
खाद के लिए भटकते किसान
जिले में खाद वितरण किसानों को मुसीबत बन रहा है और गिरते तापमान में किसान सुबह से लाइन लगाकर यूरिया के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन गोदामों और विपणन संघ में यूरिया का स्टॉक न होने से अन्य खादों का वितरण किया जा रहा है। जिससे किसानों में आक्रोश और मायूसी है। किसानों का कहना है कि जब फसल को यूरिया की जरुरत है ऐसे में उन्हें खाद की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे फसल उत्पादन पर असर होने की संभावना है। पूर्व में भी विपणन संघ में टोकन व्यवस्था भी सुचारु नहीं है जिससे किसानों को लाइन में लगे रहने के बाद भी सही वक्त पर खाद मुहैया नहीं हो सका है।
प्रदेश में रासायनिक खाद की कालाबाजारी रोकने एवं किसानों को सुविधापूर्वक खाद उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 1 जनवरी से ई- टोकन प्रणाली शुरू की गई है, हालांकि छतरपुर जिले में यह प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो सकी है। अधिकारी सर्वर डाउन होने की बात बता रहे हैं। प्रक्रिया को लेकर 7 जनवरी को संभाग स्तरीय प्रशिक्षण भी सागर में आयोजित हो रहा है, जिसमें तकनीकी बारीकियां से कर्मचारियों को अवगत कराया जाएगा। कृषक किसान विकास पोर्टल पर जाकर टोकन का लाभ ले सकेंगे।
फिलहाल यह सुविधा जिले में सुचारु न होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है, लेकिन इस सुविधा के आने के बाद किसान अपनी स्वेच्छा के अनुसार प्राइवेट डीलर, समिति या गोदाम का चयन कर सकते हैं। साथ ही ऑनलाइन टोकन जनरेट हो जाने के बाद वहां जाकर शासन द्वारा निर्धारित रेट की राशि जमा कर खाद प्राप्त कर सकते हैं। इस सुविधा से किसान को लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा एवं एक साथ उनकी जमीन के हिसाब से एक बार में ही पूरी खाद मिल सकेगी। जिस जगह खाद उपलब्ध है ऑनलाइन उसकी उपलब्धता भी देखी जा सकती है।
विपणन संघ में फिलहाल यूरिया का स्टॉक खत्म होने से किसानों को परेशानी बनी हुई है। गोदाम प्रभारी का कहना है कि यूरिया न होने से नैनो यूरिया और अन्य खाद को दिया जा रहा है। नई रैक आने के बाद किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। तब तक ई-टोकन व्यवस्था सुचारु हो जाएगी तो किसानों को लाइन में लगने से राहत मिलेगी। वहीं किसानों का आरोप है कि विभाग द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। रबी सीजन में खाद आपूर्ति विभाग ने सही तरीके से नहीं की है।
खाद की समस्या कासमाधान नहीं हो सका है। यूरिया का स्टॉक खत्म हो गया है। उसकी जगह दूसरा खाद थमाया जा रहा है। फसलों के उत्पादन पर असर होने की संभावना बनी हुई है।मुन्ना अहिरवार, किसानखाद के लिए टोकन में दो से तीन दिन लग रहे हैं, इसके बाद भुगतान करने में भी एक से दो दिन का समय लग रहा है। एक सप्ताह मेहनत करने के बाद महज दो बोरी मुश्किल से मिल रही थी। अब यूरिया न होने से उसकी भी उम्मीद नहीं है।
दयाराम, किसान
यूरिया के लिए सभी किसान परेशान हैं। यूरिया की रैक कब आएगी इस बात की भी कोई गांरटी नहीं है। जब यूरिया था तब भी विभाग ने सुचारू रूप से वितरण नहीं किया।धनीराम कुशवाहा, किसानयूरिया उपलब्ध कराने में विभाग विफल है। पूरे सीजन में खाद का वितरण नहीं हो पाया। पहले डीएपी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी, अब यूरिया के लिए भटक रहे हैं। किसानों को जबरन परेशान किया जा रहा है।
गणेश कुशवाहा, किसान
Published on:
06 Jan 2026 10:48 am
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