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आवारा मवेशी का अब भी शहर की सड़कों पर डेरा, यातायात हो रहा प्रभावित

नगरपालिका ने आवारा मवेशियों की शिफ्टिंग नहीं कराई, हर सड़क पर पेरशानी

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मुख्य मार्गो पर बीच सड़क रहता है डेरा

मुख्य मार्गो पर बीच सड़क रहता है डेरा

छतरपुर. शहर की मुख्य सड़कों आवारा मवेशियों का जमावड़ा परेशानी का कारण बना हुआ है। ट्रैफिक जाम व सड़क दुर्घटना के सबसे बड़े कारण पर नगरीय प्रशासन विभाग ठोस एक्शन नहीं ले रहा है। मवेशियों की शिफ्टंग का अभियान जुलाई में शुरु होने के बाद ठंडे बस्ते में चला गया। नपा ने एक-दो दिन आवारा मवेशियों बसाटा की गो-शाला में शिफ्ट किया लेकिन दावे के मुताबिक शहर की सड़कों से सभी मवेशियों की शिफ्टिंग नहीं हुई।

मुख्य मार्गो पर बीच सड़क रहता है डेरा
आवारा मवेशी छत्रसाल चौराहा, फव्वारा चौराहा, पुराना पन्ना नाका, बस स्टैंड, महोबा रोड, गांधी चौक बाजार, पुरानी गल्ला मंडी, पठापुर तिराहा सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर सड़क के बीच बैठे नजर आ रहे हैं। वाहन चालकों के लिए परेशानी खड़ी करने के साथ ही एक्सीडेंट कर लोगों को घायल कर रहे हैं।


शहर की सड़कों पर रहती हैं 3 हजार गाय
दुर्घटना में घायल गोवंश का इलाज का काम करने वाली हरिओम गौशाल के आंकड़ो के मुताबिक छतरपुर शहर में लगभग तीन हजार गाय ऐसी हैं, जिनके न रहने का ठिकाना है, न खाने-पीने का इंतजाम है। शहर के हर वार्ड में कम से कम 70 गाय हैं, जो खाने की तलाश में सड़कों, गलियों में भटकती रहती है। हर सड़क पर इसी वजह से जाम लगता है। सड़क के किनारे और सड़क पर बैठी गायों को बचाने के प्रयास में सड़क दुर्घटना होती हैं। रात के समय सड़क पर बैठे गो-वंश बड़ी सड़क दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं। गायों को बचाने के चक्कर में रोजाना 5 एक्सीडेंट शहर में हो रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में 2 से तीन गाय की रोजाना मौत हो रही है, कम से कम चार लोग घायल हो रहे हैं। ये तो आम दिनों की बात है,बारिश के मौसम में रोजाना कम से कम 15 एक्सीडेंट होते हैं,जिनमें 10 गायों की मौत हो जाती है, 12 लोग गंभीर घायल हो जाते हैं, 2 से 4 लोगों की मौत हो जाती है।


ग्रामीण इलाके में सड़कों पर गो-वंश
छतरपुर जिले में न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण अंचल में भी आवारा मवेशियों की समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायतों में लगभग 29 गो-शालाएं 28 लाख की लागत से बनाई गई थीं। इनमें बकस्वाहा में 4, बड़ामलहरा में 3, बिजावर में 5, राजनगर में 4, छतरपुर में 3, नौगांव में 6, गौरिहार में एक, लवकुशनगर में 3 गो-शालाएं बनाई गई हैैं। वहीं वर्ष 2020-21 में करीब 70 से अधिक गो-शालाएं मनरेगा से बनाई गई हैं। फिर भी गो-वंश को आसरा नहीं मिल पा रहा है।

इनका कहना है
इन जानवरों को पकड़कर शहर के आसपास मौजूद गो-शालाओं में भिजवाने को लेकर नपाध्यक्ष से चर्चा हुई है। उन्होंने रणनीति बनाकर इन्हें पकडऩे की सहमति दी है। जल्द ही विभाग द्वारा कार्रवाई कर इन्हें पकड़कर गो-शाला भेजा जाएगा। ताकि शहर के लोगों को इनसे परेशानी न हो।
ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ नपा छतरपुर

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