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संघ प्रमुख के पहुंचते ही गुंजायमान होगी छत्रसाल की ऐतिहासिक कर्मभूमि

रमतूला, शंखध्वनि, वेद मंत्रों के बीच होगा छत्रसाल की प्रतिमा का अनावरण

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Sangh head, Chhatrasal Karmabhoomi, 52 feet high statue

Sangh head, Chhatrasal Karmabhoomi, 52 feet high statue

नीरज सोनी
छतरपुर। आज से तीन दिन बाद 21 मार्च को दोपहर के 3 बजते ही महाराजा छत्रसाल की ऐतिहासिक कर्मस्थली मऊसहानियां के स्टेडियम में जैसे ही आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत प्रवेश द्वारा पर पहुंचेंगे तो रमतूला की धुंधवी, शंख की ध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज शुरू हो जाएंगी। इसी बीच संत रावतपुरा सरकार, मलूक पीठाधीश्वर संत राजेंद्रदास महाराज और अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज सहित संतों की टोली उन्हें लेने पहुंचेगी। प्रवेश द्वारा से मूर्ति स्थल तक दोनों ओर महिलाएं सिर पर कलश रखकर खड़ी रहेंगी, इनके बीच में खड़ी देवकन्याएं पुष्पवर्षा करेंगी। महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा के अनावरण के लिए शौर्य पीठम पर डॉ. भागवत के पहुंचते ही 108 वटुक ब्राह्मण सामूहिक रूप से वेद मंत्रोच्चार शुरू कर देंगे। इसके साथ ही संतों की मौजूदगी में संघ प्रमुख भागवत महाराजा छत्रसाल की ५२ फीट ऊंची अष्ठधातु से निर्मित अश्वरोही प्रतिमा का लोकार्पण करेंगे।
यह दृश्य होगा बुंदेलखंड के अब तक के उस सबसे बड़े सामाजिक और सार्वजनिक समारोह का जिसमें शामिल होने के लिए पहली बार देश के सबसे बड़े हिंदू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत आ रहे हैं। २१ मार्च को रीवा-ग्वालियर नेशनल हाइवे किनारे स्थित महाराजा छत्रसाल की कर्मस्थली रहे मऊसहानिया के स्टेडियम में महाराजा छत्रसाल की ५२ फीट ऊंची अष्ठधातु से निर्मित अश्वरोही प्रतिमा का अनावरण समारोह होना है। डॉ. भागवत झांसी के रास्ते जिले की सीमा में प्रवेश करेंगे। इसके बाद छतरपुर पहुंचकर आरएसएस कार्यालय में भोजन-विश्राम करेंगे। दोपहर में 3 बजे वे कड़े सुरक्षा घेरे के साथ प्रतिमा का अनावरण करने स्टेडियम में पहुंचेंगे। यहां पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिमा का अनावरण करके सीधे मंच पर पहुंचेंगे। मंच पर संतों के साथ उनका स्वागत होगा और इसके बाद वे सामाजिक सभा को संबोधित करेंगे। संघ प्रमुख डॉ. भागवत का बुंदेलखंड सहित मप्र में पहला गैर संगठनात्मक कार्यक्रम है जिसमें वे किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करेेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि डॉ. भागवत यहां पर केवल सामाजिक समरसता के मुद्दे और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ही बोलेंगे। मंच पर किसी भी राजनैतिक व्यक्ति को नहीं बैठाया जाएगा। यह पूरा आयोजन महाराजा छत्रसाल स्मृति शोद्य संस्थान के संयोजन में हो रहा है। संस्थान के अध्यक्ष भगवतशरण अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम की सभी तैयारियां व्यापक स्तर पर चल रही हैं। मंच का निर्माण भी शुरू हो गया है। डोम पंडाल के अलावा कार्यक्रम स्थल पर तीन-चार एलईडी लगाई जाएंगी ताकि लोग बाहर से बैठकर भी इस कार्यक्रम को देख सके। इसके अलावा स्टेडियम के बाहरी तरफ भी लोगों के बैठने की व्यवस्था कराई जा रही है। आयोजन को सफल बनाने के लिए अलग-अलग समितियां बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। इस समारोह में शामिल होने के लिए देशभर से कई संगठनों के प्रमुख, राजनेता, उद्योगपति से लेकर कई हस्तियां आ रही हैं। उधर शनिवार को पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ी तैयारियां शुरू कर दी है। डीआईजी अनिल महेश्वरी ने भी शनिवार को मऊसहानियां पहुंचकर तैयारियां की समीक्षा की।
देशभर के प्रमुख संत बनेंगे आयोजन के साक्षी :
महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा अनावरण समारोह में देशभर के प्रमुख संतों को बुलाया गया है। संत रविशंकर महाराज रावतपुरा सरकार, मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज, पं. देवप्रभाकर शास्त्री दद्दाजी, भारतमाता मंदिर के प्रमुख संत अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज सहित चित्रकूट और अयोध्या के संत इस आयोजन के साक्षी बनेंगे। प्रतिमा अनावरण के बाद सभी प्रमुख साधू-संत और संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत मंचासीन होंगे। यहां पर सार्वजनिक सभा का आयोजन किया जाएगा।
सामाजिक समरसता की थीम पर होगा आयोजन :
संघ प्रमुख डॉ. भागवत पहली बार बुंदेलखंड के दौरे पर आ रहे हैं। इसलिए उनके कार्यक्रम को महाराजा छत्रसाल के सामाजिक समरसता इतिहास से जोड़ा गया है। सभा की थीम भी इसी पर रखी गई है। जिस तरह महाराजा छत्रसाल हर समाज और वर्ग के लोगों की चौपाल लगाया करते थे और सभी को बराबर सम्मान देते थे। इसी तरह सभा स्थल पर बैठक व्यवस्था तय की गई है। मंच पर केवल संघ प्रमुख और संत होंगे। इसके अलावा अलग-अलग समाज और विरादरी के प्रमुख लोगों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई है। सभी संगठनों और संस्थानों के प्रमुखों को भी विश्ेाष क्षेत्र में बैठाया जाएगा। जनप्रतिनिधियों और वीआईपी के लिए भी अगल बैठक व्यवस्था रखी गई है।
बब्बा के टिड़ूआ सेव और हलुआ से होगा सत्कार : (फोटो ०१,०४)
संघ प्रमुख मोहन भागवत और संतों का सत्कार मऊसहानिया के दो एक विशेष व्यंजनों से होगा। उन्हें यहां का प्रसिद्ध बब्बा का हलुआ और वेसन से बने बब्बा के टिड़ूआ सेव परोसे जाएंगे। यह दोनों मऊसहानिया की प्रसिद्ध डिस है जिसको करीब 70 साल पहले स्थानीय मिठया स्व. कंचू रैकवार ने शुरू किया था। उनके द्वारा शुरू की गई यह डिस इतनी प्रसिद्ध हुई कि इसे बब्बा का हलुआ और बब्बा के सेव का ब्रांड नाम मिल गया है। इसी नाम से मऊसहानियां की सभी दुकानों पर यह स्पेशल डिस मिलती है। स्व. कंचू के बेटे प्यारेलाल और उनके नाती धर्मेंद्र अब भी इसी व्यवसाय को कर रहे हैँ। तीन पीढिय़ों से बब्बा का हलुआ और टिड़ूआ सेव दूर-दूर तक लोगों के बीच प्रसिद्ध है।
हाईटेक मीडिया रूम से मिलेगा कवरेज :
आयोजन स्थल पर संस्थान ने हाईटेक मीडिया रूम भी बनाया है। जहां पर मीडियाकर्मी कार्यक्रम के कवरेज से जुड़े फोटोग्राफ, वीडियो फुटेज और जानकारी ले सकेंगे। इसके अलावा खबरें-फोटो मेल करने की सुविधा भी यहां पर उपलब्ध रहेगी। मीडिया में नेटवर्किंग की हाईटेक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके आलवा संघ प्रमुख की जेडप्लस सुरक्षा को देखते हुए मीडिया के लोगों और व्यवस्था में जुड़े लोगों को अलग-अलग कलर के पास उपलब्ध कराए जाएंगे। बिना पास के सभा स्थल या कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा घेरा कोई भी नहीं तोड़ पाएगा।
पुलिस व्यवस्था होगी खास :
एसपी विनीत खन्ना ने बताया कि संघ प्रमुख के कार्यक्रम में आने वाले जनसमूह के मद्देनजर आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को लेकर कार्ययोजना बनाई गई है। पिछले दिनेां कलेक्टर के साथ मैंने आयोजन स्थल का दौरा किया था। आयोजकों की ओर से मिले फीडबैक के आधार पर बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल व्यवस्था के लिए मांगा गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा पूरी तरह से चाक-चौबंद रहेगी। विशेष पुलिस बल की निगरानी में पूरा आयोजन स्थल रहेगा। मजबूत सुरक्षा घेरा भी कार्यक्रम स्थल पर बनाया जा रहा है।

यह होगा संघ प्रमुख का कार्यक्रम :
सुबह 9 बजे : झांसी रेलवे स्टेशन पर पहुंचेंगे।
दोपहर 12 बजे : छतरपुर आएंगे, भोजन और विश्राम।
दोपहर 2 बजे : महेबा में महाराजा छत्रसाल की समाधि पर पहुंचेंगे।
दोपहर २.३० बजे : धुबेला म्यूजियम को देखने पहुंचेंगे।
दोपहर 3 बजे : मऊसहानिया के छत्रसाल स्टेडियम में मूर्ति का अनावरण करेंगे।
शाम 6 बजे : मऊसहानिया से झांसी के लिए रवाना होंगे, ट्रेन से वापसी।