छतरपुर. जून माह के बिदा लेते ही मानसून की बारिश का आगाज होने का अनुमान मौसम विभाग की ओर से लगाया जा रहा है। इसी को लेकर बीते कई वर्ष से जवानों और बचाव उपकरणों की कमी से जूझ रहे आपदा प्रबंधन व होमगार्ड विभाग को इस बार आपदा के दौरान परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस वर्ष बारिश के पहले विभाग में कई आधुनिक उपकरणों को शामिल किया गया है। जिससे रेस्क्यू के दौरान लोगों को बचाने में वह कारगर शाबित हो सकेंगे। वहीं जिले भर के ३०० आपदा मित्र जवानों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे।
जिले की करीब २० लाख से अधिक की आवादी के बीच होमगार्ड के पास बाढ़ आपदा से निपटने पिछले पहले महज कुछ ही बचाव सामन के साथ जवान रेस्क्यू करते थे। जिसके बाद बाहर से रेस्क्यू टीम को बनाकर आपदा से निपटना पड्ता था। लेकिन इस वर्ष से विभाग के पास कई आधुनिक मशीनरी और उपकरण आने के बाद जवानों को रेस्क्यू के दौरान मशीनरी से काम ले सकेंगे। होमगार्ड विभाग का दावा है कि जिले में यदि जिले के किसी भी क्षेत्र में बाढ़ के हालात बने तो लोगों के बचाव के लिए पूरी मुश्तैद हैं। वहीं जिले के ३४ थानों में से सिर्फ कुछ ही थानों में वोट मौजूद हैं। बाकी थाना क्षेत्रों में अगर बाढ़ के हालात बने तो जिला मुख्यालय से मदद आने तक रस्सा, कांटा-बिलैया व अन्य उपकरणों के भरोसे रेस्क्यू कार्य चलाना पड़ेगा। हालांकि टीम कुछ घंटे में वहां पहुंचकर रेस्क्यू शुरू कर देगी।
वहीं जिले में पुलिस भी मात्र होमगार्ड के जवानों के भरोसे पर ही टिकी है। थानों में रेस्क्यु के लिए कोई इंतजाम नहीं होने से कई बाद स्थिति बडी गंभीर बन जाती है। बीते वर्ष में समय पर बेहतर सहायता नहीं पहुंचना और थानों में जवानों को रेस्क्यु के लिए प्रशिक्षित नहीं होने से कई लोगों को जान से भी हाथ धोना पडा था।
आपदा प्रबंधन के लिए मौजूद उपकरण व टीम
– कुल जवान – १५०
– तैराक जवान- ४०- एसडीआरएफ- १५
– आपदा मित्र- ३००- लाइफ जैकेट- १००
– इंफ्लाटेबल रबर बोट ६, एक बोट की क्षमता ६ व्यक्ति
– ओबीएम- ४
– फाइबर बोट ६, एक बोट की क्षमता एक में ६ व दो में १२ व्यक्ति
– 40 एचपी टू स्ट्रोक इंजन- ००- 25 एचपी इंजन फोर स्ट्रोक- ४
– एअर प्रेशर पम्प- ४
– गोरबेल कैमरा- १ वाटरप्रूफ
– ड्रैगन सर्च लाइट- ४०
– सेल टार्च- ३०- एलईडी टार्च- ३
– ऑस्का लाइट- ३
– टॉर्च वाले हेलमेट- २०
– हेलमेट- ४०- बॉडी बर्न कैमरा- १
– आपदा मित्र के पास रेस्क्यू के लिए किट- ३००
– छाता- ४०- रेन कोट- १००
– फास्टएड बोक्स- २०- नायलोन रस्सा- ४० नग ४०-४० फीट
– नायलोन रस्सा- ५ नग १००- १०० फिट
– इक्टेनसन लेडर- २
– कांटा बिलैया- ४
– फायर इंटीलूसर- ५
– केबिल- २
– रेस्क्सू वाहन- १
– स्ट्रेचर- १०
– रिफ्लेक्टिव सेंट जैकेट- २५- हैवी ड्यूटी वर्क ग्लव्ज- १०
– मेगा फोन- ४०- जूता- ४०
– बोल्ट कटर- ६
– कंक्रीट कटर -३
– वूड कटर- ४
– रोटरी हेमर ड्रिल- २
– एंकर- २
– जनरेटर- १ छमता २५० केबी
– डीप डाई सूट- २ (गहराई में जाने के लिए)
– स्वीम सूट- १००- टैक सूट- १००
– रिर्चाबेल टार्च- २
– टेंट- १०- अस्थाई रेस्क्यू कैंप टेंट- १० (२५ लोग लोग की क्षमता)
इनका कहना है
हमारी ओर से किसी भी आपदा के लिए जवान और आपदा मित्र पूरी तरह से स्थिति से निपटने के लिए २४ घंटे तैनात हैं। शासन द्वारा दिए गए उपकरणों जवानों के लिए रैस्क्यू के दौरान काफी मददगार हैं। इस वर्ष कई जरूरी उपकरण खरीद किए गए हैं जो आपदा में रेस्क्यू के दौरान जवारों के काम आएंगे।
करन सिंह डिस्ट्रिक्ट कमांटेंट होमगार्ड छतरपुर