28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रामलीला में राम जन्म की सुंदर लीला देख दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

छतरपुर. श्री अन्नपूर्णा रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के तीसरे दिन मुख्य अतिथि अनूप तिवारी, रमेश गुप्ता समाज अध्यक्ष, राम कुमार अग्रवाल, हरि असाटी, सूरज अग्रवाल, स्वामी प्रसाद पिपरसानिया, मथुरा प्रसाद अग्रवाल, सोनू गुप्ता, संजय गुप्ता, संतोष तिवारी, रमेश असाटी साथ ही समिति के अध्यक्ष कु.दृगेन्द्र देव सिंह चौहान, कार्य संयोजक बॉबी असाटी, उपाध्यक्ष राधिका गुप्ता, रमेश लालवानी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की आरती कर लीला का शुभारंभ किया गया।

2 min read
Google source verification
मंचन करते कलाकार

मंचन करते कलाकार

श्री अन्नपूर्णा रामलीला समिति के तत्वावधान में मंचन

छतरपुर. श्री अन्नपूर्णा रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के तीसरे दिन मुख्य अतिथि अनूप तिवारी, रमेश गुप्ता समाज अध्यक्ष, राम कुमार अग्रवाल, हरि असाटी, सूरज अग्रवाल, स्वामी प्रसाद पिपरसानिया, मथुरा प्रसाद अग्रवाल, सोनू गुप्ता, संजय गुप्ता, संतोष तिवारी, रमेश असाटी साथ ही समिति के अध्यक्ष कु.दृगेन्द्र देव सिंह चौहान, कार्य संयोजक बॉबी असाटी, उपाध्यक्ष राधिका गुप्ता, रमेश लालवानी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की आरती कर लीला का शुभारंभ किया गया। श्री अन्नपूर्णा रामलीला समिति अध्यक्ष कु.दृगेन्द्र देव सिंह चौहान ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर और अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत किया गया।

समिति के मीडिया प्रभारी पुष्पेन्द्र दीक्षित ने बताया कि शनिवार की देर शाम मध्यम बारिश के बीच रामलीला मंचन मे रामजन्म की लीला दिखाई। प्रथम दृश्य में रावण और अन्य राक्षसों के अत्याचार से कराह रही पृथ्वी को अत्याचार मुक्त करने के हेतु देवतागण भगवान विष्णु से अवतार लेने की प्रार्थना करते हैं। राजा दशरथ के संतान न होने के कारण अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास जाना, वशिष्ठ के कहने पर श्रृंगी ऋषि द्वारा शुभ पुत्र कामेष्ठि यज्ञ करवाना। यज्ञ कुंड से अग्नि देवता का प्रकट होकर खीर प्रदान करना। राजा दशरथ द्वारा तीनों रानियों कौशल्या, कैकई और सुमित्रा को खीर प्रदान करना और खीर खाकर तीनों रानियों का गर्भवती होने की लीला हुई। इस बीच मंच पर पाश्र्व संगीत भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी गूंजने लगता है। वहीं माता कौशल्या कहती हैं, हे तात आप यह विराट रूप त्याग कर अत्यंत प्रिय बाल लीला कीजिए। विष्णु अंर्तध्यान होते हैं, बच्चों के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं, खुशी का संगीत उभरता है। अगले दृश्य में रामजन्म के समाचार से राजा दशरथ सहित संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है।

भगवान राम के साथ तीनों भाइयों के जन्म लेते ही राजा दशरथ और रानी कौशल्या बड़े ही उत्साहित थे। अवध में चारों ओर बधाई गान गाए गए। कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला, अवध में जन्मे रघुराई, कौशल्या रानी दे दो बधाई। बाल स्वरूप भगवान राम से मिलने भगवान शंकर योगी का भेष बनाकर आते हैं और इसके बाद चारों भाइयों का नामकरण गुरू वशिष्ठ द्वारा किया जाता है। तत्पश्चात भगवान राम,लक्ष्मण,भरत, शत्रुघन गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा दीक्षा के प्रस्थान करते हैं। भगवान राम की बाल लीला का मंचन देख दर्शक मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।