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आदि विक्रमादित्य से गिरा नाट्य समारोह का पर्दा, विक्रमादित्य की न्यायप्रियता को मंच पर किया साकार

मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित रंग प्रयोग नाट्य समारोह में आखिरी दिन आदि विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से विक्रमादित्य की न्यायप्रियता और बुद्धि कौशल को विभिन्न कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

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प्रस्तुति देते कलाकार

छतरपुर. मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित रंग प्रयोग नाट्य समारोह में आखिरी दिन आदि विक्रमादित्य नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से विक्रमादित्य की न्यायप्रियता और बुद्धि कौशल को विभिन्न कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। समारोह के अंतिम दिन दो सौ की क्षमता वाले ऑडिटोरियम हॉल में चार सौ दर्शक मौजूद थे।

नाटक कहानी जन जीवन पर डालती है असर


कार्यक्रम में डीआईजी ललित शाक्यवार सपत्नीक मौजूद रहे, तो वहीं होटल संचालक भगवत अग्रवाल,सिंधु सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद्र लालवानी,शिक्षाविद विनोद रावत,प्रो.अमिता अरजरिया,गांधी आश्रम की सचिव दमयंती पाणी,सीएमओ माधुरी शर्मा,पीआरओ हिमांशी बजाज,नीरज खरे,अंकुर यादव सहित लोग उपस्थित रहे। नाटक के अंत में निर्देशक टीकम जोशी सहित सभी कलाकारों और सहयोगियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। डीआईजी ललित शाक्यवार ने इस मौके पर कहा कि इस नाटक की कहानियां हमारे आम जीवन को भी प्रभावित करतीं हैं और पुलिस के लिए भी विक्रमादित्य के न्यायप्रियता की कहानियां मिसाल बन सकतीं हैं वहीं अन्य अतिथियों ने इस आयोजन को लेकर टीकम जोशी को धन्यवाद देते हुए ऐसे आयोजनों की श्रृंखला लगातार छतरपुर में आयोजित करने का अनुरोध किया। नाट्य विद्यालय के निदेशक टीकम जोशी ने इस नाट्य प्रयोग कार्यशाला के बारे में विस्तार से बताते हुए नए लोगों को रंगमंच से जुडऩे का न्यौता दिया।

यह थी नाटक की कहानी


नाटक एक मैदान पर बच्चों के रस्साकसी के खेल से शुरू होता है और तभी एक बालक उस टीले पर चढ़ जाता है जहां विक्रमादित्य का सिंहासन गड़ा हुआ था। सिंहासन के असर से उसमे राजा का प्रभाव आ जाता है और वह अचानक रूप बदलकर न्याय की बात करने लगता है। बच्चे यह दृश्य देखकर डर जाते हैं। बात राजा भोज तक पहुंचती है और राजा भोज उस टीले को खोदने का आदेश देते हैं। खोदने पर वहां एक सिंहासन निकलता है और 32 पुतलियां प्रकट होती हैं। राजा भोज उस सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न करता है लेकिन सफल नहीं हो पाता है तब पुतलियां कहती हैं कि अगर आपमें इतना तेज और न्यायप्रियता है तो आप बैठ सकते हैं। फिर पुतलियां विक्रम बेताल की कहानियां सुनाती हैं। 12 फीट के विक्रम बेताल के पुतले जब मंच पर आते हैं तो दर्शक चकित होकर जमकर तालियां बजाकर उत्साह वर्धन करते नजऱ आए। कहानी का सार यह निकलता है कि जो न्यायप्रिय,परोपकारी और संवेदनशील होगा वही सिंहासन का सच्चा उत्तराधिकारी होगा।

वोलेंटियर के माता पिता का किया सम्मान


इस आयोजन के स्थानीय समन्वयक रंगकर्मी शिवेन्द्र शुक्ला ने बताया कि आयोजन में सहभागी भूमिका निभाने वाले शंखनाद नाट्य मंच के कलाकारों के माता पिता को मंच से सम्मानित करके यह संदेश दिया गया कि उनके बच्चे एक अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यदि वे रंगमंच या कला के क्षेत्र में आगे बढऩा चाहते हैं तो अभिभावकों का सहयोग लगातार मिलता रहे। कार्यक्रम के अंत में इस आयोजन की नोडल सीएमओ माधुरी शर्मा ने जिला प्रशासन और डीएटीसीसी की तरफ से सभी अतिथियों,कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।