए राह खुलेगी।
ये कहना है विभिन्न वर्ग के लोगों का
डाटा बेस तैयार करना होगा
गांव-शहर में जो लोग वापस आ रहे हैं, उनके हुनर का सर्वे कर हमें डाटा बेस तैयार करना चाहिए। इस डाटा बेस के विश्लेषण के बाद जिले में मौजूद हुनर पर आधारित उद्योग शुरु करने से लोगों को रोजगार मिलेगा। गांव में रोजगार मिलने से लोगों का पलायन रुकेगा। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होने से ना भारत बनेगा।
विनय चौरसिया, युवा उद्योगपति
जिले से टमाटर की सप्लाई कई शहरों में होता है, लेकिन लॉक डाउन के दौरान सप्लाई बंद रही है। ऐसे में कैचअप का उद्योग लगाकर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए किसानों को समूह में जोड़कर काम किया जाना जरूरी है। जैविक खेती के जरिए गांव में रोजगार बढ़ेगा। इसके साथ ही पान किसानों को मदद मिलनी चाहिए, ताकि पान की खेती से राजगार मिलता रहे।
चितरंजन चौरसिया, प्रगतिशील किसान
स्किल मैपिंग करके सेंटर बनाए जाने चाहिए, जहां से उद्योगों के लिए हुनरमंद लोगों की उपलब्धता हो सके। शहरों से लौटे छोटे-छोटे लेकिन जरूरी काम करने वाले ड्राइवर, प्लंबर, मिकैनिक की आवश्यकता होने पर कंपनियां, व्यवसायी उस सेंटर के माध्यम से मैन पावर आसानी से प्राप्त कर सके। इससे रोजगार पाने और देने वाले को आसानी होगी।
उत्कर्ष आनंद, युवा व्यवसायी
लॉक डाउन से एक तस्वीर साफ हो गई है, कि लोगों के लिए मां-मातृभूमि से बढ़कर कुछ नहीं है। लोग कैसे भी आए हो, लेकिन अब उनके सामने ये समस्या है, कि शहरों में अत्याधुनिक मशीनों पर काम करने वाले गांव में कैसे काम करेंगे। ऐसे में लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मैनेजमेंट करके कुटीर उद्योग के जरिए हर हाथ को काम दिया जा सकता है।
डॉ. जेपी शाक्य, करियर मार्गदर्शक
बुंदेलखंड में गर्मी के कारण विशेष नस्ल के पशुओं के पालन का रोजगार सफल नहीं हो पा रहा है। गरीब की गाय मानी जाने वाली बकरी के पालन के जरिए ग्रामीणों को रोजगार दिलाया जा सकता है। इसके लिए शासकीय योजनाओं के जरिेए लोगों को मदद भी मिल जाती है। पशुपालन, पोल्ट्री फॉर्म जैसे काम शुरु करके गांव में ही लोगों को रोजगार मिल सकता है।
डॉ. मीनाक्षी पटैरिया, विटनरी चिकित्सक
गांव में वापस आने वाले लोगों के सामने एक ही समस्या है, कि वे क्या काम करें। इसके लिए हम लोग वापस आने वाले ग्रामीणों के हुनर का डाटा वेस तैयार कर रहे हैं। ताकि उन लोगों के हुनर के हिसाब से काम दिलाया जा सके। हुनर और रुचि के मुताबिक काम मिलने पर लोगों को पलायन नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में योजना बनाकर काम करना होगा।
जयदेव बुंदेला, पूर्व सरपंच
बाहर से आए लोगों को छोटे-छोटे काम धंधों में लगातार उन्हे रोजगार दिया जा सकता है। भारतीय मजदूर संघ ने इसके लिए 10 से 12 गांव के एक कलस्टर को बनाकर लोगों के हुनर की पहचान की जाएगी। उनकी रुचि के मुताबिक उन्हें गारंटी फ्री लोन दिलाकर रोजगार की व्यवस्था करके सबको काम दिया जाएगा। जो लोग हस्तक ला, काष्ट कला और अन्य कलाओं को सीखकर आए हैं, उनके हुनर पर आधारित लघु उद्योग लगाकर उन्हे रोजगार दिया जा सकता है।
हरेन्द्र सिंह चंदेल, विभाग प्रमुख, भारतीय मजदूर संघ
बाहर से आने वाले लोगों की स्किल मैपिंग करके उन्हें हुनर के मुताबिक छोट-छोटे उद्योग लगाकर काम दिया जा सकता है। इसके साथ ही पारंपरिक कार्यो को बढ़ावा देकर भी लोगों को गांव में काम दिलाया जा सकता है। उदाहरण के लिए बांस से वस्तुएं बनाने का काम विलुप्त हो रहा है, ऐसे कई पारंपरिक कार्यो को दोबारा शुुरु कराया जा सकता है। शासन की योजनाओं से लोगों को इसके लिए आर्थिक मदद भी मिल जाती है।
डीआर आर्य, महाप्रबंधक, जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र
लॉकडाउन के दौरान कां बंद हो गया लेकिन जब काम शुरु हुआ तो मजदूरों को काम मिलने लगा। लेकिन जिले में फिर से लॉकडाउन की स्थिति बन रही है। ऐसे में मजदूरों की जांच कराकर ये सुनिश्चि कर लें, कि वे स्वस्थ्य है, फिर उनको मिलों में काम देकर रोजगार दिया जाए। इससे जरूरी खाद्य पदार्थो का उत्पादन नहीं रुकेगा, लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
राहुल साहू, दाल मिल संचालक
उद्योगों में लगे मजदूरों व कर्मचारियों के रोजगार को छीनने के बजाए उन्हें इस समय सहारा देने की जरूरत है। भले ही वेतन में कटौती हो जाए, लेकिन किसी को काम से निकालना नहीं चाहिए, इससे जो लोग पहले से जिले में काम कर रहे हैं। उन्हें मदद मिलेगी। इसके साथ ही बाहर से आए लोगों को रोजगार देने के लिए योजना बनाकर लघु,कुटीर उद्योग स्थापित करने चाहिए।
दिव्यांश आनंद, युवा व्यावसायी