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आजादी के 7 दशक बाद भी गांव की तस्वीर धुंधली

सड़क विहीन है २४ सौ से अधिक की आबादी

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Chhatarpur

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बड़ामलहरा। सरकार चाहे विकास के लाख दावे करे लेकिन हकीकत है कि आजादी के 7 दशक बाद भी गांव की तस्वीर धुंधली है। गांव आज भी सड़क, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी अनेक मूलभूत सुविधाओं को तरस रहें है। जनपद क्षेत्र में एक ऐसा भी गांव हंै जहां चौमासे में सडक विहीन गांव के बांसिदों की जिंदगी ठहर जाती है।
जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत छाईकुआं में टौरिया, टपरियन, भनगुवां गांव मिलाकर कुल जनसंख्या 24 सौ के आसपास है। पंचायत में 12 सौ 72 मतदाता सरकार चुनते है। भनगुवां और टपरियन को मिलाकर आधी जनसंख्या के सड़क अभाव का वर्षो से दंश झेल रही है। गांव में जाकर देखा जाए तो यहां सरकार के सारे दावे धरे के धरे रह जाएगें। इसे शायद विडंबना ही कहेगें की 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद ग्राम भनगुवां के लोग पराधीन हैं। गांव में पहुंच मार्ग न होनें से यहां बसे लोगों को खेतों की मेड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। विधानसभा क्षेत्र को सत्तासीन सरकार का गढ़ माना जाता है। इसके बावजूद भी शासन ग्रामीणों को एक अदद सड़क दिलाने में नाकाम साबित हो रही है। ग्रामीणों की मानें तो हर पंचवर्षीय में सफेदपोश गांव आते है और रास्ता दिलाने की कहकर ठग ले जाते है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क अभाव में हमारे बेटा बेटियों की शादी होने में परेशानी आ रही है। चार पहिया वाहन भी गांव तक नहीं आ पाता। सबसे बुरी हालत मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होती है। मुख्य मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 34 तक आने के लिए चारपाई पर इनहें लिटाकर ढाई किमी का सफर तय करना पड़ता है। हालत यह हैं कि बरिश के दिनों में खेतों से होकर मुख्यमार्ग तक जाने वाला रास्ता भी बंद हो जाता है। ऐसी हालत में ग्रामींणो को चौमासा गुजारने के लिए राशन पानी सहित दैनिक जीवन की सारी चीजों की व्यवस्था पहले से रखना पड़ती है। पंचायत सचिव अनिल यादव ने बताते है कि गांव में सड़क न होने से हितग्राही मूलक योजनाएं भी प्रभावित हैं। गांव में 67 शौचालय का निर्माण का लक्ष्य है। 27 शौचालय का निर्माण गर्मियों में करा दिया गया था। शेष 40 शौचालयों में 12 का निर्माण चल रहा है। चार पहिया वाहन गांव में न पहुंचने से ईंट, गिट्टी सहित अन्य मटेरियल औने पैने दाम में खरीद रहे है। प्रशानिक दवाव के चलते पंचायत सचिव अनिल यादव शौचालय निर्माण की सामग्री सीमेंट, दरवाजों को सिर पर रखकर हितग्राहियों के घर पहुंचा रहा है।